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बच्चों का लंच खा रहे बंदर-लंगूर सरकार बताए अब तक क्या किया
Updated Sat, 07 Oct 2017 01:59 AM IST
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नैनीताल। बंदरों और लंगूरों के आतंक से निजात दिलाने के मामले में उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार का जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सरकार को 13 नवंबर तक इस मामले में प्रगति रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया है। पूर्व में अल्मोड़ा के 52 छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर बंदरों और लंगूरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की थी।
शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अल्मोड़ा के मास्टर आयुष सहित स्कूल जाने वाले 52 बच्चों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर बताया था कि स्कूल से आते-जाते समय बंदर और लंगूर उनको काटने आते हैं। कभी -कभी तो ये बच्चों का लंच भी खा जाते हैं। बच्चों की ओर से इनसे निजात दिलाने की मांग की गई थी।
पूर्व में कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि बंदरों और लंगूरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। याची के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि जंगल कटने से वन्य जीव आबादी की तरफ आ जाते हैं। घरों में बचा खाना लोग सड़कों व रास्तों में फेंक देते हैं। याची की ओर से यह भी बताया गया कि पिछले ढाई साल में सरकार ने बंदरों और लंगूरों की समस्या के समाधान के लिए कोई काम नहीं किया। खंडपीठ ने अगली की अगली सुनवाई के लिए 13 नवंबर की तिथि नियत की।
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शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अल्मोड़ा के मास्टर आयुष सहित स्कूल जाने वाले 52 बच्चों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर बताया था कि स्कूल से आते-जाते समय बंदर और लंगूर उनको काटने आते हैं। कभी -कभी तो ये बच्चों का लंच भी खा जाते हैं। बच्चों की ओर से इनसे निजात दिलाने की मांग की गई थी।
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पूर्व में कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि बंदरों और लंगूरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। याची के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि जंगल कटने से वन्य जीव आबादी की तरफ आ जाते हैं। घरों में बचा खाना लोग सड़कों व रास्तों में फेंक देते हैं। याची की ओर से यह भी बताया गया कि पिछले ढाई साल में सरकार ने बंदरों और लंगूरों की समस्या के समाधान के लिए कोई काम नहीं किया। खंडपीठ ने अगली की अगली सुनवाई के लिए 13 नवंबर की तिथि नियत की।
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