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कांग्रेस संगठन चुनाव में अनियमितताओं के आरोप 18-19-20
Updated Mon, 02 Oct 2017 12:19 AM IST
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खटीमा। कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव में अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। पार्टी संगठन से जुड़े कुछ लोगों ने उत्तराखंड चुनाव प्रभारी जयप्रकाश अग्रवाल को पत्र भेजकर पार्टी के एक पदाधिकारी पर कार्यकर्ताओं से सादे कागज पर दस्तखत करवाने के आरोप लगाए। संगठन चुनाव से असंतुष्ट नेताओं की शिकायत से कांग्रेसियों में खलबली मची है।
खटीमा, नानकमता और सितारगंज विधानसभा क्षेत्र के एक पूर्व राज्यमंत्री, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश स्तर के और किसान कांग्रेस के पदाधिकारियों ने चुनाव प्रभारी अग्रवाल को भेजे पत्र में कहा कि संगठन चुनाव में अनियमितता बरती जा रही है। पार्टी के जिला चुनाव अधिकारी (डीआरओ), ब्लाक चुनाव अधिकारी (बीआरओ) को न्याय पंचायत स्तर, बूथ स्तर पर जाकर कार्यकर्ताओं से रायशुमारी करनी थी।
बीते विधानसभा चुनाव में हार के लिए क्या कारण रहे, संगठन को किस तरह मजबूत किया जाए, जिससे आने वाले चुनाव में पार्टी को मजबूती मिले, इस पर आम कार्यकर्ता से सुझाव लिए जाने थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। एक जगह बैठक बुलाकर कार्यकर्ताओं से राय ले ली गई। बैठक की सूचना भी पूरी तरह कार्यकर्ताओं को नहीं दी गई।
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इसी तरह प्रदेेश प्रवक्ता ने यहां आकर आम चर्चा के बजाए कुछ कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर कराकर खानापूर्ति कर दी। संगठन चुनाव में पारदर्शिता न होने से समर्पित कार्यकर्ता स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने संगठन के एक पदाधिकारी पर अपने हिसाब से संगठन चलाने का आरोप भी लगाया है, जिसके नाम का खुलासा पत्र में नहीं किया गया है।
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खटीमा, नानकमता और सितारगंज विधानसभा क्षेत्र के एक पूर्व राज्यमंत्री, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश स्तर के और किसान कांग्रेस के पदाधिकारियों ने चुनाव प्रभारी अग्रवाल को भेजे पत्र में कहा कि संगठन चुनाव में अनियमितता बरती जा रही है। पार्टी के जिला चुनाव अधिकारी (डीआरओ), ब्लाक चुनाव अधिकारी (बीआरओ) को न्याय पंचायत स्तर, बूथ स्तर पर जाकर कार्यकर्ताओं से रायशुमारी करनी थी।
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बीते विधानसभा चुनाव में हार के लिए क्या कारण रहे, संगठन को किस तरह मजबूत किया जाए, जिससे आने वाले चुनाव में पार्टी को मजबूती मिले, इस पर आम कार्यकर्ता से सुझाव लिए जाने थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। एक जगह बैठक बुलाकर कार्यकर्ताओं से राय ले ली गई। बैठक की सूचना भी पूरी तरह कार्यकर्ताओं को नहीं दी गई।
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इसी तरह प्रदेेश प्रवक्ता ने यहां आकर आम चर्चा के बजाए कुछ कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर कराकर खानापूर्ति कर दी। संगठन चुनाव में पारदर्शिता न होने से समर्पित कार्यकर्ता स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने संगठन के एक पदाधिकारी पर अपने हिसाब से संगठन चलाने का आरोप भी लगाया है, जिसके नाम का खुलासा पत्र में नहीं किया गया है।