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किडनी फेल होने पर जिंदगी के लिए जूझ रहा है 11 साल का लक्की
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कोटद्वार। दोनों किडनी खराब होने के बाद इलाज नहीं मिलने के कारण जिंदगी के लिए जूझ रहे 11 साल के बच्चे लक्की को मदद की दरकार है। आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा कार्ड होने के बाद भी उसे इसका नहीं मिल रहा है। आर्थिक तंगी के कारण गरीब माता-पिता ने लोगों और सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
भाबर क्षेत्र के कलालघाटी चौकीघाट निवासी लक्की का पिता भगत सिंह मजदूरी करता है। उसकी माता लक्ष्मी देवी गृहणी है। राजकीय बेस अस्पताल में डायलिसिस के लिए पहुंची माता लक्ष्मी देवी का रो रो कर बुरा हाल है। उसने बताया कि उसका बेटा लक्की सरस्वती शिशु मंदिर जशोधरपुर में कक्षा छठी में पढ़ता है। वर्ष 2013 में तेज बुखार और बेहोश होने पर उन्होंने पहले कोटद्वार के सरकारी अस्पताल और उसके बाद पीजीआई चंडीगढ़ में बच्चे को दिखाया था, जहां पर डाक्टरों ने बच्चे की दोनों किडनी फेल होने की पुष्टि की थी। तब से वे पीजीआई चंडीगढ़ से बच्चे का इलाज करा रहे थे। वे अपनी पूरी जमापूंजी बच्चे की दवाइयों पर लगा चुके हैं। अब उनके पास दवाई के लिए पैसे नहीं हैं। बेस अस्पताल के डायलिसिस सेंटर के चिकित्सक डा. संजीव ने बताया कि सेंटर में स्वास्थ्य बीमा कार्ड के माध्यम से डायलिसिस निशुल्क है, लेकिन बच्चे के हाथ में परमानेंट एक्सेस प्वाइंट (एवी फिस्टुला) नहीं बनने के कारण डायलिसिस नहीं हो पा रही है। इसके लिए बच्चे को किसी बड़े अस्पताल में बस्कुलर सर्जन से परमानेंट एक्सेस प्वाइंट बनाना पड़ेगा, जिसमें हजारों रुपये खर्चा आने की संभावना है।
-फोटो
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भाबर क्षेत्र के कलालघाटी चौकीघाट निवासी लक्की का पिता भगत सिंह मजदूरी करता है। उसकी माता लक्ष्मी देवी गृहणी है। राजकीय बेस अस्पताल में डायलिसिस के लिए पहुंची माता लक्ष्मी देवी का रो रो कर बुरा हाल है। उसने बताया कि उसका बेटा लक्की सरस्वती शिशु मंदिर जशोधरपुर में कक्षा छठी में पढ़ता है। वर्ष 2013 में तेज बुखार और बेहोश होने पर उन्होंने पहले कोटद्वार के सरकारी अस्पताल और उसके बाद पीजीआई चंडीगढ़ में बच्चे को दिखाया था, जहां पर डाक्टरों ने बच्चे की दोनों किडनी फेल होने की पुष्टि की थी। तब से वे पीजीआई चंडीगढ़ से बच्चे का इलाज करा रहे थे। वे अपनी पूरी जमापूंजी बच्चे की दवाइयों पर लगा चुके हैं। अब उनके पास दवाई के लिए पैसे नहीं हैं। बेस अस्पताल के डायलिसिस सेंटर के चिकित्सक डा. संजीव ने बताया कि सेंटर में स्वास्थ्य बीमा कार्ड के माध्यम से डायलिसिस निशुल्क है, लेकिन बच्चे के हाथ में परमानेंट एक्सेस प्वाइंट (एवी फिस्टुला) नहीं बनने के कारण डायलिसिस नहीं हो पा रही है। इसके लिए बच्चे को किसी बड़े अस्पताल में बस्कुलर सर्जन से परमानेंट एक्सेस प्वाइंट बनाना पड़ेगा, जिसमें हजारों रुपये खर्चा आने की संभावना है।
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