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मेजर की हत्या के बाद पिता पेंशन मांगते मांगते मर गए
Updated Tue, 19 Dec 2017 02:17 AM IST
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हल्द्वानी। सरकारी तंत्र के काम करने के तौर तरीके भी गजब के हैं। एक पिता अपने मेजर बेटे की हत्या के बाद पेंशन के लिए सालों भटकते रहे। पेंशन मांगते-मांगते वह दुनिया से चल बसे। मां और भाई ने प्रयास किए तो 24 साल बाद पेंशन देने के आदेश हुए हैं।
अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट टोडरा निवासी गौरी दत्त भट्ट के बेटे भुवन चंद्र भट्ट ने गोरखपुर से एमबीबीएस किया था। इसके बाद वह सेना के चिकित्सा कोर में सिकंदराबाद, पुणे अस्पताल में तैनात हो गए। 17 अगस्त 1993 को वह पुणे जाने के लिए द्वाराहाट से हल्द्वानी आए। उन्हें 18 अगस्त को ट्रेन पकड़नी थी। यहां से वे नैनीताल घूमने के लिए चले गए थे लेकिन वापस नहीं आए। इससे माता-पिता और परिजन परेशान हो गए। सेना की तरफ से भी खोजबीन शुरू हुई। 16 दिन बाद उनका शव हनुमानगढ़ी में मिला। छोटे भाई युगल किशोर भट्ट ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कराने पर पुलिस ने खोजबीन नहीं की। सेना की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी से पता चला कि उनके भाई की हत्या की गई थी। हत्या किसने और क्यों की, इसका अब तक खुलासा नहीं हो सका है।
पिता की दौड़भाग काम नहीं आई
मेजर के पिता गौरी दत्त भट्ट के पांच बेटे और चार बेटियां थीं। सबसे बड़े मेजर भुवन चंद्र भट्ट थे। उनकी शादी नहीं हुई थी। बड़े बेटे की हत्या के बाद पिता के पास आजीविका का कोई ठोस सहारा नहीं था। खेतीबाड़ी से गुजारा नहीं हो रहा था। इसी कारण उन्होंने पेंशन के लिए कई बार प्रार्थना पत्र दिए लेकिन पेंशन मंजूर नहीं हुई। उन्होंने कई जगह दौड़ भाग की मगर सफलता नहीं मिली। 1998 में पिता की भी मौत हो गई। कुछ साल बाद मेजर के दो भाइयों की भी मौत हो गई। अब छोटे भाई युगल किशोर और गिरीश दत्त भट्ट ही मां का सहारा हैं। मां तारा देवी अपने छोटे बेटे युगल किशोर भट्ट के साथ लालडांठ हल्द्वानी में रहती हैं। मई में युगल किशोर की मुलाकात कर्नल डीडी पाठक से हुई। युगल ने भाई की हत्या के बाद पेंशन नहीं मिलने की बात उन्हें बताई तो उन्होंने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी से संपर्क करने की सलाह दी।
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ऐसे हुआ पेंशन का आदेश
युगल किशोर भट्ट ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला से मुलाकात की। उन्होंने कागजात देने के बाद विभागीय लिखापढ़ी की। दो दिन पहले विभाग ने मेजर की मां को पारिवारिक पेंशन और एरियर देने के निर्देश दिए। बुजुर्ग मां ने कहा कि खोए बेटे को कोई लौटा नहीं सकता लेकिन अब परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक हो जाएगी।
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अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट टोडरा निवासी गौरी दत्त भट्ट के बेटे भुवन चंद्र भट्ट ने गोरखपुर से एमबीबीएस किया था। इसके बाद वह सेना के चिकित्सा कोर में सिकंदराबाद, पुणे अस्पताल में तैनात हो गए। 17 अगस्त 1993 को वह पुणे जाने के लिए द्वाराहाट से हल्द्वानी आए। उन्हें 18 अगस्त को ट्रेन पकड़नी थी। यहां से वे नैनीताल घूमने के लिए चले गए थे लेकिन वापस नहीं आए। इससे माता-पिता और परिजन परेशान हो गए। सेना की तरफ से भी खोजबीन शुरू हुई। 16 दिन बाद उनका शव हनुमानगढ़ी में मिला। छोटे भाई युगल किशोर भट्ट ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कराने पर पुलिस ने खोजबीन नहीं की। सेना की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी से पता चला कि उनके भाई की हत्या की गई थी। हत्या किसने और क्यों की, इसका अब तक खुलासा नहीं हो सका है।
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पिता की दौड़भाग काम नहीं आई
मेजर के पिता गौरी दत्त भट्ट के पांच बेटे और चार बेटियां थीं। सबसे बड़े मेजर भुवन चंद्र भट्ट थे। उनकी शादी नहीं हुई थी। बड़े बेटे की हत्या के बाद पिता के पास आजीविका का कोई ठोस सहारा नहीं था। खेतीबाड़ी से गुजारा नहीं हो रहा था। इसी कारण उन्होंने पेंशन के लिए कई बार प्रार्थना पत्र दिए लेकिन पेंशन मंजूर नहीं हुई। उन्होंने कई जगह दौड़ भाग की मगर सफलता नहीं मिली। 1998 में पिता की भी मौत हो गई। कुछ साल बाद मेजर के दो भाइयों की भी मौत हो गई। अब छोटे भाई युगल किशोर और गिरीश दत्त भट्ट ही मां का सहारा हैं। मां तारा देवी अपने छोटे बेटे युगल किशोर भट्ट के साथ लालडांठ हल्द्वानी में रहती हैं। मई में युगल किशोर की मुलाकात कर्नल डीडी पाठक से हुई। युगल ने भाई की हत्या के बाद पेंशन नहीं मिलने की बात उन्हें बताई तो उन्होंने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी से संपर्क करने की सलाह दी।
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ऐसे हुआ पेंशन का आदेश
युगल किशोर भट्ट ने जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला से मुलाकात की। उन्होंने कागजात देने के बाद विभागीय लिखापढ़ी की। दो दिन पहले विभाग ने मेजर की मां को पारिवारिक पेंशन और एरियर देने के निर्देश दिए। बुजुर्ग मां ने कहा कि खोए बेटे को कोई लौटा नहीं सकता लेकिन अब परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक हो जाएगी।