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गौला में खनन गेटों पर इलेक्ट्रॉनिक धर्मकांटा लगाने पर लगी रोक हटी
Updated Sat, 18 Nov 2017 12:50 AM IST
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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने गौला में खनन गेटों पर इलेक्ट्रानिक धर्मकांटा लगाने पर लगाई गई रोक को हटा दिया है। इस मामले में न्यायालय ने कंपनियों की ओर से दायर याचिका भी खारिज कर दी है।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। वन विकास निगम ने 20 अगस्त को इलेक्ट्रॉनिक धर्मकांटा की आपूर्ति, स्थापना व संचालन आदि कार्यों के लिए निविदाएं आमंत्रित की थी। इसमें हल्द्वानी लालकुआं धर्मकांटा वेलफेयर सोसाइटी, भैय्या जी कंपनी, उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संगठन, जेपी स्टोन क्रशर, एलएससी इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य 11 कंपनियों की ओर से निविदाएं भरी गई थी। याचिका में कहा गया था कि 18 सितंबर को निविदाएं खोली गईं। इसमें हल्द्वानी लालकुआं धर्मकांटा वेलफेयर सोसाइटी सहित तीन अन्य की निविदा सही पाई गई। उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संगठन ने याचिका दायर कर अपने धर्मकांटे लगाने जाने की अनुमति मांगी थी। भैय्या जी कंपनी ने निगम द्वारा तकनीकी बिड को बांट माप विभाग की सत्यापित प्रति निविदा के साथ संलग्न न करने पर निविदा निरस्त करने के आदेश को चुनौती दी थी। पीठ ने तीनों याचिकाओं को आधारहीन पाते हुए खारिज कर दिया। इस आदेश के बाद वन निगम में इलेक्ट्रानिक धर्मकांटे की वित्तीय निविदा खुलने का रास्ता साफ हो गया है।
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शुक्रवार को न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। वन विकास निगम ने 20 अगस्त को इलेक्ट्रॉनिक धर्मकांटा की आपूर्ति, स्थापना व संचालन आदि कार्यों के लिए निविदाएं आमंत्रित की थी। इसमें हल्द्वानी लालकुआं धर्मकांटा वेलफेयर सोसाइटी, भैय्या जी कंपनी, उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संगठन, जेपी स्टोन क्रशर, एलएससी इंफ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य 11 कंपनियों की ओर से निविदाएं भरी गई थी। याचिका में कहा गया था कि 18 सितंबर को निविदाएं खोली गईं। इसमें हल्द्वानी लालकुआं धर्मकांटा वेलफेयर सोसाइटी सहित तीन अन्य की निविदा सही पाई गई। उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संगठन ने याचिका दायर कर अपने धर्मकांटे लगाने जाने की अनुमति मांगी थी। भैय्या जी कंपनी ने निगम द्वारा तकनीकी बिड को बांट माप विभाग की सत्यापित प्रति निविदा के साथ संलग्न न करने पर निविदा निरस्त करने के आदेश को चुनौती दी थी। पीठ ने तीनों याचिकाओं को आधारहीन पाते हुए खारिज कर दिया। इस आदेश के बाद वन निगम में इलेक्ट्रानिक धर्मकांटे की वित्तीय निविदा खुलने का रास्ता साफ हो गया है।
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