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बाबा नीम करौली महाराज ने शरीर त्यागने से पहले सिद्धि मां को सौंप दी थी सभी जिम्मेदारी
Updated Fri, 29 Dec 2017 02:19 AM IST
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माई का निधन
- फोटो : अमर उजाला
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भवाली (नैनीताल)। कैंची धाम में बीते 42 साल से मंदिर की व्यवस्थाओं को देख रहीं सिद्धि माई नैनीताल के उच्च परिवार से ताल्लुक रखती थीं। जब पहली बार वे बाबा नीब करोरी महाराज से मिलीं तो उन्होंने सांसारिक जीवन छोड़कर उनकी भक्त बनने का फैसला किया। बाबा ने भी उनके समर्पण को देखते हुए अपना शरीर त्यागने से पहले कैंची धाम की पूरी जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी थी। सिद्धि माई भी अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक कैंची धाम की सेवा में जुटी रहीं।
नीब करोरी महाराज के शरीर त्यागने के बाद से ही सिद्धि माई ट्रस्ट से जुड़ी सभी संस्थाओं की प्रमुख कर्ताधर्ता थीं। ट्रस्ट से जुड़े लोग बताते हैं कि बाबा नीब करोरी वर्ष 1962 में यहां आए थे। उन्होंने शिप्रा नदी के किनारे अपनी धूनी रमाई। धीरे-धीरे यहां आसपास के लोगों का आना शुरू हो गया। 15 जून 1965 को बाबा नीब करोरी ने कैंची में हनुमान मंदिर की स्थापना की। इसी बीच नैनीताल में रहने वाली और उच्च परिवार से ताल्लुक रखने वाली सिद्धि साह (सिद्धि माई) भी कैंची धाम पहुंचीं। उन्होंने महाराज के सानिध्य में रहकर कैंची मंदिर की सेवा का संकल्प लिया। वह नीब करोरी महाराज की अनुपस्थिति में मंदिर के सभी कार्यों को खुद देखती थीं। नीब करोरी बाबा ने शरीर छोड़ने से पहले सारी जिम्मेदारी सिद्धि माई को सौंप दी थी। सिद्धि मां की देखरेख में ही कैंची धाम आश्रम के साथ-साथ कई मंदिरों की स्थापना हुई। उन्होंने हर साल 15 जून को मंदिर में होने वाले महाभंडारे को भी जारी रखा।
वह बाबा के विदेशी भक्तों से भी बराबर संपर्क बनाए रखतीं थीं। विदेशी भक्त सिद्धि माई के दर्शन के लिए कैंची धाम में डेरा डाले रहते थे। मंदिर कमेटी के प्रबंधक विनोद जोशी बताते हैं कि कैंची धाम के अलावा ट्रस्ट की अन्य संस्थाओं में भी सिद्धि मां से पूछे बगैर कोई काम नहीं होता था। अप्रैल से नवंबर तक वह कैंची धाम में ही रहती थीं।
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सिद्धि माई का उत्तराधिकारी कौन
भवाली (नैनीताल)। सिद्धि मां के शरीर त्यागने के बाद अब कैंची धाम और अन्य कार्यों की देखरेख कौन करेगा अथवा सिद्धि मां का उत्तराधिकारी कौन होगा? इसे लेकर भी नगर और आसपास के क्षेत्रों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। फिलहाल उत्तराधिकारी को लेकर अभी किसी का नाम सामने नहीं आया है। माना जा रहा है कि निकट भविष्य में उत्तराधिकारी को लेकर कुछ नाम सामने आ सकते हैं।
दीन-दुखियों की हमेशा मदद की माई ने : साह
नैनीताल। सिद्धि माई बाबा नीब करोरी के साथ ही भगवान हनुमान की भी परमभक्त थीं। उन्होंने कई स्थानों पर हनुमान मंदिरों की स्थापना की। सिद्धि माई के भक्त केके साह के मुताबिक उन्होंने कई दीन दुखियों की सहायता करने के साथ ही कई लोगों को तीर्थ यात्राएं भी करवाईं। उनके भक्त हिंदुस्तान में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी हैं। सिद्धि मां के निधन का समाचार मिलने पर देश-विदेश से उनके भक्तों के लगातार फोन आ रहे हैं।
माल रोड पर फफक-फफक कर रो पड़े भक्त
नैनीताल। सिद्धि माई के जो भक्त अंतिम दर्शन नहीं कर पाए, उन्हें काफी मलाल है। कई भक्त मालरोड पर फफक-फफक कर रो भी पड़े। उनके कई भक्त अंतिम दर्शन के लिए ऋषिकेश रवाना हो गए हैं।
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नीब करोरी महाराज के शरीर त्यागने के बाद से ही सिद्धि माई ट्रस्ट से जुड़ी सभी संस्थाओं की प्रमुख कर्ताधर्ता थीं। ट्रस्ट से जुड़े लोग बताते हैं कि बाबा नीब करोरी वर्ष 1962 में यहां आए थे। उन्होंने शिप्रा नदी के किनारे अपनी धूनी रमाई। धीरे-धीरे यहां आसपास के लोगों का आना शुरू हो गया। 15 जून 1965 को बाबा नीब करोरी ने कैंची में हनुमान मंदिर की स्थापना की। इसी बीच नैनीताल में रहने वाली और उच्च परिवार से ताल्लुक रखने वाली सिद्धि साह (सिद्धि माई) भी कैंची धाम पहुंचीं। उन्होंने महाराज के सानिध्य में रहकर कैंची मंदिर की सेवा का संकल्प लिया। वह नीब करोरी महाराज की अनुपस्थिति में मंदिर के सभी कार्यों को खुद देखती थीं। नीब करोरी बाबा ने शरीर छोड़ने से पहले सारी जिम्मेदारी सिद्धि माई को सौंप दी थी। सिद्धि मां की देखरेख में ही कैंची धाम आश्रम के साथ-साथ कई मंदिरों की स्थापना हुई। उन्होंने हर साल 15 जून को मंदिर में होने वाले महाभंडारे को भी जारी रखा।
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वह बाबा के विदेशी भक्तों से भी बराबर संपर्क बनाए रखतीं थीं। विदेशी भक्त सिद्धि माई के दर्शन के लिए कैंची धाम में डेरा डाले रहते थे। मंदिर कमेटी के प्रबंधक विनोद जोशी बताते हैं कि कैंची धाम के अलावा ट्रस्ट की अन्य संस्थाओं में भी सिद्धि मां से पूछे बगैर कोई काम नहीं होता था। अप्रैल से नवंबर तक वह कैंची धाम में ही रहती थीं।
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सिद्धि माई का उत्तराधिकारी कौन
भवाली (नैनीताल)। सिद्धि मां के शरीर त्यागने के बाद अब कैंची धाम और अन्य कार्यों की देखरेख कौन करेगा अथवा सिद्धि मां का उत्तराधिकारी कौन होगा? इसे लेकर भी नगर और आसपास के क्षेत्रों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। फिलहाल उत्तराधिकारी को लेकर अभी किसी का नाम सामने नहीं आया है। माना जा रहा है कि निकट भविष्य में उत्तराधिकारी को लेकर कुछ नाम सामने आ सकते हैं।
दीन-दुखियों की हमेशा मदद की माई ने : साह
नैनीताल। सिद्धि माई बाबा नीब करोरी के साथ ही भगवान हनुमान की भी परमभक्त थीं। उन्होंने कई स्थानों पर हनुमान मंदिरों की स्थापना की। सिद्धि माई के भक्त केके साह के मुताबिक उन्होंने कई दीन दुखियों की सहायता करने के साथ ही कई लोगों को तीर्थ यात्राएं भी करवाईं। उनके भक्त हिंदुस्तान में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी हैं। सिद्धि मां के निधन का समाचार मिलने पर देश-विदेश से उनके भक्तों के लगातार फोन आ रहे हैं।
माल रोड पर फफक-फफक कर रो पड़े भक्त
नैनीताल। सिद्धि माई के जो भक्त अंतिम दर्शन नहीं कर पाए, उन्हें काफी मलाल है। कई भक्त मालरोड पर फफक-फफक कर रो भी पड़े। उनके कई भक्त अंतिम दर्शन के लिए ऋषिकेश रवाना हो गए हैं।