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बेस और महिला अस्पताल में न डाक्टर पूरे न मशीनें
Updated Sat, 24 Mar 2018 02:28 AM IST
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हल्द्वानी। बजट में अस्पतालों की दशा सुधारने के लिए भले ही वित्त मंत्री ने खजाना खोला हो मगर बेस और महिला अस्पताल में न तो मशीनें पूरी है और न ही डॉक्टर। शासन को मशीनों के संबंध में और डॉक्टर की कमी का प्रस्ताव भेजा गया है।
बेस अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन और ओरल पेंटोग्राम मशीन (दांतों के एक्सरे में प्रयोग) नहीं है। जबकि हृदय रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, नेफ्रोलाजिस्ट, पैथालाजिस्ट, न्यूरो सर्जन, दो ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल आफिसर) और तीन जीडीओ (जनरल ड्यूटी मेडिकल आफिसर) के पद खाली पड़े हैं। महिला अस्पताल में एक चिकित्सक का पद खाली पड़ा है। जबकि कलर डापलर अल्ट्रासाउंड मशीन और एनस्थीसिया की बायलस ट्राली मांगी है। सौ बेड का महिला अस्पताल शुरू करने के लिए तो अतिरिक्त स्टाफ और चिकित्सकों की जरूरत है।
बेस और महिला अस्पताल में न डॉक्टर पूरे, न मशीनें
शासन को भेज रखा है मशीनों का प्रस्ताव
सीएचसी और पीएचसी की हालत भी खराब
हल्द्वानी। सीएचसी और पीएचसी को चैरिटेबल संस्थाओं को देने का मन सरकार ने बनाया है। जिले में पांच पीएचसी और आठ सीएचसी हैं। सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है तो पीएचसी सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टरों के सहारे चल रही है। जबकि मैदानी क्षेत्रों की पीएचसी में सेवानिवृत्त डॉक्टरों को संविदा पर रखा गया है।
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बेस अस्पताल में डिजिटल एक्सरे मशीन और ओरल पेंटोग्राम मशीन (दांतों के एक्सरे में प्रयोग) नहीं है। जबकि हृदय रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, नेफ्रोलाजिस्ट, पैथालाजिस्ट, न्यूरो सर्जन, दो ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल आफिसर) और तीन जीडीओ (जनरल ड्यूटी मेडिकल आफिसर) के पद खाली पड़े हैं। महिला अस्पताल में एक चिकित्सक का पद खाली पड़ा है। जबकि कलर डापलर अल्ट्रासाउंड मशीन और एनस्थीसिया की बायलस ट्राली मांगी है। सौ बेड का महिला अस्पताल शुरू करने के लिए तो अतिरिक्त स्टाफ और चिकित्सकों की जरूरत है।
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बेस और महिला अस्पताल में न डॉक्टर पूरे, न मशीनें
शासन को भेज रखा है मशीनों का प्रस्ताव
सीएचसी और पीएचसी की हालत भी खराब
हल्द्वानी। सीएचसी और पीएचसी को चैरिटेबल संस्थाओं को देने का मन सरकार ने बनाया है। जिले में पांच पीएचसी और आठ सीएचसी हैं। सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है तो पीएचसी सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टरों के सहारे चल रही है। जबकि मैदानी क्षेत्रों की पीएचसी में सेवानिवृत्त डॉक्टरों को संविदा पर रखा गया है।
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