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कनिष्ठ अभियंताओं की नियुक्ति पर रोक
Updated Fri, 16 Mar 2018 01:52 AM IST
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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने पिटकुल और उत्तराखंड विद्युत निगम में कनिष्ठ अभियंताओं की नियुक्तियों पर रोक लगा दी है। इस मामले पर हो रही जांच की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के आदेश उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को दिए गए हैं।
न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। जगदीश प्रसाद समेत चार अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि 21 सितंबर 2016 को उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 515 जूनियर इंजीनियर पदों के लिए विज्ञप्ति जारी की। इन पदों के लिए ऑन लाइन आवेदनों की तिथि 31 अक्तूबर 2016 थी। आयोग ने पांच नवंबर 2017 को परीक्षा आयोजित कराई। छह फरवरी 2018 को चयनित अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट जारी कर दी। रुड़की (हरिद्वार) के जीनियस कोचिंग सेंटर में जिलाधिकारी दीपक रावत ने छापा मारा तो पता चला कि इसी कोचिंग सेंटर के 66 अभ्यर्थियों का चयन इन पदों के लिए हुआ है। इसके बाद आयोग ने जांच की। याचिका में कहा कि एक ही कोचिंग सेंटर से 66 अभ्यर्थियों का चयन होना असंभव है। यह चयन कोचिंग सेंटर व आयोग की मिलीभगत से हुआ है। याचिका में यह कहा कि मेरिट लिस्ट ग्रेड के हिसाब से बनाई जानी चाहिए और जो मेरिट लिस्ट तैयार की गई है उसे निरस्त किया जाए।
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न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। जगदीश प्रसाद समेत चार अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि 21 सितंबर 2016 को उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 515 जूनियर इंजीनियर पदों के लिए विज्ञप्ति जारी की। इन पदों के लिए ऑन लाइन आवेदनों की तिथि 31 अक्तूबर 2016 थी। आयोग ने पांच नवंबर 2017 को परीक्षा आयोजित कराई। छह फरवरी 2018 को चयनित अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट जारी कर दी। रुड़की (हरिद्वार) के जीनियस कोचिंग सेंटर में जिलाधिकारी दीपक रावत ने छापा मारा तो पता चला कि इसी कोचिंग सेंटर के 66 अभ्यर्थियों का चयन इन पदों के लिए हुआ है। इसके बाद आयोग ने जांच की। याचिका में कहा कि एक ही कोचिंग सेंटर से 66 अभ्यर्थियों का चयन होना असंभव है। यह चयन कोचिंग सेंटर व आयोग की मिलीभगत से हुआ है। याचिका में यह कहा कि मेरिट लिस्ट ग्रेड के हिसाब से बनाई जानी चाहिए और जो मेरिट लिस्ट तैयार की गई है उसे निरस्त किया जाए।
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