{"_id":"5a0a06f74f1c1bc1678bb558","slug":"91510606583-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कालाढूंगी सड़क पर जलभराव का मामला फिर पहुंचा उच्च न्यायालय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कालाढूंगी सड़क पर जलभराव का मामला फिर पहुंचा उच्च न्यायालय
Updated Tue, 14 Nov 2017 02:26 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नैनीताल। कालाढूंगी सड़क पर जलभराव का मामला एक बार फिर से उच्च न्यायालय पहुंच गया है। सोमवार को दूसरी बार दायर जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय ने सरकार को इस समस्या का समाधान जल्द से जल्द करने का निर्देश दिया। इससे पूर्व इसी मामले को लेकर न्यायालय ने सरकार को समस्या समाधान का आदेश दिया था और याची को यह छूट दी थी कि समस्या का समाधान न होने पर वह दोबारा जनहित याचिका दायर कर सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने सुनवाई की। हल्द्वानी निवासी हेम चंद्र कपिल ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कालादूंगी सड़क पर कपिलाज रेस्टोरेंट से बाल भारती विद्या मंदिर स्कूल तक बरसात में जलभराव हो जाता है। पूर्व में भी याची ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर की थी। उस समय न्यायालय ने सरकार को समस्या समाधान का आदेश दिया था और याची से कहा था कि समस्या का समाधान नही होता है तो याची फिर से उच्च न्यायालय की शरण ले सकता है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी सरकार की ओर से इस पर कोई कार्यवाही नही की। इस वजह से याची ने दूसरी जनहित याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने न्यायालय को अवगत कराया कि इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है और धनराशि भी अवमुक्त कर दी गयी है। खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिए है कि इस समस्या का निस्तारण जल्द से जल्द करें।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने सुनवाई की। हल्द्वानी निवासी हेम चंद्र कपिल ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कालादूंगी सड़क पर कपिलाज रेस्टोरेंट से बाल भारती विद्या मंदिर स्कूल तक बरसात में जलभराव हो जाता है। पूर्व में भी याची ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर की थी। उस समय न्यायालय ने सरकार को समस्या समाधान का आदेश दिया था और याची से कहा था कि समस्या का समाधान नही होता है तो याची फिर से उच्च न्यायालय की शरण ले सकता है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी सरकार की ओर से इस पर कोई कार्यवाही नही की। इस वजह से याची ने दूसरी जनहित याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने न्यायालय को अवगत कराया कि इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है और धनराशि भी अवमुक्त कर दी गयी है। खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिए है कि इस समस्या का निस्तारण जल्द से जल्द करें।
विज्ञापन