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30 लाख का कारोबार, निगम को धेला भी नहीं

Wed, 04 Dec 2013 05:46 AM IST
Nainital
Nainital Updated Wed, 04 Dec 2013 05:46 AM IST
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हल्द्वानी। नगर निगम आर्थिक कंगाली से जूझ रहा है, वहीं शहर की सीमा में अवैध होर्डिंग लगाने वाले चांदी काट रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक होर्डिंग/बैनर लगाने में तीस लाख से ज्यादा का कारोबार हो रहा है, बावजूद इसके निगम के हत्थे एक धेला भी नहीं आ रहा है।
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शहर को होर्डिंग से पाट दिया गया है। हमने तिकोनिया से सौरभ होटल तक होर्डिंग गिनने शुरू किया। इसके बाद सौरभ होटल के पास नैनीताल रोड के समानांतर ठंडी सड़क तिकोनिया तक पहुंचे। इन दोनों मार्गों पर छोटे-बड़े करीब 110 होर्डिंग लगे हुए हैं। इस तरह की शहर के 13 किमी और आंतरिक मार्गों का औसत निकाला जाए, तो इनकी संख्या तेरह सौ से ऊपर होती है। बहरहाल, अगर हम निगम के सर्वे की बात करें, तो उसके अनुसार 785 छोटे, 100 बड़े और करीब सवा सौ मध्यम श्रेणी के होर्डिंग, बैनर, यूनिपोल लगे हैं, अगर इनसे आज की तारीख में टैक्स मिले तो छोटे वालों से करीब ढाई लाख, मध्यम वालों से ढाई लाख और बड़े होर्डिंग से आसानी से पांच लाख का राजस्व (कुल दस लाख) मिलना चाहिए, जबकि यह व्यवसाय करीब तीन गुने (तीस लाख) का वार्षिक हो सकता है। इसमें वह राशि भी शामिल है, जो ठेकेदार धार्मिक और सामाजिक संगठनों से भी मनमाने दाम में वसूलता है, पर स्थिति यह है कि एक भी धेला नगर निगम को नहीं मिल रहा है। सूत्रों के अनुसार इस काम में दबंग शामिल है, जबकि कई बार निगम की भूमिका को लेकर भी सवाल उठा है। मेयर डा. जोगेंद्र सिंह रौतेला का कहना है कि दो बार टेंडर निकाला गया, पर दो ही लोगों ने आवेदन किया था। अब नए सिरे से प्रक्रिया की जा रही है। इसके अलावा हम समय-समय पर अवैध होर्डिंग के खिलाफ अभियान चलाते रहते हैं।
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होर्डिंग टांगने को नेताजी का सहारा
शहर में सर्वाधिक होर्डिंग और बैनर नेताओं के टंगे हैं। नेता होर्डिंग और बैनर टांगने के एवज में निगम कर्मियों की मुट्ठी तो गर्म नहीं करते, लेकिन बडे़ नेताओं के नाम और फोटो का सहारा जरूर ले रहे हैं। अधिकांश होर्डिंग और बैनरों में बड़े नेताओं की फोटो और नाम होने से निगम कर्मी उन्हें हटाने से हिचकते हैं। त्योहार, नए साल आदि पर इनकी संख्या बढ़ जाती है।
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