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एक नंबर की दो-दो गाड़ियों से खनन चोरी
Updated Sun, 08 Oct 2017 02:31 AM IST
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हल्द्वानी। खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि इंसानों के साथ-साथ मशीन की आंखों में भी धूल झोंक कर धोखाधड़ी की जा रही है। नदी में उप खनिज भरते, ले जाते और प्रवेश के इंतजार में खड़े एक ही पंजीयन नंबर की दो-दो गाड़ियां पकड़ी गई हैं। यानी अवैध खनन रोकने के सारे इंतजाम धरे के धरे रह गए।
गौला में 11 गेटों से 7544 वाहनों से उप खनिज निकासी की जाती है। एक नंबर से दो वाहन प्रवेश नहीं करें और नियमित खनन हो इसलिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन चिप लगाने की व्यवस्था की है। इस चिप को वाहन में लगा दिया जाता है। जब वाहन नदी में उप खनिज भरने जाने के लिए खनन गेट में प्रवेश करते हैं तो सेंसर मशीन के जरिए वाहनों पर लगी चिप के समस्त विवरण जैसे वाहन स्वामी का नाम, प्रकार, क्षमता, मॉडल, परिवहन पंजीयन नंबर वगैरह जानकारियां कंप्यूटर पर आ जाती है। इसका सीधा मकसद था कि एक ही पंजीयन के आधार पर दो-दो गाड़ियां न घुसें और न अवैध खनन हो। सिस्टम के संचालन के लिए बाकायदा 10 रुपये प्रति चक्कर वसूला जाता है। इधर वन महकमे ने बीते खनन सत्र में 50 से ज्यादा ऐसे मामले पकड़े जिनमें एक ही पंजीयन नंबर पर दो-दो गाड़ियां चल रही थीं। इनसे करीब 7,000 क्विंटल माल की चोरी पकड़ी गई। ये मामले वो हैं, जो पकड़ में आए। कई ऐसे मामले होंगे जो विभाग की निगरानी में नहीं आ सके हैं। इससे सीधे तौर पर चिप सिस्टम और खनन चोरी रोकने वालों की भूमिका को सवालों के घेरे में खड़ा करता है।
इस तरह होता है खेल
एक ही नंबर की दो गाड़ियां अंदर जाती है एक पहले निकलती है फिर तकनीकी कमी का हवाला देकर दूसरी गाड़ी भी निकाली जाती है। इस तरह एक ही रवन्ने से दो-दो गाड़ियां निकल जाती हैं। इससे रायल्टी का नुकसान होता है। वहीं कुछ मामलों में ज्यादा माल हड़पने के मकसद से भी गाड़ियां उतारी जाती है, जिनकी बाकायदा रायल्टी भी दी जाती है।
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हर चक्कर पर चिप के नाम पर 10 रुपये वसूलना डंपर पर आर्थिक बोझ है। वैसे भी चिप काम नहीं करती है। वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य करना चाहिए। - राजेंद्र सिंह बिष्ट, अध्यक्ष गौला मजदूर संघर्ष समिति
कुछ गेटों पर वाहन पहाड़ को जाते हैं जो दो-तीन दिन बाद लौटते हैं। माफिया पहाड़ जाने वाली गाड़ियों के नंबर नोट कर लेते हैं और दूसरे वाहनों की नंबर प्लेट बदलकर उक्त वाहन का नंबर लिख कर हेरफेर करते हैं, जिसे चिप सिस्टम नहीं पकड़ पाता है। - एहतेशाम खान
अभी चिप सिस्टम नया लगा है इसलिए शुरूआती दिक्कतें हैं, वाहनों में अब हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को अनिवार्य किया जा रहा है। इससे एक नंबर पर दो गाड़ियां चलना बिल्कुल बंद हो जाएगा। - एनके वार्ष्णेय, डीएलएम गौला, वन विकास निगम।
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गौला में 11 गेटों से 7544 वाहनों से उप खनिज निकासी की जाती है। एक नंबर से दो वाहन प्रवेश नहीं करें और नियमित खनन हो इसलिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन चिप लगाने की व्यवस्था की है। इस चिप को वाहन में लगा दिया जाता है। जब वाहन नदी में उप खनिज भरने जाने के लिए खनन गेट में प्रवेश करते हैं तो सेंसर मशीन के जरिए वाहनों पर लगी चिप के समस्त विवरण जैसे वाहन स्वामी का नाम, प्रकार, क्षमता, मॉडल, परिवहन पंजीयन नंबर वगैरह जानकारियां कंप्यूटर पर आ जाती है। इसका सीधा मकसद था कि एक ही पंजीयन के आधार पर दो-दो गाड़ियां न घुसें और न अवैध खनन हो। सिस्टम के संचालन के लिए बाकायदा 10 रुपये प्रति चक्कर वसूला जाता है। इधर वन महकमे ने बीते खनन सत्र में 50 से ज्यादा ऐसे मामले पकड़े जिनमें एक ही पंजीयन नंबर पर दो-दो गाड़ियां चल रही थीं। इनसे करीब 7,000 क्विंटल माल की चोरी पकड़ी गई। ये मामले वो हैं, जो पकड़ में आए। कई ऐसे मामले होंगे जो विभाग की निगरानी में नहीं आ सके हैं। इससे सीधे तौर पर चिप सिस्टम और खनन चोरी रोकने वालों की भूमिका को सवालों के घेरे में खड़ा करता है।
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इस तरह होता है खेल
एक ही नंबर की दो गाड़ियां अंदर जाती है एक पहले निकलती है फिर तकनीकी कमी का हवाला देकर दूसरी गाड़ी भी निकाली जाती है। इस तरह एक ही रवन्ने से दो-दो गाड़ियां निकल जाती हैं। इससे रायल्टी का नुकसान होता है। वहीं कुछ मामलों में ज्यादा माल हड़पने के मकसद से भी गाड़ियां उतारी जाती है, जिनकी बाकायदा रायल्टी भी दी जाती है।
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हर चक्कर पर चिप के नाम पर 10 रुपये वसूलना डंपर पर आर्थिक बोझ है। वैसे भी चिप काम नहीं करती है। वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य करना चाहिए। - राजेंद्र सिंह बिष्ट, अध्यक्ष गौला मजदूर संघर्ष समिति
कुछ गेटों पर वाहन पहाड़ को जाते हैं जो दो-तीन दिन बाद लौटते हैं। माफिया पहाड़ जाने वाली गाड़ियों के नंबर नोट कर लेते हैं और दूसरे वाहनों की नंबर प्लेट बदलकर उक्त वाहन का नंबर लिख कर हेरफेर करते हैं, जिसे चिप सिस्टम नहीं पकड़ पाता है। - एहतेशाम खान
अभी चिप सिस्टम नया लगा है इसलिए शुरूआती दिक्कतें हैं, वाहनों में अब हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को अनिवार्य किया जा रहा है। इससे एक नंबर पर दो गाड़ियां चलना बिल्कुल बंद हो जाएगा। - एनके वार्ष्णेय, डीएलएम गौला, वन विकास निगम।