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यूपी के बर्खास्त अभियंताओं को उतराखंड में नियमित किया
Updated Thu, 16 Nov 2017 02:18 AM IST
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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को मंडी परिषद के पांच अभियंताओं की नियुक्ति और नियमित करने के मामले में 12 सप्ताह में फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।
बुधवार को न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 2001 में उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के पांच वर्कचार्ज अभियंताओं को बिना शासन की अनुमति के उत्तराखंड मंडी परिषद निर्माण शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया। इन अभियंताओं को उत्तर प्रदेश मंडी परिषद ने 1999 में सेवा से हटा दिया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय से स्टे के बाद ये काम कर रहे थे। उत्तर प्रदेश मंडी परिषद ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में विशेष याचिका दायर की। 2012 में उत्तराखंड मंडी परिषद ने पांचों अभियंताओं को नियमित कर दिया। शिकायत पर सरकार ने अपर सचिव कृषि को जांच अधिकारी बनाकर पूरे प्रकरण की जांच कराई। जांच अधिकारी ने अभियंताओं की नियुक्ति तथा नियमितीकरण में आरक्षण के नियमों का उल्लंघन तथा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना बताया। देहरादून निवासी अजय कुमार पैन्युली की याचिका पर सुनवाई के बाद पीठ ने सरकार को जांच रिपोर्ट पर 12 सप्ताह में फैसला लेने का आदेश दिए हैं।
ज कर दिया।
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बुधवार को न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 2001 में उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के पांच वर्कचार्ज अभियंताओं को बिना शासन की अनुमति के उत्तराखंड मंडी परिषद निर्माण शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया। इन अभियंताओं को उत्तर प्रदेश मंडी परिषद ने 1999 में सेवा से हटा दिया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय से स्टे के बाद ये काम कर रहे थे। उत्तर प्रदेश मंडी परिषद ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में विशेष याचिका दायर की। 2012 में उत्तराखंड मंडी परिषद ने पांचों अभियंताओं को नियमित कर दिया। शिकायत पर सरकार ने अपर सचिव कृषि को जांच अधिकारी बनाकर पूरे प्रकरण की जांच कराई। जांच अधिकारी ने अभियंताओं की नियुक्ति तथा नियमितीकरण में आरक्षण के नियमों का उल्लंघन तथा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना बताया। देहरादून निवासी अजय कुमार पैन्युली की याचिका पर सुनवाई के बाद पीठ ने सरकार को जांच रिपोर्ट पर 12 सप्ताह में फैसला लेने का आदेश दिए हैं।
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