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केले और संतरे बांटने तक सीमित हैं एनजीओ
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी
Updated Tue, 03 Jan 2017 01:38 AM IST
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25 NGOs Denied Foreign Donation Permits For 'Anti-National Activities'
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महिला हिंसा और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने का दावा करने वाले एनजीओ और महिला संगठनों ने सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती दरिंदगी की शिकार महिला की मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया।
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राज्य महिला आयोग उपाध्यक्ष ने भी अस्पताल पहुंचकर सिर्फ औपचारिकता निभाई। हालांकि, उपाध्यक्ष का कहना है कि पीड़िता को हर हाल में न्याय दिलाएंगी। हल्द्वानी में महिला अधिकारों की लड़ाई का दावा करने वाले कई एनजीओ और महिला संगठन हैं।
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अधिकांश संगठनों का खुद को जिंदा रखने का यही हथियार है। संगठनों से जुड़ी महिलाएं सिर्फ अस्पतालों में मरीजों को दर्जन भर केले और फल बांटकर सोशल मीडिया और अखबारों में फोटो वायरल कर वाहवाही से सहानुभूति हासिल करती हैं।
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कई संगठन महिला हिंसा और उत्पीड़न के प्रति जन जागरूकता के लिए सेमिनार आयोजित करते हैं। दरअसल, ऐसे संगठनों को महिला अधिकारों से कोई सरोकार नहीं होता है। वो सिर्फ सेमिनार के लिए प्रायोजक ढूंढकर अपना उल्लू सीधा करते हैं।
हल्द्वानी में ऐसे एनजीओ और महिला संगठनों की बाढ़ है। कई संगठन तो गरीबों को फल और पुराने कपड़े बांटकर सुर्खियों में रहते हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती दरिंदगी की शिकार पीड़िता के मामले में कुछ महिलाओं को छोड़कर बाकी संगठन चुप्पी साध गए हैं।
संगठनों ने पीड़िता की मदद करना तो दूर अस्पताल तक जाना बेहतर नहीं समझा। राज्य महिला आयोग उपाध्यक्ष अमिता लोहुमी ने भी औपचारिकता निभाई। उपाध्यक्ष का कहना है कि पुलिस को मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच करनी चाहिए। फिर भले ही दोषी कोई भी क्यों न हो। उपाध्यक्ष के मुताबिक अब वह खुद पीड़िता के न्याय के लिए लड़ेंगी।