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10 जनवरी तक बन जाएगी प्रदेश की अपनी क्रिकेट एसोसिएशन
Updated Fri, 29 Dec 2017 02:01 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
राज्य क्रिकेट को बीसीसीआई की मान्यता नहीं मिलने का 17 वर्षों से चले आ रहे मामले का पटाक्षेप अब नजदीक है। खेल मंत्री अरविंद पांडेय की मानें तो इस मुद्दे पर जरूरी एसोसिएशनों के साथ बातचीत के बाद समस्या के समाधान का फार्मूला निकाल लिया गया है। उन्होंने आगामी 10 जनवरी तक उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के गठन का दावा किया। सूत्रों की माने तो जो एसोसिएशन बैठक में नहीं आई हैं उनके खिलाफ खेल मंत्री ने जांच के आदेश देते हुए तीन दिन में रिपोर्ट मांगी। बताया गया है कि इन दोनों एसोसिएशनों के खिलाफ खेल मंत्री के पास कई शिकायतें पहुंची हैं।
बृहस्पतिवार को खेल मंत्री अरविंद पांडेय की पहल पर सचिवालय सभागार में क्रिकेट एसोसिएशनों के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड और यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी ही पहुंचे। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रामशरण नौटियाल कक्ष में पहुंचे, लेकिन उन्होंने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। बैठक शुरू होने से पहले उन्होंने खेल मंत्री को चिट्ठी सौंपी और सभागार से बाहर निकल गए। करीब 15 मिनट चली बैठक के बाद मंत्री ने पत्रकारों के सामने पूरा ब्योरा रखा। उन्होंने कहा कि क्रिकेट खिलाड़ियों के हित में बैठक आयोजित की गई। नियम-कानूनों को देखते हुए पिछले दस साल के प्रदर्शन के आधार पर सभी क्रिकेट एसोसिएशन की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट की कॉपी बीसीसीआई की क्रिकेट प्रशासक कमेटी और सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी। अगले हफ्ते फिर बैठक होगी। रिपोर्ट के आधार पर एसोसिएशनों में से क्रिकेट के लिए बेहतर काम करने वाले लोगों का चयन किया जाएगा, जिसके बाद अधिकतम 10 जनवरी तक उत्तराखंड की एक क्रिकेट एसोसिएशन गठित कर दी जाएगी। इस मामले में सभी संघ एकमत हैं। किसी ने बैठक का बहिष्कार नहीं किया है, जिनकी आवश्यकता थी, वे बैठक में शामिल हुए और उनके बीच सहमति बन गई है।
सीओए का काम आसान करने की कवायद
हल्द्वानी/देहरादून। खेल मंत्री ने एसोसिएशन एक करने की जो कवायद शुरू की है उसके पीछे उनकी मंशा बीसीसीआई की क्रिकेट प्रशासक समिति का काम आसान करने की है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीओए को जनवरी 2018 के दूसरे हफ्ते में उत्तराखंड की मान्यता का मामला भी हल करके कोर्ट में उपस्थित होना है। ऐसे में कमेटी यहां आए या प्रदेश में कार्यरत पदाधिकारियों को मुंबई बुलाए। इसके बाद ही प्रदेश की क्रिकेट को बोर्ड की मान्यता मिलने की राह आसान होगी।
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दो जनवरी के बात तय होगा उत्तराखंड क्रिकेट का भविष्य
हल्द्वानी। करीब 15 दिन बाद सुप्रीमकोर्ट के समक्ष बीसीसीआई की प्रशासक समिति को मान्यता के मामले के निपटारे के साथ उपस्थित होना है। सूत्रों के हवाले से सीओए अध्यक्ष 29 दिसंबर को अमेरिका से लौट आए हैं, दो जनवरी को वह मुंबई में बीसीसीआई के दफ्तर में बैठेंगे। इसके बाद तय होगा कि उत्तराखंड की मान्यता के लिए कोई कमेटी यहां से भेजी जाएगी या संबंधित एसोसिएशनों को सभी कागजातों के साथ मुंबई बुलाया जाएगा।
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पुलिस फोर्स भी पहुंची
बैठक में मंत्री के पहुंचने से पहले ही एसपी सिटी प्रदीप राय और शहर कोतवाल बीबीडी जुयाल मयफोर्स सचिवालय पहुंच गए। मंत्री ने सचिवालय पहुंचते ही सबसे पहले पुलिस अधिकारियों से अलग बातचीत की। इसको लेकर सचिवालय में चर्चाएं होती रहीं। किसी तरह के विवाद की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बुलाए जाने की जानकारी मिली। हालांकि, बाद में मंत्री ने कहा कि पुलिस क्यों आई, उन्हें इसका पता नहीं है। शायद पुलिस का कोई काम रहा होगा।
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हमने सुप्रीम कोर्ट में इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल की है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले में बीसीसीआई को कमेटी का गठन कर मामले को निस्तारित करने के निर्देश दे चुका है। ऐसे में इस बैठक का कोई औचित्य नहीं रहता। लिहाजा हमने खेल मंत्री को सूचना देने के बाद बैठक का बहिष्कार किया।
-रामशरण नौटियाल, अध्यक्ष, उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन
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बैठक सकारात्मक रही। इसके बेहतर परिणाम जल्द सामने आएंगे। राज्य सरकार ने जो पहल की, उसमें सभी एसोसिएशन को सामने आना चाहिए था। जो लोग बैठक में नहीं आए, वे क्रिकेट का नहीं अपना भला चाहते हैं। मान्यता के मसले का जल्द समाधान निकलेगा।
-रोहित चौहान, मीडिया प्रभारी, यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन
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हम पहले से ही इस मामले में समाधान की मांग कर रहे हैं। बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार राज्य की मान्यता के मसले का जल्द समाधान निकलेगा। जो लोग क्रिकेट की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं, उनको साथ लेकर फैसला लिया जाना चाहिए।
-पीसी वर्मा, सचिव, किक्रेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड
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हमारी एसोसिएशन बैठक में हिस्सा नहीं लेगी, इसकी जानकारी पहले ही मुख्यमंत्री और खेल मंत्री को दे दी गई थी। हमने सुप्रीम कोर्ट में एप्लीकेशन डाला था। सुप्रीम कोर्ट ने इसके आधार पर कमेटी को मामला निस्तारित करने के निर्देश दिए हैं। अब सरकार संघ बनाती रहे, उससे कुछ नहीं हो सकता। सरकार के अधिकार क्षेत्र में खेल संघ बनाना नहीं है। संघ का संविधान होता है, रजिस्ट्रेशन और गठन की प्रक्रिया होती है। वैसे भी जनवरी के दूसरे हफ्ते से पहले समिति के सीओ को निर्णय लेना है। 11 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में कुछ न कुछ सकारात्मक निर्णय जरूर आएगा।
-चंद्रकांत आर्य, सचिव, उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन
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पांचवीं एसोसिएशन की मौजूदगी पर सवाल
बैठक में शामिल होने के लिए खेल विभाग की ओर से चार क्रिकेट एसोसिएशनों को न्योता भेजा गया था। हालांकि, बैठक शुरू होने से पहले ही पांचवीं एसोसिएशन, कंबाइंड क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी भी पहुंच गए। एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल, सचिव मनोज ध्यानी, उपाध्यक्ष अनिल शाह बैठक में शामिल रहे। इसे लेकर कुछ पदाधिकारियों ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि नई एसोसिएशन को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे में कई नई एसोसिएशन भी बीच में आ जाएंगी। हालांकि सीसीए के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि सीसीए पुरानी एसोसिएशन है, जो बीच की कुछ बैठकों में शामिल नहीं रही।
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चिट्ठी चार एसोसिएशनों को ही भेजी गई थी। पहले हमारी एसोसिएशन सभी बैठकों में शामिल रही है। बीच में कुछ कारणों से हम बैठकों में शामिल नहीं हो सके। खेल विभाग के अधिकारियों ने हमें मौखिक रूप से बैठक में शामिल होने का न्योता दिया था। उसके बाद ही हम बैठक में शामिल हुए।
-सुनील अग्रवाल, अध्यक्ष, कंबाइंड क्रिकेट एसोसिएशन
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खेल मंत्री की बैठक पर सवाल
सुप्रीमकोर्ट का हवाला देकर दो एसोसिएशनों ने इसे कोर्ट की अवहेलना बताया
खेल मंत्री ने सीओए की टीम के यहां आने से पहले बुलाई थी समन्वय बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
हल्द्वानी/देहरादून
बीसीसीआई की टीम के उत्तराखंड आने से पहले खेल मंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक पर सवाल उठाते हुए दो एसोसिएशनों ने इससे किनारा कर लिया। इन दोनों एसोसिएशनों का कहना है कि मान्यता का मामला सुप्रीमकोर्ट ने बीसीसीआई की प्रशासक कमेटी के हवाले कर दिया है तो खेल मंत्री की इस बैठक का औचित्य क्या है। हालांकि इनमें से एक एसोसिएशन के अध्यक्ष ने जहां बैठक से पहले खेल सचिव से मुलाकात की वहीं दूसरी एसोसिएशन के सचिव का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के विशेष अधिकारी से मुलाकात करके अपनी वस्तुस्थिति स्पष्ट कर दी है। वहीं अन्य तीन एसोसिएशनों से जुड़े पदाधिकारियों ने बैठक में भाग लिया और खेल मंत्री के प्रयासों की सराहना की।
मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई पिछली बैठक की तरह बृहस्पतिवार को बुलाई गई खेल मंत्री की बैठक में भी क्रिकेट एसोसिएशनों के बीच समन्वय दूर-दूर तक नजर नहीं आया। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन और उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन बैठक में नहीं पहुंचे। बैठक में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड और यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन के अलावा कंबाइंड क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी मौजूद रहे। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के दिव्य नौटियाल का कहना है कि जब पिछली बैठक में हम सब ने मान्यता को लेकर बात करने को कहा तो खेल मंत्री मामला रणजी मैच की ओर ले गए, जब एक होने की बात की गई तो कभी कोई एसोसिएशन कभी दूसरी एसोसिएशन मामला लटकाती रही। सरकार ने उस वक्त सख्ती दिखाई होती तो आज स्थिति कुछ और होती। मामला हल ना होता देख उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट की राह पकड़ी तो 29 नंवबर को कोर्ट ने मामला बीसीसीआई की क्रिकेट प्रशासक कमेटी के हवाले कर दिया। ऐसे में खेल मंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक का क्या मतलब है जब सीओए को ही सब तय करना है। वहीं उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव का कहना है कि खेल मंत्री की बैठक में मान्यता को लेकर कोई फैसला होता है तो यह कोर्ट की अवहेलना होगी। इस बारे में बैठक में मौजूद युनाईटेड क्रिकेट एसोसिएशन के मीडिया कॉर्डिनेटर रोहित चौहान का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहां लिखा है कि राज्य सरकार अपनी ओर से मान्यता की पहल नहीं कर सकती है। अगर समन्वय से कोई एसोसिएशन बन जाती है तो सीओए का काम हल्का होगा और मान्यता मामला लटकने के बजाय जल्दी हल हो जाएगा। पीसी वर्मा ने भी खेल मंत्री के प्रयासों की सराहना की।
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राज्य क्रिकेट को बीसीसीआई की मान्यता नहीं मिलने का 17 वर्षों से चले आ रहे मामले का पटाक्षेप अब नजदीक है। खेल मंत्री अरविंद पांडेय की मानें तो इस मुद्दे पर जरूरी एसोसिएशनों के साथ बातचीत के बाद समस्या के समाधान का फार्मूला निकाल लिया गया है। उन्होंने आगामी 10 जनवरी तक उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के गठन का दावा किया। सूत्रों की माने तो जो एसोसिएशन बैठक में नहीं आई हैं उनके खिलाफ खेल मंत्री ने जांच के आदेश देते हुए तीन दिन में रिपोर्ट मांगी। बताया गया है कि इन दोनों एसोसिएशनों के खिलाफ खेल मंत्री के पास कई शिकायतें पहुंची हैं।
बृहस्पतिवार को खेल मंत्री अरविंद पांडेय की पहल पर सचिवालय सभागार में क्रिकेट एसोसिएशनों के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड और यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी ही पहुंचे। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रामशरण नौटियाल कक्ष में पहुंचे, लेकिन उन्होंने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। बैठक शुरू होने से पहले उन्होंने खेल मंत्री को चिट्ठी सौंपी और सभागार से बाहर निकल गए। करीब 15 मिनट चली बैठक के बाद मंत्री ने पत्रकारों के सामने पूरा ब्योरा रखा। उन्होंने कहा कि क्रिकेट खिलाड़ियों के हित में बैठक आयोजित की गई। नियम-कानूनों को देखते हुए पिछले दस साल के प्रदर्शन के आधार पर सभी क्रिकेट एसोसिएशन की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट की कॉपी बीसीसीआई की क्रिकेट प्रशासक कमेटी और सुप्रीम कोर्ट को भेजी जाएगी। अगले हफ्ते फिर बैठक होगी। रिपोर्ट के आधार पर एसोसिएशनों में से क्रिकेट के लिए बेहतर काम करने वाले लोगों का चयन किया जाएगा, जिसके बाद अधिकतम 10 जनवरी तक उत्तराखंड की एक क्रिकेट एसोसिएशन गठित कर दी जाएगी। इस मामले में सभी संघ एकमत हैं। किसी ने बैठक का बहिष्कार नहीं किया है, जिनकी आवश्यकता थी, वे बैठक में शामिल हुए और उनके बीच सहमति बन गई है।
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हल्द्वानी/देहरादून। खेल मंत्री ने एसोसिएशन एक करने की जो कवायद शुरू की है उसके पीछे उनकी मंशा बीसीसीआई की क्रिकेट प्रशासक समिति का काम आसान करने की है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीओए को जनवरी 2018 के दूसरे हफ्ते में उत्तराखंड की मान्यता का मामला भी हल करके कोर्ट में उपस्थित होना है। ऐसे में कमेटी यहां आए या प्रदेश में कार्यरत पदाधिकारियों को मुंबई बुलाए। इसके बाद ही प्रदेश की क्रिकेट को बोर्ड की मान्यता मिलने की राह आसान होगी।
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हल्द्वानी। करीब 15 दिन बाद सुप्रीमकोर्ट के समक्ष बीसीसीआई की प्रशासक समिति को मान्यता के मामले के निपटारे के साथ उपस्थित होना है। सूत्रों के हवाले से सीओए अध्यक्ष 29 दिसंबर को अमेरिका से लौट आए हैं, दो जनवरी को वह मुंबई में बीसीसीआई के दफ्तर में बैठेंगे। इसके बाद तय होगा कि उत्तराखंड की मान्यता के लिए कोई कमेटी यहां से भेजी जाएगी या संबंधित एसोसिएशनों को सभी कागजातों के साथ मुंबई बुलाया जाएगा।
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पुलिस फोर्स भी पहुंची
बैठक में मंत्री के पहुंचने से पहले ही एसपी सिटी प्रदीप राय और शहर कोतवाल बीबीडी जुयाल मयफोर्स सचिवालय पहुंच गए। मंत्री ने सचिवालय पहुंचते ही सबसे पहले पुलिस अधिकारियों से अलग बातचीत की। इसको लेकर सचिवालय में चर्चाएं होती रहीं। किसी तरह के विवाद की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बुलाए जाने की जानकारी मिली। हालांकि, बाद में मंत्री ने कहा कि पुलिस क्यों आई, उन्हें इसका पता नहीं है। शायद पुलिस का कोई काम रहा होगा।
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हमने सुप्रीम कोर्ट में इंटरवेंशन एप्लीकेशन दाखिल की है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले में बीसीसीआई को कमेटी का गठन कर मामले को निस्तारित करने के निर्देश दे चुका है। ऐसे में इस बैठक का कोई औचित्य नहीं रहता। लिहाजा हमने खेल मंत्री को सूचना देने के बाद बैठक का बहिष्कार किया।
-रामशरण नौटियाल, अध्यक्ष, उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन
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बैठक सकारात्मक रही। इसके बेहतर परिणाम जल्द सामने आएंगे। राज्य सरकार ने जो पहल की, उसमें सभी एसोसिएशन को सामने आना चाहिए था। जो लोग बैठक में नहीं आए, वे क्रिकेट का नहीं अपना भला चाहते हैं। मान्यता के मसले का जल्द समाधान निकलेगा।
-रोहित चौहान, मीडिया प्रभारी, यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन
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हम पहले से ही इस मामले में समाधान की मांग कर रहे हैं। बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार राज्य की मान्यता के मसले का जल्द समाधान निकलेगा। जो लोग क्रिकेट की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं, उनको साथ लेकर फैसला लिया जाना चाहिए।
-पीसी वर्मा, सचिव, किक्रेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड
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हमारी एसोसिएशन बैठक में हिस्सा नहीं लेगी, इसकी जानकारी पहले ही मुख्यमंत्री और खेल मंत्री को दे दी गई थी। हमने सुप्रीम कोर्ट में एप्लीकेशन डाला था। सुप्रीम कोर्ट ने इसके आधार पर कमेटी को मामला निस्तारित करने के निर्देश दिए हैं। अब सरकार संघ बनाती रहे, उससे कुछ नहीं हो सकता। सरकार के अधिकार क्षेत्र में खेल संघ बनाना नहीं है। संघ का संविधान होता है, रजिस्ट्रेशन और गठन की प्रक्रिया होती है। वैसे भी जनवरी के दूसरे हफ्ते से पहले समिति के सीओ को निर्णय लेना है। 11 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में कुछ न कुछ सकारात्मक निर्णय जरूर आएगा।
-चंद्रकांत आर्य, सचिव, उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन
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पांचवीं एसोसिएशन की मौजूदगी पर सवाल
बैठक में शामिल होने के लिए खेल विभाग की ओर से चार क्रिकेट एसोसिएशनों को न्योता भेजा गया था। हालांकि, बैठक शुरू होने से पहले ही पांचवीं एसोसिएशन, कंबाइंड क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी भी पहुंच गए। एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल, सचिव मनोज ध्यानी, उपाध्यक्ष अनिल शाह बैठक में शामिल रहे। इसे लेकर कुछ पदाधिकारियों ने विरोध जताया। उन्होंने कहा कि नई एसोसिएशन को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे में कई नई एसोसिएशन भी बीच में आ जाएंगी। हालांकि सीसीए के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि सीसीए पुरानी एसोसिएशन है, जो बीच की कुछ बैठकों में शामिल नहीं रही।
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चिट्ठी चार एसोसिएशनों को ही भेजी गई थी। पहले हमारी एसोसिएशन सभी बैठकों में शामिल रही है। बीच में कुछ कारणों से हम बैठकों में शामिल नहीं हो सके। खेल विभाग के अधिकारियों ने हमें मौखिक रूप से बैठक में शामिल होने का न्योता दिया था। उसके बाद ही हम बैठक में शामिल हुए।
-सुनील अग्रवाल, अध्यक्ष, कंबाइंड क्रिकेट एसोसिएशन
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खेल मंत्री की बैठक पर सवाल
सुप्रीमकोर्ट का हवाला देकर दो एसोसिएशनों ने इसे कोर्ट की अवहेलना बताया
खेल मंत्री ने सीओए की टीम के यहां आने से पहले बुलाई थी समन्वय बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
हल्द्वानी/देहरादून
बीसीसीआई की टीम के उत्तराखंड आने से पहले खेल मंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक पर सवाल उठाते हुए दो एसोसिएशनों ने इससे किनारा कर लिया। इन दोनों एसोसिएशनों का कहना है कि मान्यता का मामला सुप्रीमकोर्ट ने बीसीसीआई की प्रशासक कमेटी के हवाले कर दिया है तो खेल मंत्री की इस बैठक का औचित्य क्या है। हालांकि इनमें से एक एसोसिएशन के अध्यक्ष ने जहां बैठक से पहले खेल सचिव से मुलाकात की वहीं दूसरी एसोसिएशन के सचिव का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के विशेष अधिकारी से मुलाकात करके अपनी वस्तुस्थिति स्पष्ट कर दी है। वहीं अन्य तीन एसोसिएशनों से जुड़े पदाधिकारियों ने बैठक में भाग लिया और खेल मंत्री के प्रयासों की सराहना की।
मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई पिछली बैठक की तरह बृहस्पतिवार को बुलाई गई खेल मंत्री की बैठक में भी क्रिकेट एसोसिएशनों के बीच समन्वय दूर-दूर तक नजर नहीं आया। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन और उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन बैठक में नहीं पहुंचे। बैठक में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड और यूनाइटेड क्रिकेट एसोसिएशन के अलावा कंबाइंड क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारी मौजूद रहे। उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के दिव्य नौटियाल का कहना है कि जब पिछली बैठक में हम सब ने मान्यता को लेकर बात करने को कहा तो खेल मंत्री मामला रणजी मैच की ओर ले गए, जब एक होने की बात की गई तो कभी कोई एसोसिएशन कभी दूसरी एसोसिएशन मामला लटकाती रही। सरकार ने उस वक्त सख्ती दिखाई होती तो आज स्थिति कुछ और होती। मामला हल ना होता देख उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट की राह पकड़ी तो 29 नंवबर को कोर्ट ने मामला बीसीसीआई की क्रिकेट प्रशासक कमेटी के हवाले कर दिया। ऐसे में खेल मंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक का क्या मतलब है जब सीओए को ही सब तय करना है। वहीं उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव का कहना है कि खेल मंत्री की बैठक में मान्यता को लेकर कोई फैसला होता है तो यह कोर्ट की अवहेलना होगी। इस बारे में बैठक में मौजूद युनाईटेड क्रिकेट एसोसिएशन के मीडिया कॉर्डिनेटर रोहित चौहान का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहां लिखा है कि राज्य सरकार अपनी ओर से मान्यता की पहल नहीं कर सकती है। अगर समन्वय से कोई एसोसिएशन बन जाती है तो सीओए का काम हल्का होगा और मान्यता मामला लटकने के बजाय जल्दी हल हो जाएगा। पीसी वर्मा ने भी खेल मंत्री के प्रयासों की सराहना की।