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Uttarakhand High Court: वन रावतों के मामले में केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब, पढ़ें पूरा मामला
Thu, 07 Sep 2023 04:30 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Thu, 07 Sep 2023 04:30 PM IST
सार
उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कहा था कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पिथौरागढ़ ने वन रावत, जनजाति का सर्वे किया है।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में वन रावत जनजाति के संरक्षण व उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार व केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई नवंबर के पहले सप्ताह में होगी।
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मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कहा था कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पिथौरागढ़ ने वन रावत, जनजाति का सर्वे किया है। यह जनजाति पिथौरागढ़, चंपावत व ऊधमसिंह नगर के जंगल में बसे गांवों रहती है और उनकी आबादी 850 के करीब है।
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इस सर्वे के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में वन रावतों की औसत आयु 55 साल से कम है। उनके गांव से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 20 से 25 किमी दूर हैं। इन गांवों में सड़क, शिक्षा, बिजली, पानी आदि मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। ये लोग वर्तमान दौर में भी अलग हैं। सरकार वन अधिनियम के आधार पर वहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध न कराने की बात कहती है जबकि केंद्र सरकार के वन अधिकार अधिनियम 2006 में वनरावतों के गांवों में आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने में वन अधिनियम के नियमों में छूट दी गई है।