{"_id":"6abac1219eee5f24ac00f6e3","slug":"baba-neeb-karoris-beloved-shyam-narang-is-no-more-nainital-news-c-337-1-shld1032-137318-2026-09-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Nainital News: नहीं रहे बाबा नीब करौरी के प्रिय श्याम नारंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Nainital News: नहीं रहे बाबा नीब करौरी के प्रिय श्याम नारंग
Tue, 29 Sep 2026 01:03 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Tue, 29 Sep 2026 01:03 AM IST
विज्ञापन
हल्द्वानी। गुरुनानकपुरा निवासी श्याम नारंग (98) का निधन हो गया। बाबा नीम करौरी महाराज के प्रति उनकी गहरी आस्था और भक्ति के कारण उनसे जुड़ी उनकी स्मृतियां आज भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखती हैं। महाराज जी उन्हें उनके प्रिय भजन माटी का पुतला के नाम से पुकारते थे।
विभाजन के समय वर्ष 1947 में रावलपिंडी से भारत आने के बाद श्याम नारंग ने नैनीताल के तल्लीताल में अपना बसेरा बनाया। तल्लीताल बाजार में व्यवसाय शुरू करने के साथ ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता की ओर बढ़ा। इसी दौरान वह बाबा नीम करौरी महाराज से जुड़े और उनके साथ भजन-कीर्तन भी किया। बताया गया कि श्याम नारंग की ओर से गाया जाने वाला माटी का पुतला भजन बाबा नीम करौरी महाराज को विशेष रूप से पसंद था। इसके बाद महाराज जी उन्हें इसी नाम से पुकारने लगे। उम्र के अंतिम पड़ाव तक उनके जीवन में यह भजन और बाबा नीम करौरी महाराज की स्मृतियां विशेष रूप से जुड़ी रहीं। श्याम नारंग का अंतिम संस्कार 27 सितंबर को राजपुरा स्थित मुक्तिधाम में किया गया। वह अपने पीछे पत्नी प्रकाश नारंग, तीन पुत्र, दो पुत्रियां, पोते-पोतियों समेत परिवार छोड़ गए।
विज्ञापन
विभाजन के समय वर्ष 1947 में रावलपिंडी से भारत आने के बाद श्याम नारंग ने नैनीताल के तल्लीताल में अपना बसेरा बनाया। तल्लीताल बाजार में व्यवसाय शुरू करने के साथ ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता की ओर बढ़ा। इसी दौरान वह बाबा नीम करौरी महाराज से जुड़े और उनके साथ भजन-कीर्तन भी किया। बताया गया कि श्याम नारंग की ओर से गाया जाने वाला माटी का पुतला भजन बाबा नीम करौरी महाराज को विशेष रूप से पसंद था। इसके बाद महाराज जी उन्हें इसी नाम से पुकारने लगे। उम्र के अंतिम पड़ाव तक उनके जीवन में यह भजन और बाबा नीम करौरी महाराज की स्मृतियां विशेष रूप से जुड़ी रहीं। श्याम नारंग का अंतिम संस्कार 27 सितंबर को राजपुरा स्थित मुक्तिधाम में किया गया। वह अपने पीछे पत्नी प्रकाश नारंग, तीन पुत्र, दो पुत्रियां, पोते-पोतियों समेत परिवार छोड़ गए।
विज्ञापन