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प्रशासन पर भारी अराजकता
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
Updated Wed, 07 Sep 2016 11:17 PM IST
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छात्रसंघ चुनाव में प्रशासन पर अराजकता भारी पड़ती है। सबकुछ जानते हुए भी पुलिस और महाविद्यालय प्रशासन छात्रसंघ चुनाव के पदाधिकारियों के आगे नतमस्तक हो जाता है। आखिर कौन सा ऐसा दबाव है जो प्रशासन के हाथ बांधे रखता है।
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छात्रसंघ चुनाव में कांग्रेस, भाजपा समेत अन्य राजनीतिक दल पर्दे के पीछे से पूरा जोर लगाते हैं। चुनाव में सत्ता की हनक साफ दिखाई पड़ती है। लिंगदोह कमेटी के अनुसार कालेज परिसर में जुलूस, नारेबाजी, पंफ्लेट बांटने समेत तमाम प्रतिबंध हैं।
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इन प्रतिबंधों के बावजूद प्रतिवर्ष छात्रसंघ चुनाव में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों धज्जियां उड़ती हैं। पुलिस-प्रशासन एवं कालेज प्रशासन मूक दर्शक बना रहता है। कालेज प्रशासन नोटिस देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है।
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सवाल ये उठता है कि कालेज में अराजकता किसके इशारे पर होती है। छात्र नेताओं को किसका संरक्षण होता है। किसके दबाव में पुलिस-प्रशासन एवं कालेज प्रशासन झुक जाता है।
लिंगदोह कमेटी ने रिपोर्ट तैयार करते वक्त या तो धरातल की स्थिति का अध्ययन नहीं किया और रिपोर्ट तैयार कर दी। कानून बनाना आसान होता है मगर उसे लागू करना कठिन होता है। ऐसा पूरे देश में होता है। सियासी दबाव भी एक वजह होती है।
- डा. आरएस भाकुनी, चीफ प्राक्टर, एमबीपीजी कालेज
कालेज में छात्रसंघ चुनाव को लेकर पुलिस गंभीर है। फोर्स कालेज के सामने उपद्रव करने पर सख्त कार्रवाई करेगी। इस मामले में पुलिस ने भोटिया पड़ाव क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है। अधीनस्थों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं।
- स्वीटी अग्रवाल एसएसपी नैनीताल