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मेडिकल कालेज के डॉक्टरों का प्रमोशन अटका
Updated Mon, 09 Jul 2018 01:52 AM IST
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हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के डॉक्टरों के प्रमोशन का मामला अटक गया है। शासन में कई बार डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) की बैठक का समय तय किया जा चुका है, लेकिन बैठक नहीं हो सकी है।
उत्तराखंड फॉरेस्ट हॉस्पिटल ट्रस्ट के वर्ष 2010 में भंग होने के बाद 2017 अक्तूबर में डॉक्टरों के प्रमोशन हुए थे। उस वक्त एसोसिएट से प्रोफेसर के लिए 22 आवेदन गए थे, जिनमें से केवल 10 लोगों का प्रमोशन हुआ। इसी तरह 28 असिस्टेंट प्रोफेसरों के एसोसिएट प्रोफेसर के लिए आवेदन किया था, उसमें 23 लोगों का हुआ। बाकी 17 डॉक्टरों का प्रमोशन वार्षिक चरित्र पंजिका (एसीआर) में कमी के चलते अटक गया था। इसके बाद शासन ने डॉक्टरों की एसीआर संबंधी खामी को दूर कर प्रमोशन का भरोसा दिया था। शासन की अंदरखाने मंशा थी कि प्रमोशन देने के बाद प्रस्तावित अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में जरूरत पड़ने पर संबंधित डॉक्टरों को तैनात भी किया जा सकेगा। ऐसे में शासन ने शुरुआत में कुछ तेजी भी दिखाई थी। संबंधित डॉक्टरों के अभिलेख आदि भी मंगाए गए थे, बाद में मामला ‘सरकारी सिस्टम’ का शिकार हुआ गया। शासन में डीपीसी को लेकर करीब पांच बार समय तय किया जा चुका है, लेकिन हर बार बैठक तकनीकी कारणों से टल रही है।
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उत्तराखंड फॉरेस्ट हॉस्पिटल ट्रस्ट के वर्ष 2010 में भंग होने के बाद 2017 अक्तूबर में डॉक्टरों के प्रमोशन हुए थे। उस वक्त एसोसिएट से प्रोफेसर के लिए 22 आवेदन गए थे, जिनमें से केवल 10 लोगों का प्रमोशन हुआ। इसी तरह 28 असिस्टेंट प्रोफेसरों के एसोसिएट प्रोफेसर के लिए आवेदन किया था, उसमें 23 लोगों का हुआ। बाकी 17 डॉक्टरों का प्रमोशन वार्षिक चरित्र पंजिका (एसीआर) में कमी के चलते अटक गया था। इसके बाद शासन ने डॉक्टरों की एसीआर संबंधी खामी को दूर कर प्रमोशन का भरोसा दिया था। शासन की अंदरखाने मंशा थी कि प्रमोशन देने के बाद प्रस्तावित अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में जरूरत पड़ने पर संबंधित डॉक्टरों को तैनात भी किया जा सकेगा। ऐसे में शासन ने शुरुआत में कुछ तेजी भी दिखाई थी। संबंधित डॉक्टरों के अभिलेख आदि भी मंगाए गए थे, बाद में मामला ‘सरकारी सिस्टम’ का शिकार हुआ गया। शासन में डीपीसी को लेकर करीब पांच बार समय तय किया जा चुका है, लेकिन हर बार बैठक तकनीकी कारणों से टल रही है।
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