{"_id":"5c9fd661bdec22140b20a289","slug":"101553978977-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंदी का बढ़ा क्रेज, अंग्रेजी से दूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंदी का बढ़ा क्रेज, अंग्रेजी से दूरी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद स्कूलों को हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की मान्यता देता है, लेकिन तीन सालों में केवल सात कॉलेजों ने ही बोर्ड से अंग्रेजी माध्यम की मान्यता ली है। अब सिर्फ दो कॉलेजों की मान्यता संबंधी अर्जी विचाराधीन है, जबकि इसी अवधि में 35 स्कूलों ने हिंदी माध्यम की मान्यता ली है। इसके सापेक्ष सीबीएसई अंग्रेजी माध्यम के नए विद्यालयों की संख्या कई गुना अधिक है।
प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम की मान्यता संबंधी शासनादेश वर्ष 2013 में जारी हुआ था। इसके लिए जरूरी कार्रवाई पूरी करने में तीन साल लगे। इसी कारण बोर्ड ने वर्ष 2016 से अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों को वित्तविहीन मान्यता देनी शुरू की। तब से केवल सात विद्यालयों को ही अंग्रेजी माध्यम की मान्यता मिली है। इनमें नैनीताल के तीन, देहरादून, ऊधमसिंह नगर, टिहरी, उत्तरकाशी के एक-एक विद्यालय शामिल हैं। इन विद्यालयों की हालत भी अच्छी नहीं है। इसी कारण उन्होंने हिंदी/अंग्रेजी दोनों माध्यमों की मान्यता ली है, ताकि बच्चों की संख्या बढ़ सके। उत्तराखंड बोर्ड की सचिव डॉ.नीता तिवारी ने बताया कि मान्यता समिति की बैठक में आवेदनों पर विचार किया जाता है। आवेदन पत्र के साथ संबंधित जिलों के सीईओ की रिपोर्ट भी संलग्न होती है।
हिंदी का बढ़ा क्रेज, अंग्रेजी से दूरी
तीन साल में सिर्फ सात स्कूलों ने उत्तराखंड बोर्ड से ली अंग्रेजी की मान्यता
विज्ञापन
प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम की मान्यता संबंधी शासनादेश वर्ष 2013 में जारी हुआ था। इसके लिए जरूरी कार्रवाई पूरी करने में तीन साल लगे। इसी कारण बोर्ड ने वर्ष 2016 से अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों को वित्तविहीन मान्यता देनी शुरू की। तब से केवल सात विद्यालयों को ही अंग्रेजी माध्यम की मान्यता मिली है। इनमें नैनीताल के तीन, देहरादून, ऊधमसिंह नगर, टिहरी, उत्तरकाशी के एक-एक विद्यालय शामिल हैं। इन विद्यालयों की हालत भी अच्छी नहीं है। इसी कारण उन्होंने हिंदी/अंग्रेजी दोनों माध्यमों की मान्यता ली है, ताकि बच्चों की संख्या बढ़ सके। उत्तराखंड बोर्ड की सचिव डॉ.नीता तिवारी ने बताया कि मान्यता समिति की बैठक में आवेदनों पर विचार किया जाता है। आवेदन पत्र के साथ संबंधित जिलों के सीईओ की रिपोर्ट भी संलग्न होती है।
विज्ञापन
हिंदी का बढ़ा क्रेज, अंग्रेजी से दूरी
तीन साल में सिर्फ सात स्कूलों ने उत्तराखंड बोर्ड से ली अंग्रेजी की मान्यता