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जीआईसी में कई जगह आई हैं दरारें
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नैनीताल। भूस्खलन प्रभावित बलियानाले से लगे जीआईसी तल्लीताल के भवनों में कई जगह दरारें आई हैं। वहीं जीएसआई की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन द्वारा स्कूल भवन और कार्यालय को विस्थापित करने का नोटिस मिलने से स्कूल प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। स्कूल प्रशासन ने नोटिस के बाबत उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है।
बलियानाले में हो रहे भूस्खलन की जद में आ रहे करीब दो सौ मीटर के क्षेत्र का जीएसआई की ओर से बीते दिनों सर्वे किया गया था। इस दौरान वैज्ञानिकों की टीम ने जीआईसी तल्लीताल के भवनों का भी मुआयना किया था, जिसमें भवनों में आ रही दरारों और कुछ स्थानों पर भूमि धंसने के मामलों को भी परखा था। उधर, जीआईसी के प्रभारी प्रधानाचार्य अमित कुमार सिंह का भी कहना है कि स्कूल में प्रशासनिक भवन और उससे नीचे वाले भवनों में कई जगह दरारें आई हैं, लेकिन सड़क के पास ऊपरी हिस्से पर बने पुस्तकालय एवं अन्य भवनों में ऐसा नहीं है। उनका कहना कि बलियानाले में हो रहे भूस्खलन से संभावित खतरे की बात कहते हुए प्रशासन की ओर से मिले नोटिस से विभागीय उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
जीआईसी में कई जगह आई हैं दरारें
स्कूल प्रशासन ने उच्चाधिकारियों को प्रशासन के नोटिस से अवगत कराया
पहाड़ी की आंतरिक स्थिति परखने के लिए सैंपलिंग कार्य जारी
बलियानाले से लगी पहाड़ी की आंतरिक स्थिति परखने के लिए जापान की जाइका संस्था की ओर से चट्टान के नमूने लेकर ड्रिलिंग का काम किया जा रहा है। जाइका की ओर से नियुक्त की गई कंपनी के कर्मी बलियानाले के मुहाने पर स्थित जीआईसी मैदान, कृष्णापुर जाने वाले क्षतिग्रस्त मार्ग और जीआईसी परिसर में नमूने ले रहे हैं।
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प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह
बलियानाले में भूस्खलन से सर्वाधिक प्रभावित हरिनगर क्षेत्र में स्थित जीआईसी के मैदान में की गई तारबाड़ नाकाफी साबित हो रही है। बच्चे मैदान में खेलते-खेलते खाई के पास तक चले जाते हैं, तो तारबाड़ भी टूटने लगी है। ऐसे में प्रशासन की ओर से यदि सतर्कता नहीं बरती गई तो भविष्य में बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता है।
जीआईसी में रह रहे विस्थापित परिवारों के लिए भी समस्या
पिछले वर्ष बलियानाले में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए वहां से विस्थापित किए गए कुछ परिवारों को जीआईसी में ठहराया गया था। यह परिवार तब से वहीं रह रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से स्कूल भवन और कार्यालय को विस्थापित करने को लेकर जो नोटिस दिया गया है, उसने इन परिवारों के लिए भी चिंता बढ़ दी है।
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बलियानाले में हो रहे भूस्खलन की जद में आ रहे करीब दो सौ मीटर के क्षेत्र का जीएसआई की ओर से बीते दिनों सर्वे किया गया था। इस दौरान वैज्ञानिकों की टीम ने जीआईसी तल्लीताल के भवनों का भी मुआयना किया था, जिसमें भवनों में आ रही दरारों और कुछ स्थानों पर भूमि धंसने के मामलों को भी परखा था। उधर, जीआईसी के प्रभारी प्रधानाचार्य अमित कुमार सिंह का भी कहना है कि स्कूल में प्रशासनिक भवन और उससे नीचे वाले भवनों में कई जगह दरारें आई हैं, लेकिन सड़क के पास ऊपरी हिस्से पर बने पुस्तकालय एवं अन्य भवनों में ऐसा नहीं है। उनका कहना कि बलियानाले में हो रहे भूस्खलन से संभावित खतरे की बात कहते हुए प्रशासन की ओर से मिले नोटिस से विभागीय उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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जीआईसी में कई जगह आई हैं दरारें
स्कूल प्रशासन ने उच्चाधिकारियों को प्रशासन के नोटिस से अवगत कराया
पहाड़ी की आंतरिक स्थिति परखने के लिए सैंपलिंग कार्य जारी
बलियानाले से लगी पहाड़ी की आंतरिक स्थिति परखने के लिए जापान की जाइका संस्था की ओर से चट्टान के नमूने लेकर ड्रिलिंग का काम किया जा रहा है। जाइका की ओर से नियुक्त की गई कंपनी के कर्मी बलियानाले के मुहाने पर स्थित जीआईसी मैदान, कृष्णापुर जाने वाले क्षतिग्रस्त मार्ग और जीआईसी परिसर में नमूने ले रहे हैं।
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प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह
बलियानाले में भूस्खलन से सर्वाधिक प्रभावित हरिनगर क्षेत्र में स्थित जीआईसी के मैदान में की गई तारबाड़ नाकाफी साबित हो रही है। बच्चे मैदान में खेलते-खेलते खाई के पास तक चले जाते हैं, तो तारबाड़ भी टूटने लगी है। ऐसे में प्रशासन की ओर से यदि सतर्कता नहीं बरती गई तो भविष्य में बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता है।
जीआईसी में रह रहे विस्थापित परिवारों के लिए भी समस्या
पिछले वर्ष बलियानाले में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए वहां से विस्थापित किए गए कुछ परिवारों को जीआईसी में ठहराया गया था। यह परिवार तब से वहीं रह रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से स्कूल भवन और कार्यालय को विस्थापित करने को लेकर जो नोटिस दिया गया है, उसने इन परिवारों के लिए भी चिंता बढ़ दी है।