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कुमाऊं विवि की पिछले एक माह से लटकी थी प्रवेश प्रक्रिया
Updated Sat, 05 Aug 2017 01:56 AM IST
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हल्द्वानी। स्नातक और परास्नातक प्रथम सेमेस्टर में स्थानीय विद्यार्थियों को वरीयता को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण कुमाऊं विश्वविद्यालय का सत्र प्रभावित हो सकता है। प्रवेश प्रक्रिया एक माह से लटकी हुई थी। विश्वविद्यालय की खुमारी का ही नतीजा है कि अब प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी तो महाविद्यालयों को परीक्षाओं और छात्र संघ चुनावों से भी गुजरना होगा।
कुमाऊं विश्वविद्यालय में स्नातक और परास्नातक प्रथम सेमेस्टर में स्थानीय विद्यार्थियों को (अधिमान अंक) वरीयता दिए जाने के शासनादेश को लेकर उच्च न्यायालय में गढ़वाल मंडल के एक व्यक्ति ने याचिका दाखिल की थी। इस पर न्यायालय ने स्थानीय विद्यार्थियों को अधिमान अंक देने की व्यवस्था को समाप्त किया था। उस वक्त न तो कुमाऊं विश्वविद्यालय और न ही उच्चशिक्षा विभाग ने इस आदेश पर गौर किया। विश्वविद्यालय को ता होश तब आया कि जब न्यायालय के आदेश पर अनुपालन करते हुए शासन ने अधिमान अंक देने संबंधी अपने आदेश को निरस्त किया। इसकी जानकारी 15 जून को कुमाऊं विश्वविद्यालय को भेजी गई। विश्वविद्यालय ने इस बार स्नातक प्रथम सेमेस्टर में ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की थी। आनलाइन प्रवेश के लिए आवेदन 10 जुलाई तक होने थे। इसके बाद 11 जुलाई से प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश थे। इसके बाद विश्वविद्यालय को चिंता हुई कि अधिमान अंक का मामला सुलझाए बिना प्रवेश कैसे होंगे। ऐसे में आनलाइन प्रवेश आवेदन प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई और सरकार पर उच्चतम न्यायालय में उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के लिए दबाव बनाया गया। सरकार अब उच्चतम न्यायालय गई भी है पर फिलहाल मामला लंबित है। नतीजा यह रहा 24 जुलाई को कुमाऊं विश्वविद्यालय को प्रवेश प्रक्रिया अपने अगले आदेश तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। उधर, कुमाऊं विश्वविद्यालय में प्रवेश में अधिमान अंक दिए जाने का मामला लटकने की वजह से महाविद्यालयों में भी एक माह से प्रवेश प्रक्रिया लटकी रही। प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुए बिना ही अगस्त माह के भी चार दिन निकल गए। ऐसे में विश्वविद्यालय और संबंधित महाविद्यालयों में शिक्षा सत्र प्रभावित होने के आसार हैं। अब छात्र संघ के चुनाव हैं, पहले और तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं भी सर पर हैं। कब तो प्रवेश होंगे और कब बाकी सब काम।
कुमाऊं विवि की खुमारी टूटी पर कई चुनौतियां अभी सामने
प्रवेश के साथ ही परीक्षाओं और छात्र संघों के चुनाव भी निपटाने होंगेे
उच्च न्यायालय के अधिमान अंक पर रोक के कई माह बाद जागा था विवि
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कुमाऊं विश्वविद्यालय में स्नातक और परास्नातक प्रथम सेमेस्टर में स्थानीय विद्यार्थियों को (अधिमान अंक) वरीयता दिए जाने के शासनादेश को लेकर उच्च न्यायालय में गढ़वाल मंडल के एक व्यक्ति ने याचिका दाखिल की थी। इस पर न्यायालय ने स्थानीय विद्यार्थियों को अधिमान अंक देने की व्यवस्था को समाप्त किया था। उस वक्त न तो कुमाऊं विश्वविद्यालय और न ही उच्चशिक्षा विभाग ने इस आदेश पर गौर किया। विश्वविद्यालय को ता होश तब आया कि जब न्यायालय के आदेश पर अनुपालन करते हुए शासन ने अधिमान अंक देने संबंधी अपने आदेश को निरस्त किया। इसकी जानकारी 15 जून को कुमाऊं विश्वविद्यालय को भेजी गई। विश्वविद्यालय ने इस बार स्नातक प्रथम सेमेस्टर में ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की थी। आनलाइन प्रवेश के लिए आवेदन 10 जुलाई तक होने थे। इसके बाद 11 जुलाई से प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश थे। इसके बाद विश्वविद्यालय को चिंता हुई कि अधिमान अंक का मामला सुलझाए बिना प्रवेश कैसे होंगे। ऐसे में आनलाइन प्रवेश आवेदन प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई और सरकार पर उच्चतम न्यायालय में उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के लिए दबाव बनाया गया। सरकार अब उच्चतम न्यायालय गई भी है पर फिलहाल मामला लंबित है। नतीजा यह रहा 24 जुलाई को कुमाऊं विश्वविद्यालय को प्रवेश प्रक्रिया अपने अगले आदेश तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। उधर, कुमाऊं विश्वविद्यालय में प्रवेश में अधिमान अंक दिए जाने का मामला लटकने की वजह से महाविद्यालयों में भी एक माह से प्रवेश प्रक्रिया लटकी रही। प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुए बिना ही अगस्त माह के भी चार दिन निकल गए। ऐसे में विश्वविद्यालय और संबंधित महाविद्यालयों में शिक्षा सत्र प्रभावित होने के आसार हैं। अब छात्र संघ के चुनाव हैं, पहले और तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं भी सर पर हैं। कब तो प्रवेश होंगे और कब बाकी सब काम।
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कुमाऊं विवि की खुमारी टूटी पर कई चुनौतियां अभी सामने
प्रवेश के साथ ही परीक्षाओं और छात्र संघों के चुनाव भी निपटाने होंगेे
उच्च न्यायालय के अधिमान अंक पर रोक के कई माह बाद जागा था विवि