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73 सालों से द्वितीय विश्वयुद्ध के शहीद की मौत को सामान्य मान रही सरकार
अरविंद उपाध्याय
Updated Thu, 02 Mar 2017 01:45 AM IST
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द्वितीय विश्वयुद्ध में शहीद हुए पिथौरागढ़ के राम सिंह की मौत को केंद्र सरकार 73 सालों से सामान्य मानकर विधवा मनुली देवी को मामूली पेंशन दे रही है। जब वीरांगना का भतीजा कागजात लेकर जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी के पास पहुंचा तो गड़बड़ी प्रकाश में आई।
जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के अनुसार पिथौरागढ़ जिले के वनकोट गणाईगंगोली निवासी राम सिंह 11 जनवरी 1936 में आजादी से पहले हैदराबाद रेंजीमेंट में भर्ती हुए थे।
उस समय कुमाऊं रेंजीमेंट नहीं था। द्वितीय विश्वयुद्ध छिड़ने पर राम सिंह युद्ध करते हुए 24 जुलाई 1944 में शहीद हो गए। उस समय राम सिंह की पत्नी मनुली देवी की उम्र 16 साल की थी। शादी के करीब दो साल बाद मनुली देवी के पति की मौत हो गई। मनुली की कोई संतान नहीं है। उन्हें अब तक सामान्य पेंशन लगभग 17 हजार रुपए मिल रही है।
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अमर उजाला में एक पूर्व सैनिक के पेंशन की खबर प्रकाशित होने के बाद मनुली देवी के भतीजे दरपान सिंह जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी मेजर बीएस रौतेला के पास कागजात के साथ पहुंचे। मेजर (रि.) ने कागजातों को देखा तो पाया कि राम सिंह द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए थे लेकिन उनकी विधवा को सामान्य पेंशन मिल रही है।
पूछने पर भतीजे ने बताया कि पहले पाकिस्तान के लाहौर से पेंशन बनती थी। आजादी के पास पेंशन अल्मोड़ा की ट्रेजरी से मिलती थी। कुछ साल बाद चंपावत से पेंशन मिली। अब बागेश्वर से पेंशन मिल रही है। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ने बताया कि शहीद की पत्नी को उदारीकृत पारिवारिक पेंशन मिलनी चाहिए।
चूंकि मनुली देवी वर्तमान समय में 95 साल की हैं। इस कारण पेंशन की रकम वर्तमान समय से कई गुना अधिक होनी चाहिए। जिला सैनिक एवं कल्याण अधिकारी ने बताया कि गड़बड़ी सामने आने के बाद आरबीओ हल्द्वानी को पत्र भेजा गया है। शीघ्र ही न्याय मिलेगा।
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जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के अनुसार पिथौरागढ़ जिले के वनकोट गणाईगंगोली निवासी राम सिंह 11 जनवरी 1936 में आजादी से पहले हैदराबाद रेंजीमेंट में भर्ती हुए थे।
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उस समय कुमाऊं रेंजीमेंट नहीं था। द्वितीय विश्वयुद्ध छिड़ने पर राम सिंह युद्ध करते हुए 24 जुलाई 1944 में शहीद हो गए। उस समय राम सिंह की पत्नी मनुली देवी की उम्र 16 साल की थी। शादी के करीब दो साल बाद मनुली देवी के पति की मौत हो गई। मनुली की कोई संतान नहीं है। उन्हें अब तक सामान्य पेंशन लगभग 17 हजार रुपए मिल रही है।
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अमर उजाला में एक पूर्व सैनिक के पेंशन की खबर प्रकाशित होने के बाद मनुली देवी के भतीजे दरपान सिंह जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी मेजर बीएस रौतेला के पास कागजात के साथ पहुंचे। मेजर (रि.) ने कागजातों को देखा तो पाया कि राम सिंह द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए थे लेकिन उनकी विधवा को सामान्य पेंशन मिल रही है।
पूछने पर भतीजे ने बताया कि पहले पाकिस्तान के लाहौर से पेंशन बनती थी। आजादी के पास पेंशन अल्मोड़ा की ट्रेजरी से मिलती थी। कुछ साल बाद चंपावत से पेंशन मिली। अब बागेश्वर से पेंशन मिल रही है। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ने बताया कि शहीद की पत्नी को उदारीकृत पारिवारिक पेंशन मिलनी चाहिए।
चूंकि मनुली देवी वर्तमान समय में 95 साल की हैं। इस कारण पेंशन की रकम वर्तमान समय से कई गुना अधिक होनी चाहिए। जिला सैनिक एवं कल्याण अधिकारी ने बताया कि गड़बड़ी सामने आने के बाद आरबीओ हल्द्वानी को पत्र भेजा गया है। शीघ्र ही न्याय मिलेगा।