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नहाय खाय के साथ शुरू हुआ छठ पूजा का व्रत
Updated Mon, 12 Nov 2018 02:12 AM IST
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sun
- फोटो : sun
हल्द्वानी। छठ सेवा समिति की ओर से छठ पूजा की तैयारी पूरी हो गई है। सुशीला तिवारी अस्पताल स्थित छठ पूजा स्थल पर दिनभर रंगाई पुताई का काम होता रहा। मनोकामना पूरी होने पर कई लोगों ने नई पूजा की वेदियां भी बनाई हैं। छठ पूजा को लेकर लोगों में खासा उत्साह है।
छठ सेवा समिति के महामंत्री मुरारी प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि 11 नवंबर को महिलाओं ने दोपहर में चने की दाल, लौकी की सब्जी और चावल खाकर व्रत की शुरुआत की। अब 12 नवंबर को दिनभर व्रत रखा जाएगा। सोमवार को सूर्यास्त के बाद खीर और पूरी के साथ मीठा भोजन किया जाएगा। इसे चारणा कहा जाता है। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर को पूरे दिन निर्जल व्रत रहेगा। सुहागिनें निर्जल व्रत रखने के बाद शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी। जिनकी मनोकामना पूरी हुई है उन लोगों ने पूजा स्थल पर नई वेदियां भी बनाई हैं। 13 नवंबर को पूजा स्थल पर कोरे काठ या लकड़ी की टोकरी पर फल, मूली, गाजर, अनानास, सूथनी, ठेकुआ (गुड़ और आटे से निर्मित) घाट में ले जाकर पूजा अर्चना की जाएगी। वहां रातभर भजन कीर्तन होंगे। ‘कांचहिं बासें की बहंगिया बहंगी लचकत जाए’ और ‘पेन्हा ना पियरिया कि बबुआ चल अरघ की बेर’ गीत के साथ पूजा अर्चना होगी। 14 नवंबर को सुबह छह बजे उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। सुबह भजन कीर्तन, आरती, प्रसाद वितरण के साथ पूजा का समापन होगा। भजन कीर्तन के लिए नवदुर्गा जागरण मंच खटीमा के कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। निर्विघ्न पूजा के लिए अध्यक्ष कृष्णा साह, सचिव सुरेश भगत, मीडिया प्रभारी उषा कुमार, उपाध्यक्ष छोटे लाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शंकर भगत, कोषाध्यक्ष वीरू पंडित, कार्यकारी अध्यक्ष विंदेश्वर सिंह, संयुक्त मंत्री जयप्रकाश साह, सह कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश साह, संगठन मंत्री रामअवतार, उप सचिव प्रभा साह, संरक्षक जसवंत सिंह सलूजा, कपिल भगत, रघुनाथ चौधरी, महंत भगत, यूके सिंह, कश्मीरी लाल साहनी, राजेंद्र कनौजिया आदि सभी लोग दिनभर पूजा छठ पूजा की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे रहे।
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छठ सेवा समिति के महामंत्री मुरारी प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि 11 नवंबर को महिलाओं ने दोपहर में चने की दाल, लौकी की सब्जी और चावल खाकर व्रत की शुरुआत की। अब 12 नवंबर को दिनभर व्रत रखा जाएगा। सोमवार को सूर्यास्त के बाद खीर और पूरी के साथ मीठा भोजन किया जाएगा। इसे चारणा कहा जाता है। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर को पूरे दिन निर्जल व्रत रहेगा। सुहागिनें निर्जल व्रत रखने के बाद शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी। जिनकी मनोकामना पूरी हुई है उन लोगों ने पूजा स्थल पर नई वेदियां भी बनाई हैं। 13 नवंबर को पूजा स्थल पर कोरे काठ या लकड़ी की टोकरी पर फल, मूली, गाजर, अनानास, सूथनी, ठेकुआ (गुड़ और आटे से निर्मित) घाट में ले जाकर पूजा अर्चना की जाएगी। वहां रातभर भजन कीर्तन होंगे। ‘कांचहिं बासें की बहंगिया बहंगी लचकत जाए’ और ‘पेन्हा ना पियरिया कि बबुआ चल अरघ की बेर’ गीत के साथ पूजा अर्चना होगी। 14 नवंबर को सुबह छह बजे उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। सुबह भजन कीर्तन, आरती, प्रसाद वितरण के साथ पूजा का समापन होगा। भजन कीर्तन के लिए नवदुर्गा जागरण मंच खटीमा के कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। निर्विघ्न पूजा के लिए अध्यक्ष कृष्णा साह, सचिव सुरेश भगत, मीडिया प्रभारी उषा कुमार, उपाध्यक्ष छोटे लाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शंकर भगत, कोषाध्यक्ष वीरू पंडित, कार्यकारी अध्यक्ष विंदेश्वर सिंह, संयुक्त मंत्री जयप्रकाश साह, सह कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश साह, संगठन मंत्री रामअवतार, उप सचिव प्रभा साह, संरक्षक जसवंत सिंह सलूजा, कपिल भगत, रघुनाथ चौधरी, महंत भगत, यूके सिंह, कश्मीरी लाल साहनी, राजेंद्र कनौजिया आदि सभी लोग दिनभर पूजा छठ पूजा की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे रहे।
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