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अब तक 15,730 यात्रियों ने की कैलाश यात्रा
Updated Wed, 13 Sep 2017 10:52 PM IST
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। भारत और चीन के बीच संबंध सामान्य होने के बाद 1981 में फिर से शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा में अब तक 15,730 यात्री लिपुलेख दर्रे के रास्ते यात्रा कर चुके हैं। यात्रा संचालन में मदद करने वाली भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने इस वर्ष की यात्रा संपन्न होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट जारी कर दी है। आईटीबीपी के नियंत्रण कक्ष के अनुसार वर्ष 2017 में 911 यात्रियों को कैलाश मानसरोवर के दर्शन का लाभ मिला। सौभाग्य से इस बार यात्रा सकुशल संपन्न हो गई। अब अगले वर्ष जून में यात्रा शुरू होगी।
1981 में सिर्फ तीन दल यात्रा पर गए और 59 यात्रियों ने ही यात्री की। 1982 में 86 यात्रियों ने, 1983 में 151 यात्रियों ने, 1984 में 143 यात्रियों ने, 1985 में 168 यात्रियों ने, 1986 में 171 यात्रियों ने, 1987 में 192 यात्रियों ने, 1988 में 204 यात्रियों ने, 1989 में 132 यात्रियों ने, 1990 में 232 यात्रियों ने, 1991 में 227 यात्रियों ने, 1992 में 225 यात्रियों ने, 1993 में 365 यात्रियों ने, 1994 में 348 यात्रियों ने, 1995 में 339 यात्रियों ने, 1996 में 435 यात्रियों ने, 1997 में 516 यात्रियों ने, 1998 में 597 यात्रियों ने यात्रा की। 1998 में मालपा हादसे में 12वें दल के 60 यात्री मारे गए थे। 1999 में 459 यात्रियों ने यात्रा की।
वर्ष 2000 में यात्री दलों की संख्या 16 हो गई। उससे पहले तक 14 या उससे कम दल ही यात्रा पर गए। वर्ष 2000 में 492 यात्रियों ने, 2001 में 464 यात्रियों ने, 2002 में 469 यात्रियों ने, 2003 में 316 यात्रियों ने, 2004 में 537 यात्रियों ने, 2005 में 529 यात्रियों ने, 2006 में 590 यात्रियों ने, 2007 में 674 यात्रियों ने, 2008 में 396 यात्रियों ने, 2009 में 599 यात्रियों ने, 2010 में 739 यात्रियों ने, 2011 में 732 यात्रियों ने, 2012 में 769 यात्रियों ने यात्रा की। 2013 में आपदा के कारण सिर्फ एक ही दल यात्रा पर जा पाया और 51 यात्रियों को ही कैलाश दर्शन का सौभाग्य मिला, लेकिन 2014 में यात्री दलों की संख्या 18 कर दी गई। 2014 में 887 यात्रियों ने, 2015 में 723 यात्रियों ने, 2016 में 704 यात्रियों ने और 2017 में 911 यात्रियों ने सकुशल यात्रा की।
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1981 में सिर्फ तीन दल यात्रा पर गए और 59 यात्रियों ने ही यात्री की। 1982 में 86 यात्रियों ने, 1983 में 151 यात्रियों ने, 1984 में 143 यात्रियों ने, 1985 में 168 यात्रियों ने, 1986 में 171 यात्रियों ने, 1987 में 192 यात्रियों ने, 1988 में 204 यात्रियों ने, 1989 में 132 यात्रियों ने, 1990 में 232 यात्रियों ने, 1991 में 227 यात्रियों ने, 1992 में 225 यात्रियों ने, 1993 में 365 यात्रियों ने, 1994 में 348 यात्रियों ने, 1995 में 339 यात्रियों ने, 1996 में 435 यात्रियों ने, 1997 में 516 यात्रियों ने, 1998 में 597 यात्रियों ने यात्रा की। 1998 में मालपा हादसे में 12वें दल के 60 यात्री मारे गए थे। 1999 में 459 यात्रियों ने यात्रा की।
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वर्ष 2000 में यात्री दलों की संख्या 16 हो गई। उससे पहले तक 14 या उससे कम दल ही यात्रा पर गए। वर्ष 2000 में 492 यात्रियों ने, 2001 में 464 यात्रियों ने, 2002 में 469 यात्रियों ने, 2003 में 316 यात्रियों ने, 2004 में 537 यात्रियों ने, 2005 में 529 यात्रियों ने, 2006 में 590 यात्रियों ने, 2007 में 674 यात्रियों ने, 2008 में 396 यात्रियों ने, 2009 में 599 यात्रियों ने, 2010 में 739 यात्रियों ने, 2011 में 732 यात्रियों ने, 2012 में 769 यात्रियों ने यात्रा की। 2013 में आपदा के कारण सिर्फ एक ही दल यात्रा पर जा पाया और 51 यात्रियों को ही कैलाश दर्शन का सौभाग्य मिला, लेकिन 2014 में यात्री दलों की संख्या 18 कर दी गई। 2014 में 887 यात्रियों ने, 2015 में 723 यात्रियों ने, 2016 में 704 यात्रियों ने और 2017 में 911 यात्रियों ने सकुशल यात्रा की।
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