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झोलाछाप पर स्वास् थ्य विभाग का झोला भी खाली
Updated Wed, 22 Nov 2017 02:02 AM IST
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हल्द्वानी। स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण झोलाछाप की दुकानदारी धड़ल्ले से चल रही है। झोलाछापों की जानकारी को लेकर विभाग का झोला भी खाली है। झोलाछाप का कोई सर्वे नहीं हुआ। हालांकि बीते कुछ वर्षों में ड्रग इंस्पेक्टर ने कार्रवाई जरूर की थी।
झोलाछाप के जान से खिलवाड़ करने के मामले समय-समय पर प्रकाश में आते रहते हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इनके खिलाफ कभी अभियान छेड़ने या कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाते हैं। झोलाछापों के यहां से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट कहां जाता है किसी को पता नहीं होता है। झोलाछापों के यहां भी ड्रिप लगाने से लेकर इंजेक्शन लगाने और मरहम-पट्टी करने तक का काम होता है। सीएमओ डॉ. एचके जोशी ने बताया कि वर्ष 2011-12 में 46, 2012-13 में 21, 2013-14 में 33 झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। डॉ. जोशी ने बताया कि वर्ष 2014 से 2016 तक कुल 64 के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। इसमें तीन की दुकानें सील की गई थी। बिना लाइसेंस के झोलाछाप दवाएं भी बेचते पकड़े गए थे। अब अगर सीएमओ के ही आंकड़े मान लिए जाए तो वर्ष 2011 से लेकर वर्ष 2014 तक लगभग सौ झोलाछापों के खिलाफ अभियान चला। जबकि वर्ष 2014 से 2016 तक 64 अन्य के खिलाफ अभियान चला। आंकड़े बता रहे हैं कि जिले में झोलाछाप भी कम नहीं है। इसके बाद ड्रग इंस्पेक्टर न होने के कारण अभियान नहीं चल सका। डॉ. जोशी ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर मीनाक्षी बिष्ट की तैनाती हो गई है और जल्द ही झोलाछापों के खिलाफ अभियान छेड़ा जाएगा। सवाल ये उठता है कि झोलाछापों के यहां से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट आखिर कहां जा रहा है।
कार्रवाई न होने के पीछे ड्रग इंस्पेक्टर न होने का दिया हवाला
तीन वर्षों में 64 के खिलाफ हुई कार्रवाई धड़ल्ले से चल रही हैं दुकानें
आखिर पशु चिकित्सालयों का कहा जा रहा बायो मेडिकल वेस्ट
हल्द्वानी। पशु चिकित्सालयों में जानवरों का इलाज होता है। सवाल ये उठता है कि पशु चिकित्सालयों से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट आखिर कहां जाता है। हल्द्वानी निजी पशु चिकित्सालय भी है। जहां लोग अपने पालतू जानवरों का इलाज कराने आते हैं। विभाग की मानें तो पांच पशु चिकित्सालय के साथ ही 21 छोटे-छोटे सेंटर हैं। विभाग के अपर निदेशक डॉ. एमएस न्याल ने बताया कि सरकारी पशु चिकित्सालय के डाक्टर खेतों में या किसानों के घर जाकर ही पशुओं का इलाज करते हैं। जबकि चिकित्सालयों से ज्यादा बायो मेडिकल वेस्ट नहीं निकलता है। चिकित्सालय में लोग पालतू कुत्तों का इलाज कराने के लिए आते हैं। बताया कि अस्पताल से निकलने वाला वेस्ट नगर निगम को देते हैं।
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प्रारूप के आधार पर होगा सर्वे
हल्द्वानी। जिले में चले रहे निजी अस्पताल, पैथालाजी, लैब, पशु चिकित्सालयों का चिह्नीकरण अब तैयार प्रारूप के अनुसार होगा। अपर मुख्याधिकारी जिला पंचायत हिमानी जोशी ने बताया कि एसडीएम एपी बाजपेयी ने एक प्रारूप अस्पतालों के सर्वे के लिए भेजा है। मातहतों को आदेश दिया गया है कि प्रारूप के अनुसार सर्वे कर जल्द से जल्द रिपोर्ट दें। प्रारूप के अनुसार निजी अस्पतालों, पैथालाजी, लैब एवं पशु चिकित्सालयों से पूछा जाएगा कि बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण कैसे करते हैं।
सभी अस्पतालों को लगाना होगा ईटीपी प्लांट
हल्द्वानी। सरकारी एवं निजी अस्पतालों को अब ईटीपी प्लांट लगाना होगा। ईटीपी (इफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट फार हास्पिटल) लगने से अस्पतालों से निकलने वाला गंदा पानी साफ होने के बाद नलियों में जाएगा। प्लांट ठोस को अलग कर देगा। साथ ही पानी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया एवं वायरस को अलग कर देगा। इसके बाद पानी का ट्रीटमेंट किया जाएगा। पानी का ट्रीटमेंट होने के बाद ही पानी को ड्रेन किया जाएगा। इस प्रक्रिया से बैक्टीरिया, वायरस या गंदगी नलियों में नहीं जाएगी, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा कम हो जाएगा। हल्द्वानी के किसी भी सरकारी एवं निजी अस्पताल में अभी उक्त प्लांट नहीं लगा है। आईएमए के सचिव डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि एनजीटी ने वर्ष 2016 में उक्त प्लांट को लगाने संबंधी आदेश दिया था।
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झोलाछाप के जान से खिलवाड़ करने के मामले समय-समय पर प्रकाश में आते रहते हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इनके खिलाफ कभी अभियान छेड़ने या कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाते हैं। झोलाछापों के यहां से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट कहां जाता है किसी को पता नहीं होता है। झोलाछापों के यहां भी ड्रिप लगाने से लेकर इंजेक्शन लगाने और मरहम-पट्टी करने तक का काम होता है। सीएमओ डॉ. एचके जोशी ने बताया कि वर्ष 2011-12 में 46, 2012-13 में 21, 2013-14 में 33 झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। डॉ. जोशी ने बताया कि वर्ष 2014 से 2016 तक कुल 64 के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। इसमें तीन की दुकानें सील की गई थी। बिना लाइसेंस के झोलाछाप दवाएं भी बेचते पकड़े गए थे। अब अगर सीएमओ के ही आंकड़े मान लिए जाए तो वर्ष 2011 से लेकर वर्ष 2014 तक लगभग सौ झोलाछापों के खिलाफ अभियान चला। जबकि वर्ष 2014 से 2016 तक 64 अन्य के खिलाफ अभियान चला। आंकड़े बता रहे हैं कि जिले में झोलाछाप भी कम नहीं है। इसके बाद ड्रग इंस्पेक्टर न होने के कारण अभियान नहीं चल सका। डॉ. जोशी ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर मीनाक्षी बिष्ट की तैनाती हो गई है और जल्द ही झोलाछापों के खिलाफ अभियान छेड़ा जाएगा। सवाल ये उठता है कि झोलाछापों के यहां से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट आखिर कहां जा रहा है।
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कार्रवाई न होने के पीछे ड्रग इंस्पेक्टर न होने का दिया हवाला
तीन वर्षों में 64 के खिलाफ हुई कार्रवाई धड़ल्ले से चल रही हैं दुकानें
आखिर पशु चिकित्सालयों का कहा जा रहा बायो मेडिकल वेस्ट
हल्द्वानी। पशु चिकित्सालयों में जानवरों का इलाज होता है। सवाल ये उठता है कि पशु चिकित्सालयों से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट आखिर कहां जाता है। हल्द्वानी निजी पशु चिकित्सालय भी है। जहां लोग अपने पालतू जानवरों का इलाज कराने आते हैं। विभाग की मानें तो पांच पशु चिकित्सालय के साथ ही 21 छोटे-छोटे सेंटर हैं। विभाग के अपर निदेशक डॉ. एमएस न्याल ने बताया कि सरकारी पशु चिकित्सालय के डाक्टर खेतों में या किसानों के घर जाकर ही पशुओं का इलाज करते हैं। जबकि चिकित्सालयों से ज्यादा बायो मेडिकल वेस्ट नहीं निकलता है। चिकित्सालय में लोग पालतू कुत्तों का इलाज कराने के लिए आते हैं। बताया कि अस्पताल से निकलने वाला वेस्ट नगर निगम को देते हैं।
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प्रारूप के आधार पर होगा सर्वे
हल्द्वानी। जिले में चले रहे निजी अस्पताल, पैथालाजी, लैब, पशु चिकित्सालयों का चिह्नीकरण अब तैयार प्रारूप के अनुसार होगा। अपर मुख्याधिकारी जिला पंचायत हिमानी जोशी ने बताया कि एसडीएम एपी बाजपेयी ने एक प्रारूप अस्पतालों के सर्वे के लिए भेजा है। मातहतों को आदेश दिया गया है कि प्रारूप के अनुसार सर्वे कर जल्द से जल्द रिपोर्ट दें। प्रारूप के अनुसार निजी अस्पतालों, पैथालाजी, लैब एवं पशु चिकित्सालयों से पूछा जाएगा कि बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण कैसे करते हैं।
सभी अस्पतालों को लगाना होगा ईटीपी प्लांट
हल्द्वानी। सरकारी एवं निजी अस्पतालों को अब ईटीपी प्लांट लगाना होगा। ईटीपी (इफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट फार हास्पिटल) लगने से अस्पतालों से निकलने वाला गंदा पानी साफ होने के बाद नलियों में जाएगा। प्लांट ठोस को अलग कर देगा। साथ ही पानी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया एवं वायरस को अलग कर देगा। इसके बाद पानी का ट्रीटमेंट किया जाएगा। पानी का ट्रीटमेंट होने के बाद ही पानी को ड्रेन किया जाएगा। इस प्रक्रिया से बैक्टीरिया, वायरस या गंदगी नलियों में नहीं जाएगी, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा कम हो जाएगा। हल्द्वानी के किसी भी सरकारी एवं निजी अस्पताल में अभी उक्त प्लांट नहीं लगा है। आईएमए के सचिव डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि एनजीटी ने वर्ष 2016 में उक्त प्लांट को लगाने संबंधी आदेश दिया था।