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लाइलाज बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को भावनात्मक सहारे की जरूरत
Updated Mon, 30 Apr 2018 01:45 AM IST
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हल्द्वानी। लाइलाज बीमारियों से ग्रस्त मरीजों पेलिएटिव केयर या प्रशामक देखभाल मरीज को सुखद एहसास कराती है। ऐसे मरीजों को भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग की ओर से रविवार को रामपुर रोड स्थित एक होटल में पेलिएटिव केयर पर व्याख्यान कार्यशाला हुई। मेयर डॉ. जोगेंद्र रौतेला, प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। चिकित्सकों ने कहा कि लाइलाज बीमारी से ग्रस्त मरीजों को परिवार के सदस्य भी स्वास्थ्य लाभ के लिए सहायक बन सकते हैं। कैंसर, एड्स, पक्षाघात, हृदयाघात, गुर्दा फेल होने जैसी बीमारी से ग्रस्त मरीज को जांच, इलाज, परामर्श के लिए भटकना पड़ा तो पीड़ादायक है। प्रशामक/उपशामक इलाज पद्धति से जीवन के प्रति नजरिए को सकारात्मक बनाया जा सकता है। योग, अध्यात्म, उचित देखरेख से मरीज को सहारा भी मिलता है। प्रशामक/उपशामक टीम का उद्देश्य मरीज को सही राय देना है। ऐसे मरीजों को सहयोग देने के लिए उचित मार्गदर्शन देकर टीम तैयार की जाती है। कार्यशाला में डॉ. उर्मिला पलड़िया, डॉ. गीता भंडारी, डॉ. एके सिन्हा, डॉ. ज्ञान चंद, डॉ. आदित्य, डॉ. कौशल, डॉ. अपर्णा, डॉ. स्वाति, डॉ. शिखा आदि थीं।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग की ओर से रविवार को रामपुर रोड स्थित एक होटल में पेलिएटिव केयर पर व्याख्यान कार्यशाला हुई। मेयर डॉ. जोगेंद्र रौतेला, प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। चिकित्सकों ने कहा कि लाइलाज बीमारी से ग्रस्त मरीजों को परिवार के सदस्य भी स्वास्थ्य लाभ के लिए सहायक बन सकते हैं। कैंसर, एड्स, पक्षाघात, हृदयाघात, गुर्दा फेल होने जैसी बीमारी से ग्रस्त मरीज को जांच, इलाज, परामर्श के लिए भटकना पड़ा तो पीड़ादायक है। प्रशामक/उपशामक इलाज पद्धति से जीवन के प्रति नजरिए को सकारात्मक बनाया जा सकता है। योग, अध्यात्म, उचित देखरेख से मरीज को सहारा भी मिलता है। प्रशामक/उपशामक टीम का उद्देश्य मरीज को सही राय देना है। ऐसे मरीजों को सहयोग देने के लिए उचित मार्गदर्शन देकर टीम तैयार की जाती है। कार्यशाला में डॉ. उर्मिला पलड़िया, डॉ. गीता भंडारी, डॉ. एके सिन्हा, डॉ. ज्ञान चंद, डॉ. आदित्य, डॉ. कौशल, डॉ. अपर्णा, डॉ. स्वाति, डॉ. शिखा आदि थीं।
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