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एबीवीपी पर हावी युवा मोर्चा और भाजपा

Wed, 24 Jan 2018 02:17 AM IST
Updated Wed, 24 Jan 2018 02:17 AM IST
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एबीवीपी पर हावी युवा मोर्चा और भाजपा
हल्द्वानी। ज्ञान शील एकता की बात करने वाली एबीवीपी सत्ता की हनक में खुद अपने मौलिक मंत्रों को भूल बैठी है। अब वह ज्ञान शील एकता की जगह संघर्ष शील एकता का नारा दे रही है। हाल यह है कि एबीवीपी का आगामी 28 से 30 जनवरी तक प्रांतीय अधिवेशन हल्द्वानी के लक्ष्मी शिशु विद्या मंदिर में आयोजित हो रहा है जिसकी एबीवीपी के नैनीताल जिले के अधिकांश पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को सूचना तक नहीं दी गई, इसको लेकर कार्यकर्ताओं में व्याप्त असंतोष अधिवेशन में भी फूट सकता है।
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छात्रसंघ चुनाव के समय से एबीवीपी में हावी हुई गुटबाजी अभी तक समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। कार्यकर्ताओं की मानें तो एबीवीपी में केवल एक जाति विशेष के कार्यकर्ताओं को ही तरजीह मिल रही है। बाकी पदाधिकारियों की कोई पूछ ही नहीं है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि एबीवीपी का संचालन एबीवीपी के पदाधिकारी नहीं बल्कि संगठन की बागडोर भाजपा और युवा मोर्चा के पदाधिकारियों के हाथों में लगती है।
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छात्रसंघ चुनाव के बाद से अलग थलग एबीवीपी के जिला संयोजक कार्तिक हर्बोला और प्रदेश उपाध्यक्ष बलराम प्रसाद समेत कई पदाधिकारी प्रांतीय अधिवेशन की तैयारियों में नहीं दिख रहे। कहने को भले ही एबीवीपी एक छात्र संगठन है लेकिन इस पर युवा मोर्चा और भाजपा से जुड़े लोग इस कदर हावी दिख रहे हैं कि विगत दिवस एबीवीपी कार्यालय में संगठन की बैठक में एबीवीपी के पदाधिकारियों की जगह कार्यकर्ताओं की बैठक सांसद भगत सिंह कोश्यारी के ओएसडी सुरेश गडिया और युवा मोर्चा के प्रमोद बोरा लेते दिखाई दिए।
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कार्यकर्ताओं की मानें तो प्रांतीय अधिवेशन के व्यवस्था प्रमुख की जिम्मेदारी युवा मोर्चा के प्रमोद बोरा और सह व्यवस्था प्रमुख की जिम्मेदारी अल्मोड़ा के भाजपा पदाधिकारी जगदीश बिष्ट को दी गई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि छह दिसंबर को होने वाला समरसता दिवस, 12 जनवरी से 23 जनवरी तक चलने वाले युवा पखवाड़ा जैसे कार्यक्रम तक इस बार एबीवीपी में गुटबाजी के चलते नहीं हो सके।


एबीवीपी में किसी तरह की कोई गुटबाजी नहीं है। प्रांतीय अधिवेशन को सफल बनाना हमारा लक्ष्य है इसलिए इसकी जिम्मेदारी अनुभवी पुराने कार्यकर्ताओं को देने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए। अगर कार्यकर्ताओं में कहीं असंतोष की बात है तो बात कर उसे दूर किया जाएगा। - मनोज निखरा, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, एबीवीपी
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