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प्राथमिक सहायक अध्यापक पद के लिए मोअल्लिम डिग्री अयोग्य
Updated Sat, 23 Sep 2017 02:07 AM IST
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नैनीताल। हाइकोर्ट ने राज्य में प्राथमिक सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए उर्दू मोअल्लिम की डिग्री को अयोग्य करार दिया है। कोर्ट ने यह भी कि कहा कि सहायक शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास होना जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने राज्य की विशेष अपील पर फैसला सुनाते हुए एकलपीठ के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें मोअल्लिम पास अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया गया था।
मामले के अनुसार ऊधमसिंह नगर निवासी मो. हफीज व अन्य ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर प्राथमिक सहायक अध्यापक के पदों पर भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी थी। याचिका में कहा था कि वे उर्दू मोअल्लिम पास हैं, यह डिग्री बीटीसी के समकक्ष मानी जाती है। उत्तर प्रदेश में भी यही नियम लागू है। पूर्व में एकलपीठ ने याचिका स्वीकार कर इन अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश पारित कर दिया था। एकलपीठ के इस आदेश को प्रदेश सरकार ने विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। सरकार की ओर से कहा गया कि 2012 की नियमावली के अनुसार यह डिग्री प्राथमिक सहायक अध्यापक पद के योग्य नहीं है। उत्तराखंड में उर्दू मुख्य विषय के साथ स्नातक, दो साल का बीटीसी/डीएलएड, टीईटी पास के बाद ही शिक्षक बन सकते हैं। उर्दू मोअल्लिम एक साल का है और राज्य में समकक्ष डिग्री को नौकरी के लिए अयोग्य घोषित किया जा चुका है, ऐसे में आवेदक पात्र नहीं हैं। पक्षों की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया।
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मामले के अनुसार ऊधमसिंह नगर निवासी मो. हफीज व अन्य ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर प्राथमिक सहायक अध्यापक के पदों पर भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी थी। याचिका में कहा था कि वे उर्दू मोअल्लिम पास हैं, यह डिग्री बीटीसी के समकक्ष मानी जाती है। उत्तर प्रदेश में भी यही नियम लागू है। पूर्व में एकलपीठ ने याचिका स्वीकार कर इन अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश पारित कर दिया था। एकलपीठ के इस आदेश को प्रदेश सरकार ने विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। सरकार की ओर से कहा गया कि 2012 की नियमावली के अनुसार यह डिग्री प्राथमिक सहायक अध्यापक पद के योग्य नहीं है। उत्तराखंड में उर्दू मुख्य विषय के साथ स्नातक, दो साल का बीटीसी/डीएलएड, टीईटी पास के बाद ही शिक्षक बन सकते हैं। उर्दू मोअल्लिम एक साल का है और राज्य में समकक्ष डिग्री को नौकरी के लिए अयोग्य घोषित किया जा चुका है, ऐसे में आवेदक पात्र नहीं हैं। पक्षों की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया।
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