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अब बंदरों की फौज भी होगी कम
Updated Sat, 30 Jun 2018 01:54 AM IST
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हल्द्वानी। खेतीबाड़ी के लिए मुसीबत बने बंदरों की फौज से निपटने की कोशिश शुरू हो गई है। वन विभाग ने रानीबाग के रेस्क्यू सेंटर में बंदरों के बधियाकरण की तैयारी कर ली है। इसका लोकार्पण वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत एक जुलाई को करेंगे।
पहाड़ों में बंदर, जंगली सुअर खेती के लिए मुसीबत बने हुए हैं। फसलों की बर्बादी के चलते किसान खेती छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। बहरहाल, अब वन विभाग ने बंदरों की बढ़ती आबादी पर अंकुश लगाने की कोशिश शुरू की है। इसी के तहत रानीबाग (काठगोदाम) रेस्क्यू में बंदरों के बधियाकरण का सेंटर बनाकर तैयार कर लिया गया है।
वन संरक्षक (दक्षिणी वृत्त) डॉ. तेजस्विनी पाटिल के अनुसार तीन दिन में लेजर विधि के माध्यम से बधियाकरण किया जाएगा। यह तकनीक सबसे सुरक्षित और सबसे कम नुकसान पहुंचाने वाली है। इसी तकनीक से हिमाचल में भी बंदरों का बधियाकरण हो रहा है। वन विभाग का काम केवल बधियाकरण करना होगा। बंदरों को पकड़ने और छोड़ने का काम दूसरी संस्था करेगी। अभी यह काम नैनीताल चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. योगेश भारद्वाज के निर्देशन में होगा जो तीन दिन रानीबाग रेस्क्यू सेंटर में कामकाज देखेंगे। प्रयास किया जा रहा है कि रानीबाग रेस्क्यू सेंटर के लिए पूर्णकालिक पशु चिकित्सक की तैनाती हो जाए।
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अल्मोड़ा में भी सेंटर शुरू करने की योजना
हल्द्वानी। प्रदेश में अभी चिड़ियापुर ट्रांजिट रेस्क्यू सेंटर में बंदरों के बधियाकरण हो रहा है। हालांकि अभी इस सेंटर को सेंट्रल जू अथारिटी से विधिवत संचालन की अनुमति नहीं मिली है। अब कुमाऊं में रानीबाग के अलावा अल्मोड़ा में भी बंदरों के बधियाकरण की सुविधा शुरू करने की तैयारी है।
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पहाड़ों में बंदर, जंगली सुअर खेती के लिए मुसीबत बने हुए हैं। फसलों की बर्बादी के चलते किसान खेती छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। बहरहाल, अब वन विभाग ने बंदरों की बढ़ती आबादी पर अंकुश लगाने की कोशिश शुरू की है। इसी के तहत रानीबाग (काठगोदाम) रेस्क्यू में बंदरों के बधियाकरण का सेंटर बनाकर तैयार कर लिया गया है।
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वन संरक्षक (दक्षिणी वृत्त) डॉ. तेजस्विनी पाटिल के अनुसार तीन दिन में लेजर विधि के माध्यम से बधियाकरण किया जाएगा। यह तकनीक सबसे सुरक्षित और सबसे कम नुकसान पहुंचाने वाली है। इसी तकनीक से हिमाचल में भी बंदरों का बधियाकरण हो रहा है। वन विभाग का काम केवल बधियाकरण करना होगा। बंदरों को पकड़ने और छोड़ने का काम दूसरी संस्था करेगी। अभी यह काम नैनीताल चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. योगेश भारद्वाज के निर्देशन में होगा जो तीन दिन रानीबाग रेस्क्यू सेंटर में कामकाज देखेंगे। प्रयास किया जा रहा है कि रानीबाग रेस्क्यू सेंटर के लिए पूर्णकालिक पशु चिकित्सक की तैनाती हो जाए।
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अल्मोड़ा में भी सेंटर शुरू करने की योजना
हल्द्वानी। प्रदेश में अभी चिड़ियापुर ट्रांजिट रेस्क्यू सेंटर में बंदरों के बधियाकरण हो रहा है। हालांकि अभी इस सेंटर को सेंट्रल जू अथारिटी से विधिवत संचालन की अनुमति नहीं मिली है। अब कुमाऊं में रानीबाग के अलावा अल्मोड़ा में भी बंदरों के बधियाकरण की सुविधा शुरू करने की तैयारी है।