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एक कंपनी, एक दवा और कीमत तय करे सरकार
Updated Sun, 17 Dec 2017 02:45 AM IST
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हल्द्वानी में आईएमए उत्तराकॉन का आयोजन
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. आरएन टंडन ने कहा कि साक्ष्य आधारित इलाज से मरीजों पर बोझ बढ़ेगा। नए नियम-कानूनों का सीधा असर मरीजों पर पड़ेगा और उन्हें ज्यादा समस्याएं आएंगी। केंद्र सरकार को कानून बनाना चाहिए कि एक कंपनी एक साल्ट के नाम से एक ही दवा बनाएगी और उसकी कीमत निर्धारित होगी।
उत्तराकॉन 2017 में भाग लेने आए डॉ. आरएन टंडन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दवा कंपनियां एक साल्ट के नाम से तीन दवाएं बनाती हैं। जिनकी कीमत भी अलग-अलग होती है। कंपनी के प्रतिनिधि डॉक्टर को महंगे दाम वाली दवा के बारे में जानकारी देते हैं। केंद्र सरकार को एक कंपनी को एक साल्ट के नाम से एक ही दवा बनाने का कानून बनाना चाहिए। साथ ही दवा का दाम भी तय करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साक्ष्य आधारित इलाज करने के लिए जांचें कराना आवश्यक है। इससे मरीजों पर इलाज का बोझ बढ़ेगा। मरीज के इलाज के दौरान डिस्पोसबिल एवं दवाओं का खर्च 50 प्रतिशत होता है। ऐसे में सरकार को दामों को नियंत्रित करना चाहिए। डॉ. टंडन ने कहा कि सरकार अपने सरकारी अस्पताल के एक बेड और एक सर्जरी में आने वाले खर्च का विवरण क्यों नहीं बताती है। निजी अस्पताल से तुलना करने पर निजी अस्पताल का बिल कम होगा। उन्होंने कहा कि आईएमए ने सेल्फ रेग्यूलेटरी प्रोग्राम शुरू किया है। इसके तहत मरीजों की सुरक्षा कैसे की जाए इस पर ध्यान दिया जा रहा है।
इससे पहले शनिवार को नैनीताल रोड स्थित एक बारात घर में उत्तराकॉन 2017 का सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ शुभारंभ हुआ। इलाज के लिए मरीज या परिजनों की सहमति, ऑपरेशन थियेटर में मृत्यु होने पर क्या करें, एनएबीएच मानक, क्लीनिकल इस्टेबलिशमेंट एक्ट और इलाज के दौरान के प्रपत्रों के रखरखाव के बारे में आडियो वीडियो के माध्यम से विस्तार से विचार-विमर्श किया। इस दौरान आईएमए के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ. वीके मोंगा, उत्तराकॉन के आयोजन अध्यक्ष डॉ. जेएस खुराना, आयोजक सचिव डॉ. अजय पाल सिंह, डॉ. पंकज हरि गुप्ता, डॉ. अरुण कपूर, डॉ. केसी लोहनी, डॉ. बीसी पांडे, डॉ. गौरव सिंघल, डॉ. अनिल अग्रवाल, डॉ. राहुल सिंह, डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. महेश शर्मा, डॉ. डीसी पंत, डॉ. अपराजिता रावत, डॉ. गरिमा पाल, डॉ. ऋतु त्रिपाठी, डॉ. त्रिलोचन सिंह, डॉ. अरुण जोशी, डॉ. अमर पाल सिंह, डॉ. पुनीत गोयल, डॉ. धीरेंद्र बनकोटी, डॉ. अमित सुयाल, डॉ. प्रदीप पांडे आदि थे।
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अपने फायदे के लिए रनेता डाक्टर और मरीजों को भिड़ा रहे हैं
हल्द्वानी। मरीज और डॉक्टरों के बीच बिगड़ रहे रिश्तों के लिए आईएमए के प्रदेश सचिव डॉ. डीडी चौधरी ने सीधे तौर पर राजनेताओं को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी को जनता से कोई लेना देना नहीं है अपने वोट बैंक के लिए जनता का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की पूर्व सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और कारपोरेट अस्पतालों के बीच पता नहीं क्या खिचड़ी पकी और क्लीनिकल इस्टेबलिशमेंट एक्ट तैयार हुआ। कारपोरेट अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए एक्ट लाया गया है। इससे मरीज का इलाज और महंगा होगा साथ ही सरकारी अस्पताल मानक पूरा नहीं कर पाएंगे। भाजपा सरकार भी कांग्रेस की नीतियों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कट और कमीशन के खेल में लगे या गलत ढंग से प्रैक्टिस कर रहे डाक्टरों पर नजर रख रही है। ऐसे मामलों में आईएमए की नीति जीरो टालरेंस की है। कोई मामला सामने आने पर डाक्टर को आईएमए से बाहर किया जाएगा और मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया से उसके खिलाफ कार्रवाई को कहा जाएगा।
हर व्यक्ति का हो स्वास्थ्य बीमा
हल्द्वानी। सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज गोरकेला ने कहा कि देश में हर व्यक्ति को स्वास्थ्य बीमा जरूर कराना चाहिए। दिल्ली के एक अस्पताल के मामले में कहा कि मीडिया ट्रायल न करे। ट्रायल करने का काम न्यायालय का है और साक्ष्य के आधार पर निर्णय देना का अधिकार भी न्यायालय का है। मीडिया को इस भूमिका से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी तरह की घटना होने पर दोनों पक्षों की बात मीडिया को रखनी चाहिए।
डॉ. बीसी पांडे बने आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष
हल्द्वानी। उत्तराकॉन में डॉ. बीसी पांडे को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्ति किया गया। प्रदेश सचिव एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष की घोषणा रविवार को होगी।
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उत्तराकॉन 2017 में भाग लेने आए डॉ. आरएन टंडन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दवा कंपनियां एक साल्ट के नाम से तीन दवाएं बनाती हैं। जिनकी कीमत भी अलग-अलग होती है। कंपनी के प्रतिनिधि डॉक्टर को महंगे दाम वाली दवा के बारे में जानकारी देते हैं। केंद्र सरकार को एक कंपनी को एक साल्ट के नाम से एक ही दवा बनाने का कानून बनाना चाहिए। साथ ही दवा का दाम भी तय करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साक्ष्य आधारित इलाज करने के लिए जांचें कराना आवश्यक है। इससे मरीजों पर इलाज का बोझ बढ़ेगा। मरीज के इलाज के दौरान डिस्पोसबिल एवं दवाओं का खर्च 50 प्रतिशत होता है। ऐसे में सरकार को दामों को नियंत्रित करना चाहिए। डॉ. टंडन ने कहा कि सरकार अपने सरकारी अस्पताल के एक बेड और एक सर्जरी में आने वाले खर्च का विवरण क्यों नहीं बताती है। निजी अस्पताल से तुलना करने पर निजी अस्पताल का बिल कम होगा। उन्होंने कहा कि आईएमए ने सेल्फ रेग्यूलेटरी प्रोग्राम शुरू किया है। इसके तहत मरीजों की सुरक्षा कैसे की जाए इस पर ध्यान दिया जा रहा है।
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इससे पहले शनिवार को नैनीताल रोड स्थित एक बारात घर में उत्तराकॉन 2017 का सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ शुभारंभ हुआ। इलाज के लिए मरीज या परिजनों की सहमति, ऑपरेशन थियेटर में मृत्यु होने पर क्या करें, एनएबीएच मानक, क्लीनिकल इस्टेबलिशमेंट एक्ट और इलाज के दौरान के प्रपत्रों के रखरखाव के बारे में आडियो वीडियो के माध्यम से विस्तार से विचार-विमर्श किया। इस दौरान आईएमए के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष डॉ. वीके मोंगा, उत्तराकॉन के आयोजन अध्यक्ष डॉ. जेएस खुराना, आयोजक सचिव डॉ. अजय पाल सिंह, डॉ. पंकज हरि गुप्ता, डॉ. अरुण कपूर, डॉ. केसी लोहनी, डॉ. बीसी पांडे, डॉ. गौरव सिंघल, डॉ. अनिल अग्रवाल, डॉ. राहुल सिंह, डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. महेश शर्मा, डॉ. डीसी पंत, डॉ. अपराजिता रावत, डॉ. गरिमा पाल, डॉ. ऋतु त्रिपाठी, डॉ. त्रिलोचन सिंह, डॉ. अरुण जोशी, डॉ. अमर पाल सिंह, डॉ. पुनीत गोयल, डॉ. धीरेंद्र बनकोटी, डॉ. अमित सुयाल, डॉ. प्रदीप पांडे आदि थे।
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अपने फायदे के लिए रनेता डाक्टर और मरीजों को भिड़ा रहे हैं
हल्द्वानी। मरीज और डॉक्टरों के बीच बिगड़ रहे रिश्तों के लिए आईएमए के प्रदेश सचिव डॉ. डीडी चौधरी ने सीधे तौर पर राजनेताओं को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी को जनता से कोई लेना देना नहीं है अपने वोट बैंक के लिए जनता का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की पूर्व सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और कारपोरेट अस्पतालों के बीच पता नहीं क्या खिचड़ी पकी और क्लीनिकल इस्टेबलिशमेंट एक्ट तैयार हुआ। कारपोरेट अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए एक्ट लाया गया है। इससे मरीज का इलाज और महंगा होगा साथ ही सरकारी अस्पताल मानक पूरा नहीं कर पाएंगे। भाजपा सरकार भी कांग्रेस की नीतियों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कट और कमीशन के खेल में लगे या गलत ढंग से प्रैक्टिस कर रहे डाक्टरों पर नजर रख रही है। ऐसे मामलों में आईएमए की नीति जीरो टालरेंस की है। कोई मामला सामने आने पर डाक्टर को आईएमए से बाहर किया जाएगा और मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया से उसके खिलाफ कार्रवाई को कहा जाएगा।
हर व्यक्ति का हो स्वास्थ्य बीमा
हल्द्वानी। सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज गोरकेला ने कहा कि देश में हर व्यक्ति को स्वास्थ्य बीमा जरूर कराना चाहिए। दिल्ली के एक अस्पताल के मामले में कहा कि मीडिया ट्रायल न करे। ट्रायल करने का काम न्यायालय का है और साक्ष्य के आधार पर निर्णय देना का अधिकार भी न्यायालय का है। मीडिया को इस भूमिका से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी तरह की घटना होने पर दोनों पक्षों की बात मीडिया को रखनी चाहिए।
डॉ. बीसी पांडे बने आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष
हल्द्वानी। उत्तराकॉन में डॉ. बीसी पांडे को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्ति किया गया। प्रदेश सचिव एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष की घोषणा रविवार को होगी।