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सीएए और एनआरसी के खिलाफ हल्द्वानी में उमड़ा जनसैलाब

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 21 Dec 2019 11:49 PM IST
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a huge cowd get together in haldwani to protest against caa and nrc
हल्द्वानी में ताज चौराहे पर नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में हुई सभा में उमड़ी भीड़।
हल्द्वानी। नागरिकता संशोधन विधेयक और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ शनिवार को हल्द्वानी की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों लोगों ने शांतिपूर्वक अपना विरोध दर्ज कराया और देश को अमन का पैगाम दिया। उन्होंने सीएए को काला कानून और मुल्क की गंगा जमुनी तहजीब को धूमिल करने वाला बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की पुरजोर मांग उठाई। उसके बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम सविन बंसल को सौंपा।
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शनिवार की सुबह से ही बनभूलपुरा, आजाद नगर, इंदिरा नगर, नई बस्ती, उजाला नगर, जवाहर नगर, गौजाजाली समेत अन्य क्षेत्रों के लोग मुजाहिद चौक पर जुटने शुरू हो गए थे। दस बजे तक लोगों का तांता लग गया। उसके बाद शहर के उलमा के नेतृत्व में लोग तिरंगा लहराते और देशभक्ति के गीत गाते जुलूस की शक्ल में ताज चौराहा पहुंचे। यहां लोगों को खिताब करते हुए जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती शाहिद अजहरी ने कहा कि सीएए और एनआरसी मुल्क की गंगा जमुनी तहजीब और संविधान के खिलाफ है।
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इससे जनता में गुस्सा है, लेकिन सभी को सब्र से काम लेना है। उन्होंने कहा कि मुल्क की आजादी में अशफाक उल्ला खां, सरदार भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल, रानी लक्ष्मीबाई, सरोजिनी नायडू समेत सभी धर्म समुदाय के लोगों ने कुर्बानी दी। अंग्रेजों के खिलाफ शेरे मैसूर टीपू सुल्तान आखिरी दम तक लड़ते रहे। मुफ्ती शाहिद ने आरोप लगाया कि जामिया, जेएनयू और एएमयू के छात्रों द्वारा विरोध करने पर पुलिस ने लाठियां बरसायी। गोलियां भी चलाईं, लेकिन विरोध रुका नहीं है। अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे लोगों पर गोली चलाना कहीं से भी उचित नही है।
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इससे पूर्व मौलाना मोहम्मद आसिम, मौलाना शाहिद रजा, मौलाना मुकीम, मौलाना सय्यद इरफान रसूल आदि उलमा ने भी लोगों को संबोधित किया और सीएए को काला कानून बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून की वापसी तक विरोध लगातार जारी रहेगा। कहा, नागरिकता कानून धार्मिक भेदभाव करता है।
मुस्लिम समुदाय में 85 फीसदी अशिक्षित
जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती शाहिद अजहरी ने कहा कि देश के 85 फीसदी मुस्लिम अशिक्षित हैं। काफी क्षेत्रों में बाढ़ के चलते कागजात समाप्त हो गए। ऐसे हालात में कोई नागरिकता के लिए कैसे कागजात पेश करेगा। देश की काफी आबादी खाने को मोहताज है।
राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा
राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन को मुफ्ती शाहिद अजहरी ने पढ़कर सुनाया। बताया कि हम (संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी पंथ निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य, राष्ट्र की एकता और अखंडता) बंधुता बढ़ाने वाली मूलभूत संवैधानिक भावनाओं को मानने वाले हैं। नागरिकता अधिनियम 1956(57-1955) वर्तमान सरकार द्वारा किए गए संशोधन नागरिक संशोधन अधिनियम 2019-47-2019 का घोर विरोध करते हैं।
प्रश्नगत संशोधन भारतीय संविधान की मूल संरचना भावना, आत्मा के विपरीत और संविधान के अनुच्छेद 14,15 के खिलाफ है। यह संशोधन भेदभाव उत्पन्न कर नागरिकों के बीच राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता को प्रभावित करता है। संशोधन की स्वीकृति को निरस्त कर निष्कासित किया जाए।
नजर नीची करो और घर चले जाओ
जुलूस के बाद मुफ्ती शाहिद अजहरी ने नबी की याद दिलाते हुए कहा कि मुसलमानों को नजर नीची करके घर चले जाना चाहिए। किसी की तरफ निगाह नहीं उठाना चाहिए।
विरोध में उड़ाए काले गुब्बारे, पोस्टर दिखाए
एनआरसी का विरोध करते समय ताज चौराहे के पास लोगों ने काले गुब्बारे उड़ाए। तरह-तरह तरह के पोस्टर को दिखाकर अपना विरोध भी दर्ज किया। सीएए और एनआरसी का विरोध करने के लिए शहीद अशफाक उल्ला खान, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की एक साथ फोटो लगा पोस्टर लगाकर घूम रहे थे।
पूर्व पार्षद शकील अहमद सलमानी गले में नागरिकता संशोधन बिल वापस लो की तख्ती लगाए घूम रहे थे। एक युवक नो सीसीए, साइलेंट नो वॉयलेंस का पोस्टर थामे था। रिजेक्ट कैब, बायकाट एनआरसी, एक युवक ने अलर्ट इंडियन, न्यू हिटलर इज आन इट्स वे, का पोस्टर लेकर घूम रहा था।
मंच से सियासी लोगों को नीचे उतारा
ताज चौराहा स्थित मंच पर राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी चढ़ गए थे। इससे मंच के टूटने का भी अंदेशा था। धक्कामुक्की होने पर मुफ्ती शाहिद अजहरी ने लोगों को मंच से नीचे उतरने की सख्त हिदायत दी। दो-तीन बार कहने पर राजनीतिज्ञ मंच से नीचे उतरे। इसके बाद मंच का संचालन शुरू किया।

फसाद करने वालों को पकड़कर पुलिस को सौंप दें
मंच पर मौजूद मुफ्ती और मौलाना ने कहा कि अगर कोई भीड़ के बीच फसाद करने की कोशिश करता है तो उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दो। फसाद के लिए यहां कोई जगह नहीं है।
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