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...और ये शादी की अंतिम सालगिरह बन गई
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी
Updated Wed, 15 Apr 2015 02:17 AM IST
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दुर्घटना और लापरवाही के कारण एक हंसता-खेलता परिवार बिखर गया। शादी की 14वीं सालगिरह पर देवी के दर्शन कर लौट रहे जोशी को नहीं पता था कि गांधी स्कूल के पास ट्रक काल बनकर उनकी पत्नी का इंतजार कर रहा है। बाली लेने की इच्छा जताने के साथ ही पत्नी सबको अलविदा कह गई।
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तीनपानी निवासी पत्रकार ताराचंद्र जोशी का विवाह किरण के साथ 14 अप्रैल 2001 को हुआ था। उनके दो बेटे परिणय (13) और निखिल (11) हैं। बड़े बेटे परिणय का दाखिला दूसरे स्कूल में होना था, जबकि निखिल दून स्कूल गौजाजाली में पढ़ता है। जोशी पत्नी किरण के साथ शादी की सालगिरह पर रानीबाग स्थित जियारानी के मंदिर से दर्शन कर लौट रहे थे। पत्नी ने सालगिरह पर कान की बाली दिलाने की फरमाइश की।
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जोशी ने कहा कि अभी चलकर खरीद लेंगे, इसी बीच बेटे परिणय का फोन आया कि पापा लड्डू लेकर आना सब लोग साथ बैठकर खाएंगे। किसी को भी नहीं पता था कि नियति को कुछ और मंजूर था। गांधी स्कूल के पास ट्रक की टक्कर और एसटीएच के डाक्टरों की लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली।
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पिता का चेहरा ही देखता रहा बेटा
एसटीएच में किरण की मौत के बाद हंगामा हो रहा था और जोशी का बड़ा बेटा परिणय अपने पिता ताराचंद्र जोशी का चेहरा देख रहा था। हतप्रभ खड़े परिणय को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हुआ है। ताराचंद्र जोशी अपने बेटे को लिपटाकर उसके सिर पर हाथ सहला रहे थे। बेटे के सिर पर हाथ सहलाते-सहलाते जोशी फफक पड़े और कहा कि अब बच्चों का क्या होगा, कौन संभालेगा इनको। कुछ देर बाद बेटे को अपने दोस्त के साथ घर भेज दिया।