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Kotdwar News: लंपी रोग की दस्तक, नगर पालिका क्षेत्र में मिल एक गाय
Tue, 25 Aug 2026 07:08 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Tue, 25 Aug 2026 07:08 PM IST
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मच्छर-मक्खियों और टिक से फैलता है संक्रमण
दुगड्डा (कोटद्वार)। क्षेत्र में मवेशियों में लंपी स्किन डिजीज (गांठदार त्वचा रोग) का प्रकोप दिखाई देने लगा है। नगर पालिका क्षेत्र में एक गाय बीमारी से ग्रसित मिली है। विभाग ने पशुपालकों से पशुओं की विशेष देखभाल करने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्साधिकारी से संपर्क करने की अपील की है।
पशु चिकित्सालय दुगड्डा से मिली जानकारी के अनुसार लंपी एक वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और किलवि (टिक) के काटने से फैलता है। दूषित चारा-पानी, संक्रमित पशुओं के सीधे संपर्क और लार के माध्यम से भी संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। बीमारी से बचाव के लिए गोशालाओं की नियमित सफाई कर फिनाइल और कीटनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। गोशालाओं में नीम की पत्तियों और कपूर का धुआं करने से भी कीटों से बचाव में मदद मिल सकती है।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दीपेश शर्मा ने बताया कि लंपी से ग्रसित पशुओं की उचित देखभाल और समय पर उपचार बेहद जरूरी है। बीमार पशुओं को ताजा आहार और पर्याप्त पानी देना चाहिए। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि बाहरी क्षेत्र से लौटने के बाद सीधे पशु बाड़े में प्रवेश न करें। जूते-चप्पलों के माध्यम से भी संक्रमण फैलने की संभावना रहती है। उचित देखभाल और उपचार मिलने पर संक्रमित पशु दो से चार सप्ताह में स्वस्थ हो सकता है।
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दुगड्डा (कोटद्वार)। क्षेत्र में मवेशियों में लंपी स्किन डिजीज (गांठदार त्वचा रोग) का प्रकोप दिखाई देने लगा है। नगर पालिका क्षेत्र में एक गाय बीमारी से ग्रसित मिली है। विभाग ने पशुपालकों से पशुओं की विशेष देखभाल करने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्साधिकारी से संपर्क करने की अपील की है।
पशु चिकित्सालय दुगड्डा से मिली जानकारी के अनुसार लंपी एक वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और किलवि (टिक) के काटने से फैलता है। दूषित चारा-पानी, संक्रमित पशुओं के सीधे संपर्क और लार के माध्यम से भी संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। बीमारी से बचाव के लिए गोशालाओं की नियमित सफाई कर फिनाइल और कीटनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। गोशालाओं में नीम की पत्तियों और कपूर का धुआं करने से भी कीटों से बचाव में मदद मिल सकती है।
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पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दीपेश शर्मा ने बताया कि लंपी से ग्रसित पशुओं की उचित देखभाल और समय पर उपचार बेहद जरूरी है। बीमार पशुओं को ताजा आहार और पर्याप्त पानी देना चाहिए। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि बाहरी क्षेत्र से लौटने के बाद सीधे पशु बाड़े में प्रवेश न करें। जूते-चप्पलों के माध्यम से भी संक्रमण फैलने की संभावना रहती है। उचित देखभाल और उपचार मिलने पर संक्रमित पशु दो से चार सप्ताह में स्वस्थ हो सकता है।
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