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रिन्यूअल में संघ फसेंगे खेल कोड के जाल में

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 18 Feb 2019 01:59 AM IST
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रिन्यूअल में संघ फसेंगे खेल कोड के जाल में
हल्द्वानी। राज्य में लागू खेल कोड के जाल अब खेल संघों का फंसना तय है। चिट्स फंड एवं सोसायटी में पंजीकरण के नियम ने खेल संघों के लिए जाल बिछाने का काम किया है। नियमों के अनुसार खेल संघों में प्रदेश का नाम प्रयोग करने पर राज्य सरकार से अनुमति लेनी अनिवार्य होती है। इस कारण उत्तराखंड या उत्तरांचल नाम प्रयोग करने वाले संघों को अपने संगठन के नवीनीकरण के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी। पांच वर्ष में संघों का नवीनीकरण होता है।
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नवीनीकरण में खेल कोड के जाल में फंसेंगे संघ
उत्तराखंड या उत्तरांचल शब्द प्रयोग करने वाले संघों की बढे़गी परेशानी
पांच साल पर गैर लाभकारी सोसायटी को कराना होता है नवीनीकरण
खेल निदेशालय की अनुमति पर ही कर सकेंगे नाम का प्रयोग

यह है सोसायटी एक्ट का नियम
राज्य के निबंधक फर्म्स सोसाइटीज एवं चिट्स ने 25 जनवरी 2017 में सभी उपनिबंधकों को पत्र भेजा था। इसमें स्पष्ट किया गया था कि किसी भी सोसायटी के साथ फेडरेशन, ट्रस्ट शब्द का प्रयोग नहीं किया जा सकता। इसको हटाने के लिए भी कार्रवाई के आदेश निबंधक ने दिए थे। उत्तराखंड या उत्तरांचल शब्द प्रयोग करने वाले खेल संघों के नवीनीकरण का मामला सीधे खेल निदेशालय देहरादून भेजने का आदेश है। नाम प्रयोग करने वाले संघों को खेल निदेशालय की अनुमति लेनी होगी। उप निबंधक शिवानी पांडे ने बताया कि उत्तरांचल या उत्तराखंड शब्द का प्रयोग करना मना है। इसके लिए शासन से अनुमति लेनी होगी। राज्य में ओलंपिक से जुडे़ ही 40 खेल हैं। इनका संचालन करने वाले संघ राज्य का नाम या फेडरेशन शब्द का प्रयोग करते हैं।
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राज्य खेल कोड में यह है व्यवस्था
पांच सितंबर 2018 को राज्य सरकार ने खेल कोड लागू कर दिया था। कोड में खेल विभाग के कर्मचारियों को संघों में पद लेने पर रोक लगा दी गई। दूसरे विभागों के कर्मचारी को पद लेने से पहले सरकार से अनुमति लेनी होगी। संघ के चुनाव का ब्योरा, पदाधिकारियों की उम्र की जानकारी, संघ के आय-व्यय का ब्योरा देना, खेल संघों के चुनाव में खेल विभाग के पर्यवेक्षक की तैनाती अनिवार्य कर दिया था। अगर खेल संघ अपना ब्योरा नहीं देते हैं तो निदेशालय खेल संघों को वित्तीय मदद नहीं देगा।
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