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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लांच हो सकते हैं नेता पुत्र
Nainital
Updated Fri, 20 Dec 2013 05:49 AM IST
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हल्द्वानी। डाक्टर का बेटा डाक्टर और इंजीनियर का इंजीनियर तो नेता इसमें पीछे क्यों रहें? नेताओं के बेटों को भी नेता बनने का पूरा हक है। उत्तराखंड के नेता इसी परंपरा को सार्थक करने में जुटे हैं। अधिकांश नेताओं ने बतौर उत्तराधिकारी अपने बेटों को राजनीति में उतार दिया है। कुछ नेता त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बहाने बेटों को राजनीति में लांच करने की जुगत भिड़ा रहे हैं। इसके लिए जिला पंचायत की सीटों का मनमाफिक निर्धारण करने के लिए शासन और प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा है।
राजनीति समाजसेवा नहीं बल्कि मुनाफे का बिजनेस बन चुकी है। जनता को बरगलाने वाले हुनरमंद नेताओं की खूब चल रही है। जो जितना माहिर उसका टर्नओवर उतना ही अधिक है। लोकतंत्र में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव ही राजनीति में लांच होने का पहला पायदान है। जो इस पायदान से सफलता की मंजिल चढ़ता है असली मायने में जमीन से जुड़ा वही नेता साबित हो पाता है। थोपे गए (पैराशूट) नेताओं को जनता अक्सर नकार देती है।
नैनीताल जिले में कद्दावर नेताओं के बेटे पहले ही राजनीति में लांच हो चुके हैं। नेता पुत्रों ने वोटिंग के माध्यम से जनता का सामना नहीं किया है। इन्हें सीधे दायित्व सौंपा गया है। कुछ नेता त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के माध्यम से अब अपने बेटों को लांच करने का गुणा-भाग कर रहे हैं। इसके लिए पूरी तरह से फील्डिंग भी तैयार हो चुकी है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत की सीट सबसे अहम हैं। इसमें कई ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों का नेतृत्व होता है। 2001 के परिसीमन और जनसंख्या के हिसाब से जिले में जिला पंचायत की 26 सीटें थी, इनमें तीन सीटें हल्द्वानी से हैं। 2011 के परिसीमन के हिसाब से सीटें बढ़नी लगभग तय हैं।
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राजनीतिक सूत्र बताते हैं, हल्द्वानी में जिला पंचायत की सीटें बढ़कर पांच से छह तक हो सकती हैं। इनमें बरेली रोड और हल्द्वानी की सीट सबसे महत्वपूर्ण हैं। सीटों को मनमाफिक (सुरक्षित) बनाने के लिए नेताओं का प्रशासन पर काफी दबाव है, ताकि उनके बेटे ओपनिंग के साथ राजनीति में लंबी पारी खेल सकें। सूत्र बताते हैं, बरेली रोड में एक सीट बढ़ती तय है। वर्तमान में मंडी से लेकर हल्दूचौड़ (गुमटी) तक एक सीट है, जो कि भाजपा के खाते में थी। नए परिसीमन में मंडी से मोटाहल्दू और मोटाहल्दू से हल्दूचौड़ तक अलग-अलग दो सीटें बननी तय हैं। मोटाहल्दू से हल्दूचौड़ की सीट सामान्य और मंडी से मोटाहल्दू की सीट महिला आरक्षित हो सकती है। हालांकि, सीटें बढ़ने का खुलासा 24 दिसंबर से दो जनवरी के बीच कभी भी हो सकता है।
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राजनीति समाजसेवा नहीं बल्कि मुनाफे का बिजनेस बन चुकी है। जनता को बरगलाने वाले हुनरमंद नेताओं की खूब चल रही है। जो जितना माहिर उसका टर्नओवर उतना ही अधिक है। लोकतंत्र में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव ही राजनीति में लांच होने का पहला पायदान है। जो इस पायदान से सफलता की मंजिल चढ़ता है असली मायने में जमीन से जुड़ा वही नेता साबित हो पाता है। थोपे गए (पैराशूट) नेताओं को जनता अक्सर नकार देती है।
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नैनीताल जिले में कद्दावर नेताओं के बेटे पहले ही राजनीति में लांच हो चुके हैं। नेता पुत्रों ने वोटिंग के माध्यम से जनता का सामना नहीं किया है। इन्हें सीधे दायित्व सौंपा गया है। कुछ नेता त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के माध्यम से अब अपने बेटों को लांच करने का गुणा-भाग कर रहे हैं। इसके लिए पूरी तरह से फील्डिंग भी तैयार हो चुकी है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत की सीट सबसे अहम हैं। इसमें कई ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों का नेतृत्व होता है। 2001 के परिसीमन और जनसंख्या के हिसाब से जिले में जिला पंचायत की 26 सीटें थी, इनमें तीन सीटें हल्द्वानी से हैं। 2011 के परिसीमन के हिसाब से सीटें बढ़नी लगभग तय हैं।
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राजनीतिक सूत्र बताते हैं, हल्द्वानी में जिला पंचायत की सीटें बढ़कर पांच से छह तक हो सकती हैं। इनमें बरेली रोड और हल्द्वानी की सीट सबसे महत्वपूर्ण हैं। सीटों को मनमाफिक (सुरक्षित) बनाने के लिए नेताओं का प्रशासन पर काफी दबाव है, ताकि उनके बेटे ओपनिंग के साथ राजनीति में लंबी पारी खेल सकें। सूत्र बताते हैं, बरेली रोड में एक सीट बढ़ती तय है। वर्तमान में मंडी से लेकर हल्दूचौड़ (गुमटी) तक एक सीट है, जो कि भाजपा के खाते में थी। नए परिसीमन में मंडी से मोटाहल्दू और मोटाहल्दू से हल्दूचौड़ तक अलग-अलग दो सीटें बननी तय हैं। मोटाहल्दू से हल्दूचौड़ की सीट सामान्य और मंडी से मोटाहल्दू की सीट महिला आरक्षित हो सकती है। हालांकि, सीटें बढ़ने का खुलासा 24 दिसंबर से दो जनवरी के बीच कभी भी हो सकता है।