फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   महिलाओं के बगैर समाज में बदलाव असंभव : बलूनी

महिलाओं के बगैर समाज में बदलाव असंभव : बलूनी

Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
Nainital
Nainital Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
नैनीताल। पुरुष शारीरिक रूप से बलवान हो सकता है लेकिन विवेक, धैर्य, साहस और अपनी कार्य क्षमता में स्त्री का मुकाबला किसी से नहीं किया जा सकता। महिलाओं के बगैर समाज में बदलाव आना संभव नहीं हैं।
विज्ञापन

यह विचार उत्तराखंड महिला आयोग की अध्यक्ष सुशीला बलूनी ने बृहस्पतिवार को कुविवि के सेंटर फार वीमेन स्टडीज के तत्वावधान में नैनीताल क्लब में आयोजित सेमीनार में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए। ‘उत्तराखंड में महिलाओं की भूमिका और उनकी स्थिति’ विषयक दो दिनी सेमीनार में उन्होंने कहा कि आजादी से अब तक महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया है। विशिष्ट अतिथि कुमाऊं विवि कार्य परिषद की सदस्या सुजाता चौहान और ऑल इंडिया वीमेन कांफ्रेंस की राकेश धवन ने पुरुष मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता जताई। हैदराबाद यूनिवर्सिटी की प्रो. रेखा पांडे ने नारी के जीवन पर प्रकाश डाला। सेंटर फॉर वीमेन स्टडीज की कोऑर्डिनेटर एवं कु विवि की प्रो. नीता बोरा शर्मा और सेमीनार की आयोजक सचिव प्रो. राजेश्वरी पंत ने भी सेमीनार को संबोधित किया। वक्ताओं द्वारा उत्तराखंड में महिलाओं की स्थिति, समाज व असमान लिंगानुपात, महिला विभेद, मानवाधिकार समेत महिलाओं के अधिकारों के पर चर्चा की गई। इस दौरान उत्तराखंड में महिलाओं की भूमिका पर पुस्तक का विमोेचन हुआ। सेमीनार में कुमाऊं विवि कुलसचिव डा. एसके नेगी, डीएसबी परिसर निदेशक प्रो. बीआर कौशल, एएससी के निदेशक प्रो. बीएल साह, इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. गिरधर नेगी, समेत प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट बटरोही, डा. बीना पांडे, प्रो. एलएस बिष्ट, पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य गीता बिष्ट आदि उपस्थित थे। संचालन प्रो. राजेश्वरी पंत ने किया।
विज्ञापन

इनसेट
महिला सशक्तीकरण पर महज बयानबाजी हुई
प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष सुशीला बलूनी से बातचीत
नैनीताल। उत्तराखंड महिला आयोग की अध्यक्ष सुशीला बलूनी ने कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तीकरण के नाम पर कोरी बयानबाजी कर सत्तासीन सरकारें अपनी पीठ थपथपाती आई हैं। वास्तविकता यह है कि राज्य निर्माण के 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश की महिला नीति नहीं बन पाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने आई आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि नवोदित उत्तराखंड राज्य महिलाओं और युवाओं की बदौलत बना है लेकिन राज्य के लिए अपनी जान देने वाली महिलाओं की बहने आज अपने को ठगा महसूस कर रहीं हैं और बेरोजगार युवक पलायन को विवश हैं। प्रदेश में महिलाओं और बेरोजगारों की स्थिति आज भी अविभाजित उत्तर प्रदेश सरीखी है।

महिलाओं की खरीद फरोख्त के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह प्रदेश का दुर्भाग्य है कि यहां से हरियाणा और सहारनपुर में महिलाओं बेचा जा रहा है। हरियाणा में पहले भ्रूण हत्या कर शक्ति का नाश किया गया, अब अन्य राज्यों से शक्ति का सौदा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन में उन्होंने 50 दिन भूख हड़ताल की इनमें 1994 के 19 दिन समेत 1995 में की गई भूख हड़ताल शामिल हैं, जिससे उनकी किडनी में दो घाव हैं। आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि पहाड़ की महिलाओं ने अपने श्रम की बदौलत समाज में अपने को स्थापित किया है, इसमें सरकार ने कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के विकास के लिए अंतिम सांस तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed