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अतिक्रमणकारियों को फिर से सड़क किनारे बसाने पर रोक

Sun, 08 Oct 2017 02:31 AM IST
Updated Sun, 08 Oct 2017 02:31 AM IST
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अतिक्रमणकारियों को फिर से सड़क किनारे बसाने पर रोक
नैनीताल। हरिद्वार निगम क्षेत्र में रेलवे स्टेशन से लेकर कोतवाली तक सड़क किनारे अतिक्रमण के मामले में उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार फैसला करने का आदेश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने 1990 में इस अतिक्रमण को हटाने को कहा था। हरिद्वार नगर निगम ने विस्थापन की व्यवस्था न होने तक अतिक्रमणकारियों को फिर से सड़क किनारे बसाने का प्रस्ताव पारित किया था।
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मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार नगर निगम के पार्षद उपेंद्र कुमार ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। याची के मुताबिक वर्ष 2016 में नगर निगम हरिद्वार ने रेलवे स्टेशन से लेकर हरिद्वार कोतवाली तक हटाये गए अतिक्रमणकारियों को फिर से वहीं बसाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इस प्रस्ताव में कहा गया कि जब तक निगम को इनको विस्थापित करने की जगह नहीं मिलती तब तक इनको सड़क के किनारे ही रहने दिया जाए। पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय ने 1990 में इन अतिक्रमणकारियों को हटाने के साथ किसी अन्य जगह विस्थापित करने के निर्देश दिए थे। 2010 में हरिद्वार में कुंभ मेले के कारण सरकार ने इनको हटवा दिया था। खंडपीठ ने याचिका को निस्तारित करते हुए राज्य सरकार और नगर निगम को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप फैसला करने और अतिक्रमणकारियों को कहीं अन्य जगह विस्थापित करने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने तब तक निगम की ओर से पारित प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है।
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