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अरब सागर की हवाएं उत्तर भारत में नहीं पड़ने देतीं सूखा
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हल्द्वानी (दीपक सिंह नेगी)। देश में सूखे की स्थिति में भी उत्तर भारत, सिंधु-गंगा के मैदानी इलाके औैर भारत के पूर्वी भाग में मुख्य मानसून जोन के मुकाबले पर्याप्त वर्षा होती है। इसका कारण ये है कि सूखा पड़ने पर हिंद महासागर से आने वाली हवाएं कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में अरब सागर से आने वाली हवाएं सीधे उत्तर भारत का रुख करती हैं।
चीन के एक विवि में कार्यरत नैनीताल निवासी वैज्ञानिक प्रो. गायत्री कठायत ने टीम के साथ भारत के कमजोर और मजबूत मानसून वाले सालों पर शोध किया। उन्होंने एक जलवायु मॉडल तैयार कर भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा ऋतु में होने वाली बारिश नमी के पांच स्रोत (अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, उत्तरी हिंद महासागर, दक्षिणी हिंद महासागर और प्रशांत महासागर) पर अध्ययन किया। नमी के पांचों स्रोतों को अलग-अलग रंगों से चिह्नित करने के बाद चिह्नित क्षेत्रों से नमी के योगदान और उसमें कमजोर और मजबूत मानसून वाले वर्षों में आए परिवर्तनों का विश्लेषण किया गया। जापान के प्रोफेसर के योशीमुरा और मासाहिरो तनौए ने 1979 से 2010 के बीच का डाटा उपलब्ध कराया। अत्यधिक सूखे की स्थिति में किस स्रोत से नमी का क्या योगदान है, यह जानने के लिए कमजोर मानसून के वर्ष (1982, 1987, 2002, 2004 और 2009) और मजबूत मानसून (1983, 1988 और 2009) का अध्ययन किया। इससे निष्कर्ष निकला कि मजबूत मानसून के सालों में दक्षिण हिंद महासागर से उठने वाली मानसूनी हवाओं की गति तेज होती है और यह अरब सागर से तीव्र गति से पश्चिम भारत में प्रवेश करती हैं, जिससे पूरे भारत में अच्छी वर्षा होती है। इसके उलट जब इन मानसूनी हवाओं की गति मंद होती है तो ये पश्चिमी घाटों से भारत में प्रवेश नहीं कर पातीं, जिससे सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में मानसून गुजरात से होते हुए उत्तर भारत में प्रवेश करता है। यहां बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं के साथ मिलकर यह उत्तराखंड और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में पर्याप्त वर्षा करता है।
उल्लेखनीय तथ्य
- अरब सागर, उत्तरी और दक्षिणी हिंद महासागर मानसून के लिए महत्वपूर्ण नमी क्षेत्र हैं।
- अरब सागर और भूभाग मानसून काल में उपमहाद्वीप में नमी के योगदान को प्रभावित करता है।
बीते माह प्रकाशित हुआ शोध पत्र
प्रोफेसर गायत्री ने बताया कि उनका शोधपत्र 20 मई को कम्यूनिकेशन अर्थ एंड एनवायरमेंट में प्रकाशित हुआ था। शोध में कैलिफोर्निया के वैज्ञानिक प्रो. आशीष सिन्हा, जापान के प्रोफेसर के योशीमुरा और हाई चेंग ने उनका सहयोग किया।
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भविष्य में जल संकट से बचने के लिए जल संग्रह जरूरी
गायत्री का कहना है कि गर्मियां आते ही जल संकट गहराने लगता है। पानी की कमी से पहाड़ से लेकर मैदानी हिस्सों तक के लोग परेशान रहते हैं। ऐसे में भविष्य में जल संकट से बचने के लिए हमें अभी से जल संग्रह पर ध्यान देना होगा। उत्तर भारत में अमूमन अच्छी वर्षा होती है। ऐसे में सरकार को जल संग्रह करने के लिए नीतियां बनानी चाहिए और इसके लिए वैश्विक अग्रणी अत्याधुनिक जलवायु विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए। अगर भविष्य में स्वच्छ जल चाहिए तो उसके लिए अभी से प्रयास करने होंगे।
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चीन के एक विवि में कार्यरत नैनीताल निवासी वैज्ञानिक प्रो. गायत्री कठायत ने टीम के साथ भारत के कमजोर और मजबूत मानसून वाले सालों पर शोध किया। उन्होंने एक जलवायु मॉडल तैयार कर भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा ऋतु में होने वाली बारिश नमी के पांच स्रोत (अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, उत्तरी हिंद महासागर, दक्षिणी हिंद महासागर और प्रशांत महासागर) पर अध्ययन किया। नमी के पांचों स्रोतों को अलग-अलग रंगों से चिह्नित करने के बाद चिह्नित क्षेत्रों से नमी के योगदान और उसमें कमजोर और मजबूत मानसून वाले वर्षों में आए परिवर्तनों का विश्लेषण किया गया। जापान के प्रोफेसर के योशीमुरा और मासाहिरो तनौए ने 1979 से 2010 के बीच का डाटा उपलब्ध कराया। अत्यधिक सूखे की स्थिति में किस स्रोत से नमी का क्या योगदान है, यह जानने के लिए कमजोर मानसून के वर्ष (1982, 1987, 2002, 2004 और 2009) और मजबूत मानसून (1983, 1988 और 2009) का अध्ययन किया। इससे निष्कर्ष निकला कि मजबूत मानसून के सालों में दक्षिण हिंद महासागर से उठने वाली मानसूनी हवाओं की गति तेज होती है और यह अरब सागर से तीव्र गति से पश्चिम भारत में प्रवेश करती हैं, जिससे पूरे भारत में अच्छी वर्षा होती है। इसके उलट जब इन मानसूनी हवाओं की गति मंद होती है तो ये पश्चिमी घाटों से भारत में प्रवेश नहीं कर पातीं, जिससे सूखे की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में मानसून गुजरात से होते हुए उत्तर भारत में प्रवेश करता है। यहां बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं के साथ मिलकर यह उत्तराखंड और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में पर्याप्त वर्षा करता है।
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उल्लेखनीय तथ्य
- अरब सागर, उत्तरी और दक्षिणी हिंद महासागर मानसून के लिए महत्वपूर्ण नमी क्षेत्र हैं।
- अरब सागर और भूभाग मानसून काल में उपमहाद्वीप में नमी के योगदान को प्रभावित करता है।
बीते माह प्रकाशित हुआ शोध पत्र
प्रोफेसर गायत्री ने बताया कि उनका शोधपत्र 20 मई को कम्यूनिकेशन अर्थ एंड एनवायरमेंट में प्रकाशित हुआ था। शोध में कैलिफोर्निया के वैज्ञानिक प्रो. आशीष सिन्हा, जापान के प्रोफेसर के योशीमुरा और हाई चेंग ने उनका सहयोग किया।
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भविष्य में जल संकट से बचने के लिए जल संग्रह जरूरी
गायत्री का कहना है कि गर्मियां आते ही जल संकट गहराने लगता है। पानी की कमी से पहाड़ से लेकर मैदानी हिस्सों तक के लोग परेशान रहते हैं। ऐसे में भविष्य में जल संकट से बचने के लिए हमें अभी से जल संग्रह पर ध्यान देना होगा। उत्तर भारत में अमूमन अच्छी वर्षा होती है। ऐसे में सरकार को जल संग्रह करने के लिए नीतियां बनानी चाहिए और इसके लिए वैश्विक अग्रणी अत्याधुनिक जलवायु विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए। अगर भविष्य में स्वच्छ जल चाहिए तो उसके लिए अभी से प्रयास करने होंगे।