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गेहूं में 60-70 और मटर में 30-40 फीसदी नुकसान की आशंका
Updated Sat, 13 Jan 2018 02:41 AM IST
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हल्द्वानी। जिले के पर्वतीय क्षेत्र में भले ही विभागीय स्तर पर सूखे के नुकसान का आंकलन अभी नहीं हुआ है लेकिन काश्तकार अब खुद ही बरसात न होने के कारण होने वाले नुकसान के आंकलन में जुट गए हैं। काश्तकारों का कहना है कि यदि हालात यही रहे तो उनके सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो जाएगा।
किसान संगठन के प्रदीप बिष्ट बताते हैं कि धारी में 20 फीसदी, ओखलकांडा में 60 फीसदी, रामगढ़ में 20, भीमताल और बेतालघाट में लगभग 60 फीसदी गेहूं की खेती होती है। जिसमें से 80 फीसदी खेती असिंचित भूमि में होती है। असिंचित भूमि में सिंचाई के लिए काश्तकार पूरी तरह बरसात पर निर्भर रहते हैं लेकिन इस बार बरसात नहीं होने के कारण में 80 फीसदी असिंचित भूमि में गेहूं का जमाव नहीं हुआ है। बिष्ट का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो गेहूं के उत्पादन में 50-60 फीसदी नुकसान हो सकता है। ओखलकांडा ब्लाक के जमराड़ी गांव के काश्तकार भवान रौतेला कहते हैं कि धारी और रामगढ़ में काश्तकारों ने आड़ू के बगीचों में मटर की बुवाई की है। क्षेत्र में 40 फीसदी से अधिक काश्तकार मटर की बुवाई करते हैं लेकिन बरसात न होने के कारण 20 फीसदी से अधिक मटर बर्बाद हो गई है। इसी तरह धारी ब्लाक में 90 फीसदी काश्तकार आलू की खेती से जुड़े हैं। आलू की बुवाई से पहले खेत को तीन बार जोतना पड़ता है लेकिन बरसात न होने के कारण काश्तकार अभी एक बार भी खेत में जुताई नहीं कर सके हैं। जिन काश्तकारों ने आलू की बुवाई की है वहां खेत में नमी न होने के कारण आलू में कुरमुला कीड़ा नजर आने लगा है। काश्तकारों ने जिला प्रशासन से नुकसान का सर्वे कर प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा दिलाने की भी मांग की है।
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किसान संगठन के प्रदीप बिष्ट बताते हैं कि धारी में 20 फीसदी, ओखलकांडा में 60 फीसदी, रामगढ़ में 20, भीमताल और बेतालघाट में लगभग 60 फीसदी गेहूं की खेती होती है। जिसमें से 80 फीसदी खेती असिंचित भूमि में होती है। असिंचित भूमि में सिंचाई के लिए काश्तकार पूरी तरह बरसात पर निर्भर रहते हैं लेकिन इस बार बरसात नहीं होने के कारण में 80 फीसदी असिंचित भूमि में गेहूं का जमाव नहीं हुआ है। बिष्ट का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो गेहूं के उत्पादन में 50-60 फीसदी नुकसान हो सकता है। ओखलकांडा ब्लाक के जमराड़ी गांव के काश्तकार भवान रौतेला कहते हैं कि धारी और रामगढ़ में काश्तकारों ने आड़ू के बगीचों में मटर की बुवाई की है। क्षेत्र में 40 फीसदी से अधिक काश्तकार मटर की बुवाई करते हैं लेकिन बरसात न होने के कारण 20 फीसदी से अधिक मटर बर्बाद हो गई है। इसी तरह धारी ब्लाक में 90 फीसदी काश्तकार आलू की खेती से जुड़े हैं। आलू की बुवाई से पहले खेत को तीन बार जोतना पड़ता है लेकिन बरसात न होने के कारण काश्तकार अभी एक बार भी खेत में जुताई नहीं कर सके हैं। जिन काश्तकारों ने आलू की बुवाई की है वहां खेत में नमी न होने के कारण आलू में कुरमुला कीड़ा नजर आने लगा है। काश्तकारों ने जिला प्रशासन से नुकसान का सर्वे कर प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा दिलाने की भी मांग की है।
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