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आरटीई का छह माह में निजी स्कूलों को भुगतान करे सरकार
Updated Thu, 15 Mar 2018 02:28 AM IST
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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की फीस का भुगतान छह माह के अंदर निजी स्कूलों को करने का आदेश सरकार को दिया है। न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार अगर भुगतान नहीं करती तो नए सत्र में निजी स्कूल इन बच्चों को प्रवेश देने में असमर्थ होंगे।
राज्य में उन बच्चों की शिक्षा पर संकट के बादल छाने लगे है जो शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश से शिक्षा ग्रहण कर रहे है। इन विद्यार्थियों की फीस का भुगतान अभी तक राज्य सरकार ने नहीं किया है। बुधवार को इस मामले में न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने सुनवाई की। थैलीसैंण ब्लाक के वित्त विहीन मान्यता प्राप्त एसोसिएशन सहित 28 निजी स्कूलों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा कि था कि उन्होंने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत छात्रों को स्कूलों में प्रवेश दिया था। इन छात्रों की फीस राज्य सरकार को भरनी है। राज्य सरकार ने 2015 से लेकर 2018 तक के तीन सत्रों का शुल्क स्कूलों को नहीं दिया है। कई बार राज्य सरकार से मांग की गई लेकिन सरकार की ओर से नहीं उठाया गया। पिछले वर्षों का पैसा नहीं मिलने से निर्धन वर्ग के छात्रों के सामने शिक्षा के साथ ड्रेस, किताबों का भी संकट उत्पन्न हो गया है।
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राज्य में उन बच्चों की शिक्षा पर संकट के बादल छाने लगे है जो शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश से शिक्षा ग्रहण कर रहे है। इन विद्यार्थियों की फीस का भुगतान अभी तक राज्य सरकार ने नहीं किया है। बुधवार को इस मामले में न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने सुनवाई की। थैलीसैंण ब्लाक के वित्त विहीन मान्यता प्राप्त एसोसिएशन सहित 28 निजी स्कूलों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा कि था कि उन्होंने शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत छात्रों को स्कूलों में प्रवेश दिया था। इन छात्रों की फीस राज्य सरकार को भरनी है। राज्य सरकार ने 2015 से लेकर 2018 तक के तीन सत्रों का शुल्क स्कूलों को नहीं दिया है। कई बार राज्य सरकार से मांग की गई लेकिन सरकार की ओर से नहीं उठाया गया। पिछले वर्षों का पैसा नहीं मिलने से निर्धन वर्ग के छात्रों के सामने शिक्षा के साथ ड्रेस, किताबों का भी संकट उत्पन्न हो गया है।
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