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अराजकों के लिए पेटीएम बन गया ‘पाया तो मौका’

Sat, 24 Dec 2016 01:33 AM IST
भूपेश कन्नौजिया
भूपेश कन्नौजिया Updated Sat, 24 Dec 2016 01:33 AM IST
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Arajkon to become Paytm found 'the chance'
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नोटबंदी के बाद पैसों की कमी से लोग परेशान हैं। वहीं इस परेशानी से बचने के लिए और देश को कैशलेस बनाने की दिशा में ऑनलाइन तथा ई-वॉलेट पेमेंट का चलन काफी बढ़ा है। पर शायद अपने शहर में पेटीएम की सहूलियत कुछ अराजक तत्वों के लिए सिर्फ ‘पाया तो मौका’ बनकर ही रह गई है।

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ऐसा ही एक मामला सामने आया है, पेटीएम से पेमेंट करने के दौरान कुछ मनचलों ने एक लड़की का फोन नंबर हासिल कर लिया और फिर उसे बार-बार फोन और मैसेज कर परेशान कर रहे हैं।
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आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद से ऑनलाइन और ई-वॉलेट पेमेंट का चलन देशभर में काफी बढ़ा है। नोटबंदी के 20-25 दिन बीतते-बीतते किराना स्टोर, सब्जी वालों से लेकर ठेले वालों तक ने भी ऑनलाइन और ई-वॉलेट से कारोबार करना शुरू कर दिया। लेकिन यह सहूलियत कम से कम अपने शहर में लड़कियों के लिए सिर दर्द बनने लगी है।
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ऐसा ही एक मामला बृहस्पतिवार को सामने आया, जिसमें कॉलेज में पढ़ने वाली एक लड़की को पिछले कई दिनों से कुछ अनजाने नंबरों से बार-बार फोन और मैसेज आने लगे। एक मनचले ने तो उसे ह्वाट्स एप पर मैसेज कर प्यार का इजहार तक कर दिया। परेशान लड़की ने घबराकर मामले की जानकारी अपने परिजनों को दी।

परिजनों ने मामले में पुलिस की मदद लेनी चाही और बेटी को लेकर कोतवाली तक पहुंच भी गए। लेकिन, फिर लोक लाज के चलते कोतवाली के बाहर ही छात्रा और उसके भाई के कदम रुक गए। अमर उजाला संवाददाता की नजर जब परेशान छात्रा और उसके भाई पर पड़ी तो उनकी समस्या के बारे में पूछा।

नाम न छापने की शर्त पर लड़की के भाई ने पूरा प्रकरण सामने रख दिया। लड़की ने बताया कि उसने जब से ई-वॉलेट के जरिए दुकानों या सब्जी की खरीदारी के लिए पेटीएम से पेमेंट करने के लिए नंबर देना शुरू किया, उसके कुछ दिनों बाद से ही इस तरह के फोन और मैसेज आना शुरू हुए हैं।

क्योंकि हर जगह चाहे सब्जी का ठेला हो या शॉपिंग कांप्लेक्स दुकानदार को अपना फोन नंबर देना पड़ता है और आसपास कई लोग मौजूद रहते हैं। शायद इसी तरह उसका नंबर कुछ मनचलों के हाथ लग गया होगा। युवती ने बताया कि परेशान होकर अब उसने अपना नंबर ही बंद कर दिया है।


युवती के मुताबिक ऐसे ही कई और भी मामले कई लोगों के साथ हो रहे होंगे, जो उसकी तरह ही लोक लाज के चलते सामने नहीं आ पा रहे हों। इस संबंध में आईटी अधिकारी मनीष चौधरी का कहना है की पेटीएम ई-वॉलेट का इस्तेमाल कीजिए और यदि आप दुकानदार को अपना नंबर नहीं देना चाहते तो इसके लिए क्यूआर कोड का सहारा लेना चाहिए।

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