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यूनिवर्सिटी सोती रही और एमबीपीजी कालेज में बिना मान्यता के चलते रहे कोर्स
Updated Tue, 22 Aug 2017 02:56 AM IST
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हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय की लापरवाही का आलम इस हद तक हो सकता है, इसका आपको अंदाजा भी नहीं होगा। छात्र संख्या के आधार पर कुमाऊं के सबसे बड़े महाविद्यालय एमबीपीजी कॉलेज में एक नहीं बल्कि सात पाठ्यक्रम बिना मान्यता के चल रहे हैं। हद तो यह है कि कॉलेज प्रशासन चार वर्षों से पैनल कराने के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय को पत्र भेज रहा है मगर विश्वविद्यालय प्रशासन चेता ही नहीं। इस कारण इन पाठ्यक्रमों को शासन से मान्यता नहीं मिल सकी है। अब बिना मान्यता के चल रहे इन पाठ्यक्रमों की वैधता पर ही सवाल उठने लगे हैं।
एमबीपीजी कॉलेज में छात्रों की मांग पर एमए भूगोल, एमए संस्कृत, एमए शिक्षाशास्त्र, एमए संगीत, एमए योग, एमएससी बायोटैक और बीएससी कंप्यूटर साइंस कोर्स शुरू किए गए थे। शासन से सैद्धांतिक सहमति (क्लीयरेंस) आदेश जारी होने पर ये पाठ्यक्रम शुरू तो हो गए लेकिन अब तक मान्यता नहीं मिल सकी। बिना मान्यता के चल रहे इन पाठ्यक्रमों में कुमाऊं विश्वविद्यालय प्रवेश देने के साथ ही परीक्षा भी कराता रहा और डिग्रियां भी देता रहा मगर विश्वविद्यालय ने शासन से स्थायी मान्यता के लिए पैनल निरीक्षण तक कराया। एमबी कॉलेज के अभिलेखों के अनुसार एमए योग पाठ्यक्रम वर्ष 2008-09 में शुरू हुआ था। कुमाऊं विवि ने इसका पैनल वर्ष 2014-15 सत्र में करने के बाद फिर नहीं किया। तीन वर्षों से पैनल निरीक्षण तक नहीं हुआ। यह पाठ्यक्रम बिना मान्यता के ही चल रहा है। इसी तरह एमएससी बायोटैक पाठ्यक्रम वर्ष 2010-11 में शुरू हुआ, उस वक्त विवि द्वारा पैनल निरीक्षण कर मान्यता के लिए शासन को संस्तुति रिपोर्ट भेज दी गई लेकिन आज तक इस कोर्स को शासन से मान्यता नहीं मिल सकी। इतना ही नहीं वर्ष 2014-15 सत्र के बाद तो कुमाऊं विश्वविद्यालय ने इस कोर्स का पैनल निरीक्षण तक नहीं कराया।
वर्ष 2014-15 सत्र में एमए शिक्षाशास्त्र, भूगोल, संस्कृत और बीएससी कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रम शुरू हुआ। कॉलेज प्रशासन ने पैनल निरीक्षण के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को सितंबर 2014 में एमएससी बायोटैक समेत अन्य कोर्सों का पैनल निरीक्षण कराने को पत्र भेजा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने टीम गठित कर पैनल निरीक्षण भी कराया। इसके बाद कॉलेज प्रशासन लगातार विश्वविद्यालय को पत्र भेजता रहा लेकिन विश्वविद्यालय ने पैनल निरीक्षण नहीं कराया। इन कोर्सों को भी शासन से मान्यता नहीं मिली हैं।
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प्राचार्य डा. जगदीश प्रसाद ने बताया कि एमए संगीत (सेल्फ फाइनेंस) पाठ्यक्रम की शासन से स्वीकृति 16 मार्च 2011 में आई थी। इस विषय के पैनल निरीक्षण के लिए कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य की ओर से 12 अगस्त 2011 को पत्र भेजा गया। विश्वविद्यालय ने पैनल निरीक्षण कर अपनी संस्तुति शासन को भेजी मगर शासन से अस्थाई मान्यता नहीं आई। प्राचार्य ने बताया कि वर्ष 2015 में पैनल निरीक्षण के लिए कॉलेज की ओर से विवि को पत्र गया, इसके बाद वर्ष 2016 और फिर जनवरी 2017 में भी पत्र भेजा गया। उन्होंने बताया कि इन सभी पाठ्यक्रमों का वर्ष 2015-16, वर्ष 2016-17 एवं वर्ष 2017-18 सत्र की मान्यता को पैनल निरीक्षण के लिए फिर विश्वविद्यालय को पत्र लिखा गया है।
एमबीपीजी कॉलेज में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों के पैनल निरीक्षण क्यों नहीं हो पाए, इसकी जांच पड़ताल की जा रही है। एमएससी बायोटैक, एमए योग और दूसरे पाठ्यक्रमों के पैनल निरीक्षण समय-समय पर होते रहे हैं तथा अस्थाई संबद्धता के लिए शासन को प्रस्ताव भी भेजे गए, मगर शासन में ये मामले लंबित हैं।
- प्रो. डीसी पांडेय, कुलसचिव कुमाऊं विवि
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एमबीपीजी कॉलेज में छात्रों की मांग पर एमए भूगोल, एमए संस्कृत, एमए शिक्षाशास्त्र, एमए संगीत, एमए योग, एमएससी बायोटैक और बीएससी कंप्यूटर साइंस कोर्स शुरू किए गए थे। शासन से सैद्धांतिक सहमति (क्लीयरेंस) आदेश जारी होने पर ये पाठ्यक्रम शुरू तो हो गए लेकिन अब तक मान्यता नहीं मिल सकी। बिना मान्यता के चल रहे इन पाठ्यक्रमों में कुमाऊं विश्वविद्यालय प्रवेश देने के साथ ही परीक्षा भी कराता रहा और डिग्रियां भी देता रहा मगर विश्वविद्यालय ने शासन से स्थायी मान्यता के लिए पैनल निरीक्षण तक कराया। एमबी कॉलेज के अभिलेखों के अनुसार एमए योग पाठ्यक्रम वर्ष 2008-09 में शुरू हुआ था। कुमाऊं विवि ने इसका पैनल वर्ष 2014-15 सत्र में करने के बाद फिर नहीं किया। तीन वर्षों से पैनल निरीक्षण तक नहीं हुआ। यह पाठ्यक्रम बिना मान्यता के ही चल रहा है। इसी तरह एमएससी बायोटैक पाठ्यक्रम वर्ष 2010-11 में शुरू हुआ, उस वक्त विवि द्वारा पैनल निरीक्षण कर मान्यता के लिए शासन को संस्तुति रिपोर्ट भेज दी गई लेकिन आज तक इस कोर्स को शासन से मान्यता नहीं मिल सकी। इतना ही नहीं वर्ष 2014-15 सत्र के बाद तो कुमाऊं विश्वविद्यालय ने इस कोर्स का पैनल निरीक्षण तक नहीं कराया।
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वर्ष 2014-15 सत्र में एमए शिक्षाशास्त्र, भूगोल, संस्कृत और बीएससी कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रम शुरू हुआ। कॉलेज प्रशासन ने पैनल निरीक्षण के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को सितंबर 2014 में एमएससी बायोटैक समेत अन्य कोर्सों का पैनल निरीक्षण कराने को पत्र भेजा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने टीम गठित कर पैनल निरीक्षण भी कराया। इसके बाद कॉलेज प्रशासन लगातार विश्वविद्यालय को पत्र भेजता रहा लेकिन विश्वविद्यालय ने पैनल निरीक्षण नहीं कराया। इन कोर्सों को भी शासन से मान्यता नहीं मिली हैं।
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प्राचार्य डा. जगदीश प्रसाद ने बताया कि एमए संगीत (सेल्फ फाइनेंस) पाठ्यक्रम की शासन से स्वीकृति 16 मार्च 2011 में आई थी। इस विषय के पैनल निरीक्षण के लिए कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य की ओर से 12 अगस्त 2011 को पत्र भेजा गया। विश्वविद्यालय ने पैनल निरीक्षण कर अपनी संस्तुति शासन को भेजी मगर शासन से अस्थाई मान्यता नहीं आई। प्राचार्य ने बताया कि वर्ष 2015 में पैनल निरीक्षण के लिए कॉलेज की ओर से विवि को पत्र गया, इसके बाद वर्ष 2016 और फिर जनवरी 2017 में भी पत्र भेजा गया। उन्होंने बताया कि इन सभी पाठ्यक्रमों का वर्ष 2015-16, वर्ष 2016-17 एवं वर्ष 2017-18 सत्र की मान्यता को पैनल निरीक्षण के लिए फिर विश्वविद्यालय को पत्र लिखा गया है।
एमबीपीजी कॉलेज में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों के पैनल निरीक्षण क्यों नहीं हो पाए, इसकी जांच पड़ताल की जा रही है। एमएससी बायोटैक, एमए योग और दूसरे पाठ्यक्रमों के पैनल निरीक्षण समय-समय पर होते रहे हैं तथा अस्थाई संबद्धता के लिए शासन को प्रस्ताव भी भेजे गए, मगर शासन में ये मामले लंबित हैं।
- प्रो. डीसी पांडेय, कुलसचिव कुमाऊं विवि