आई कार्ड नहीं चेस्ट बैज देता है एटीआई
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प्रशासनिक अधिकारी पूर्णिमा ने बताया कि रूबी के पहचान पत्र में यूपीएससी नैनीताल लिखा है, जबकि यहां ऐसा कोई संस्थान नहीं है। उन्होंने बताया कि टीम ने एक जनवरी से 31 मार्च 2014 तक चले कोर्स की जानकारी भी प्राप्त की। इस दौरान टीम ने रूबी की फोटो के आधार पर कई अधिकारियों और कर्मियों से बातचीत की, लेकिन कोई भी रूबी को नहीं पहचान सका। अलबत्ता कोर्स के दौरान रहने वाले सभी लोगों को पहचानना खासा आसान है। उन्होंने बताया कि एसआईटी ने जांच के दौरान बैच खरीदे जाने वाले संस्थान के संबंध में भी यहां के अधिकारियों से पूछताछ की। बताया जाता है कि टीम ने नगर के कुछ साइबर और आई कार्ड बनाने वाली प्रेस में भी पड़ताल की।
साथ आए वकील के प्रतिनिधि बाहर ही रहे, गुस्सा
नैनीताल। पुलिस लाइन में एसआईटी सदस्यों और रूबी चौधरी के गंगा गेस्ट हाउस में जाने और दोपहर बाद करीब 3:40 बजे बाहर निकलने तक टीम के साथ आए वकील के प्रतिनिधि अरुण खन्ना बाहर ही खड़े रहे। उनका कहना था कि न्यायालय के आदेशों के क्रम में टीम को उन्हें हर जांच और पूछताछ के दौरान समीप ही रखना था। हालांकि वह संबंधित आर्डर नहीं दिखा सके, लेकिन टीम और पुलिस के खिलाफ उनके रोष से मीडिया उन तक पहुंची। जिस पर उन्होंने आशंका व्यक्त की कि पुलिस उन्हें दूर रखकर जांच को घुमा सकती है। इस मामले में रसूखदार लोगों की संलिप्तता के चलते मामला खासा संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रतूड़ी आरोपी रूबी की ओर से केस देख रहे हैं। इसी क्रम में उन्हें टीम के साथ भेजा गया है।
परिजनों ने कहा, हर दोषी को सजा मिले
नैनीताल। एसआईटी और रूबी के साथ एक अन्य वाहन में पहुंचेे रूबी के स्यामली ऊदपुर निवासी मौसा वेदपाल और मामा अजय ने बताया कि वह चाहते हैं कि मामले की सीबीआई जांच हो। यदि रूबी दोषी हो तो उसे सजा मिले, लेकिन मामले में ऊंची पहुंच वाले लोगों की संलिप्तता की पुष्टि होने पर उन्हें भी सजा मिलनी चाहिए। कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए वह जांच के हर पहलू पर नजर रखे हुए हैं। इसी क्रम में वह नैनीताल भी आए हैं।