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कुष्ठ रोगियों के घर तोड़ने के मामले में 2
Updated Thu, 21 Dec 2017 02:14 AM IST
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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने हरिद्वार जिला प्रशासन द्वारा कुष्ठ रोगियों के घर तोड़ने के मामले में हरिद्वार के जिलाधिकारी और प्रदेश के कुष्ठ रोग अधिकारी को नोटिस जारी कर 28 दिसंबर को अपना जवाब कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 23 सितंबर को राष्ट्रपति के दौरे से पहले हरिद्वार जिला प्रशासन ने चंडी घाट के पास बने कुष्ठ रोगियों के घरों पर बुल्डोजर चला दिया था। इस कार्रवाई में उनके 12 टिन शेड, 6 पक्के मकान और शौचालय कांप्लेक्स तोड़ दिए गए। जिला प्रशासन ने इन्हें तोड़ते समय प्रभावितों को आश्वासन दिया था कि उन्हें विस्थापित किया जाएगा। तीन महीने बीत जाने के बाद भी प्रभावितों को विस्थापित नहीं किया गया। इसके खिलाफ हरिद्वार निवासी केशो चौधरी ने बुधवार को हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रभावितों को जाड़े के मौसम में काफी परेशानी हो रही है और उन्हें खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को विवश होना पड़ रहा है। खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उन्होंने क्यों इन असहाय लोगों के आवास उजाड़े और प्रभावितों को क्यों विस्थापित नहीं किया जा रहा है। ब्यूरो
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मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 23 सितंबर को राष्ट्रपति के दौरे से पहले हरिद्वार जिला प्रशासन ने चंडी घाट के पास बने कुष्ठ रोगियों के घरों पर बुल्डोजर चला दिया था। इस कार्रवाई में उनके 12 टिन शेड, 6 पक्के मकान और शौचालय कांप्लेक्स तोड़ दिए गए। जिला प्रशासन ने इन्हें तोड़ते समय प्रभावितों को आश्वासन दिया था कि उन्हें विस्थापित किया जाएगा। तीन महीने बीत जाने के बाद भी प्रभावितों को विस्थापित नहीं किया गया। इसके खिलाफ हरिद्वार निवासी केशो चौधरी ने बुधवार को हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रभावितों को जाड़े के मौसम में काफी परेशानी हो रही है और उन्हें खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को विवश होना पड़ रहा है। खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उन्होंने क्यों इन असहाय लोगों के आवास उजाड़े और प्रभावितों को क्यों विस्थापित नहीं किया जा रहा है। ब्यूरो
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