फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Kotdwar News ›   Villagers surrounded DFO

ग्रामीणाें ने डीएफओ को घेरा

Fri, 15 Jul 2016 10:06 PM IST
अमर उजाला/कोटद्वार।
अमर उजाला/कोटद्वार। Updated Fri, 15 Jul 2016 10:06 PM IST
विज्ञापन
Villagers surrounded DFO
देवीखाल जुगरसैण मार्ग निर्माण को लेकर डीएफओ लैंसडौन का घेराव करते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

एक दशक से वन भूमि हस्तांतरण में फंसे देवीखाल-जुगरसैण-फतेहपुर मोटर मार्ग में लेट-लतीफी केे देखते हुए शुक्रवार को जुगरसैंण, मेरूवा, तल्ला रोहिणी, कोला, भ्यूलेत समेत आसपास के गांवों के लोगों ने लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ दफ्तर पहुंचकर धरना-प्रदर्शन किया। इस मौके पर ग्रामीणों ने डीएफओ का घेराव कर उनकी सड़क का वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को जल्द से जल्द भारत सरकार को भेजने की मांग की।

विज्ञापन


यमकेश्वर ब्लाक की पूर्व प्रमुख रेणू बिष्ट, जुगरसैंण की ग्राम प्रधान सुमित्रा देवी, सुनील ध्यानी समेत क्षेत्र के करीब पचास-साठ ग्रामीण शुक्रवार को लैंसडौन के डीएफओ के दफ्तर में एकत्र हुए। उन्होंने धरना-प्रदर्शन करते हुए वर्ष 2006 में स्वीकृत देवीखाल-जुगरसैण-फतेहपुर मोटर मार्ग के लिए वन भूमि हस्तांतरण को मंजूरी न मिलने पर नाराजगी जताई। कहा कि उत्तराखंड राज्य के बनने के सोलह साल बाद भी ग्रामीण पांच से सात किमी पैदल चलकर गांव पहुंचते हैं। कहा कि राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत जुगरसैंण और मेरूवा समेत आसपास के सात गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए दस किमी सड़क की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान की थी। 22 सितंबर, 2009 को तत्कालीन विधायक ने सड़क का विधिवत शिलान्यास भी कर दिया लेकिन वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्तावों में कई कमियां और खामियां रहने के कारण वर्ष 2011 में भारत सरकार ने इस प्रस्ताव को ही निरस्त कर दिया। अब एक बार फिर से वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव लोनिवि की ओर से भेजा गया है, जिसमें अनावश्यक देरी की जा रही है।
विज्ञापन


घेराव करने वालों में ललिता प्रसाद ध्यानी, सुरेंद्र बौंठियाल, विनोद ध्यानी, ओमप्रकाश ध्यानी, गोपालदत्त, विपिन ध्यानी, मोहन कुमार और अनिल कुमार आदि थे।
डीएफओ नितिशमणि त्रिपाठी ने ग्रामीणों को बताया कि लोनिवि की ओर से भेजे गए वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव में कई खामियां है। जिसे दूर करने के लिए उन्हें पत्र लिख दिया गया है। बताया कि लोनिवि की ओर से मूल प्रस्ताव और आनलाइन प्रस्ताव के वन भूमि रकबे में ही भिन्नता है, जिसे दुरुस्त करने, पौधरोपण के लिए चयनित स्थल का पुन: निरीक्षण करवाने के लिए लिखा गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed