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तू छै बाना नैनीताल की...
Updated Tue, 16 Oct 2018 01:40 AM IST
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नैनीताल की राष्ट्रसेवा समिति
- फोटो : अमर उजाला
नैनीताल। सर्वजनिन दुर्गा पूजा कमेटी के दुर्गा पूजा महोत्सव का सोमवार को कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। सांस्कृतिक समितियों और स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश कर धूम मचाई।
दुर्गा पूजा महोत्सव का सोमवार सुबह कलश यात्रा से शुभारंभ हुआ। दोपहर ढाई बजे से डीएसए मैदान में सजे पंडाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। हीरा समधणी..., उड़ा दो भंवरा... काकड़ खां वाली चीरा, फिट मेरी लछिमा पहाड़.... तू छै बाना नैनीताल की... आदि लोक गीतों पर डांस कर लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। रामनगर की पर्वतीय महिला एवं ग्राम विकास समिति की ओर से दैणा होया दैणा... बसंती छोरी रामनगर की.... आदि गीतों पर प्रस्तुति दी। एलपीएस स्कूल, सरस्वती विद्या मंदिर नैनीताल, नई दिशा समिति, हिमालय कला समिति बिंदुखत्ता आदि ने मुख्य रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक संजीव आर्य, पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल ने किया। कोलकाता से पहुंचे मुख्य पुजारी पंडित तपन चटर्जी ने पूजा कराई। इस दौरान नरदेव शर्मा, त्रिभुवन फर्त्याल, चंदन कुमार दास, राकेश कुमार, केएस अधिकारी, तृप्ती गुहा मजूमदार, सुमन साह, निदेश चंद्र भट्ट, शंकर गुहा मजूमदार, भाष्कर महतोलिया, मंजू रौतेला, सीमा दास, चित्रा शर्मा, कुसुम लता सनवाल, रश्मि राणा आदि थे।
बिच्छू घास की वास्कट भा रही
नैनीतल। दुर्गा पूजा महोत्सव मेले में व्यावसायिक प्रतिष्ठान सज चुके हैं। बिच्छू घास से बनी वास्कट सभी को भा रही है। हर मौसम में काम आने वाली यह वास्कट एक हफ्ते के कठिन परिश्रम से तैयार होती है। मुनस्यारी से आए व्यापारी प्रयाग रावत ने बताया कि पहाड़ों पर बिच्छू घास भारी मात्रा में पाई जाती है। स्थानीय लोग इससे वास्कट बनाकर रोजगार पा सकते हैं। इससे पलायन भी रुकेगा। वह कहते हैं कि निर्माण में 80 प्रतिशत बिच्छू घास के तने के रेशे और 20 प्रतिशत सूती से निर्मित है। रंग देने के लिए बुरांश, अखरोट का प्रयोग किया जाता है। खरगोश के बाल, भेड़ के ऊन से निर्मित कैप, स्वेटर, शॉल भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
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दुर्गा पूजा महोत्सव का सोमवार सुबह कलश यात्रा से शुभारंभ हुआ। दोपहर ढाई बजे से डीएसए मैदान में सजे पंडाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। हीरा समधणी..., उड़ा दो भंवरा... काकड़ खां वाली चीरा, फिट मेरी लछिमा पहाड़.... तू छै बाना नैनीताल की... आदि लोक गीतों पर डांस कर लोगों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। रामनगर की पर्वतीय महिला एवं ग्राम विकास समिति की ओर से दैणा होया दैणा... बसंती छोरी रामनगर की.... आदि गीतों पर प्रस्तुति दी। एलपीएस स्कूल, सरस्वती विद्या मंदिर नैनीताल, नई दिशा समिति, हिमालय कला समिति बिंदुखत्ता आदि ने मुख्य रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक संजीव आर्य, पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल ने किया। कोलकाता से पहुंचे मुख्य पुजारी पंडित तपन चटर्जी ने पूजा कराई। इस दौरान नरदेव शर्मा, त्रिभुवन फर्त्याल, चंदन कुमार दास, राकेश कुमार, केएस अधिकारी, तृप्ती गुहा मजूमदार, सुमन साह, निदेश चंद्र भट्ट, शंकर गुहा मजूमदार, भाष्कर महतोलिया, मंजू रौतेला, सीमा दास, चित्रा शर्मा, कुसुम लता सनवाल, रश्मि राणा आदि थे।
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बिच्छू घास की वास्कट भा रही
नैनीतल। दुर्गा पूजा महोत्सव मेले में व्यावसायिक प्रतिष्ठान सज चुके हैं। बिच्छू घास से बनी वास्कट सभी को भा रही है। हर मौसम में काम आने वाली यह वास्कट एक हफ्ते के कठिन परिश्रम से तैयार होती है। मुनस्यारी से आए व्यापारी प्रयाग रावत ने बताया कि पहाड़ों पर बिच्छू घास भारी मात्रा में पाई जाती है। स्थानीय लोग इससे वास्कट बनाकर रोजगार पा सकते हैं। इससे पलायन भी रुकेगा। वह कहते हैं कि निर्माण में 80 प्रतिशत बिच्छू घास के तने के रेशे और 20 प्रतिशत सूती से निर्मित है। रंग देने के लिए बुरांश, अखरोट का प्रयोग किया जाता है। खरगोश के बाल, भेड़ के ऊन से निर्मित कैप, स्वेटर, शॉल भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
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