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गौला पुल पर दौड़ने लगे हल्के वाहन
Nainital
Updated Sat, 17 Aug 2013 05:37 AM IST
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हल्द्वानी। करीब 1845 दिन बाद आखिरकार गौला पुल पर वाहन चलने लगे हैं। पंद्रह अगस्त पर पुल को दोपहिया और हल्के चौपहिया वाहनों के लिए खोल दिया गया। इस अवसर पर श्रम मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने कहा कि जल्द ही पुल पर भारी वाहनों का भी आवागमन शुरू हो जाएगा।
जुलाई 2008 में गौला पुल धराशायी हो गया था। इसके बाद एक तरह से नए सिरे से पुल बनाने की योजना बनी। बजट में देरी, पुल को छोटा करने जैसे झंझटों और फार्मूलों के बीच जैसे-तैसे पुल को चलने योग्य बनाया गया। एक अगस्त को पुल को पैदल यात्रियों के खोला गया था। अब पंद्रह दिन बाद मोटर साइकिल और कार के लिए पुल खोला गया, जिससे वाहन स्वामियों ने राहत की सांस ली। काठगोदाम, चोरगलिया, सितारगंज से आने वाले किसानों एवं वाहन स्वामियों को काठगोदाम पुल से आने की बाध्यता और 20 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर खत्म हो गया। अब वह सीधे आ-जा सकेंगे। इसके अलावा हर साल नदी में अस्थायी रास्ता बनाने के लिए वन विभाग लाखों रुपये खर्च करता था, उसकी भी बचत हो सकेगी। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राजेंद्र खनवाल ने कहा कि पुल निर्माण को लेकर संघर्ष किया गया था, वह रंग लाया है। इस दौरान अधिशासी अभियंता एलडी मथेला, एमसी पंत, बलकार सिंह संधू, कैलास पांडे, उमेश कबड़वाल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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जुलाई 2008 में गौला पुल धराशायी हो गया था। इसके बाद एक तरह से नए सिरे से पुल बनाने की योजना बनी। बजट में देरी, पुल को छोटा करने जैसे झंझटों और फार्मूलों के बीच जैसे-तैसे पुल को चलने योग्य बनाया गया। एक अगस्त को पुल को पैदल यात्रियों के खोला गया था। अब पंद्रह दिन बाद मोटर साइकिल और कार के लिए पुल खोला गया, जिससे वाहन स्वामियों ने राहत की सांस ली। काठगोदाम, चोरगलिया, सितारगंज से आने वाले किसानों एवं वाहन स्वामियों को काठगोदाम पुल से आने की बाध्यता और 20 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर खत्म हो गया। अब वह सीधे आ-जा सकेंगे। इसके अलावा हर साल नदी में अस्थायी रास्ता बनाने के लिए वन विभाग लाखों रुपये खर्च करता था, उसकी भी बचत हो सकेगी। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता राजेंद्र खनवाल ने कहा कि पुल निर्माण को लेकर संघर्ष किया गया था, वह रंग लाया है। इस दौरान अधिशासी अभियंता एलडी मथेला, एमसी पंत, बलकार सिंह संधू, कैलास पांडे, उमेश कबड़वाल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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