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आखिर कब धरातल पर उतरेगा कण्वाश्रम-महाबगढ़ ट्रैकिंग रूट
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बदहाल कण्वाश्रम-सिमलना-पौखाल मार्ग पर ट्रैकिंग करते पर्यटक और क्षेत्रवासी।
- फोटो : KOTDWAR
पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं समेट कण्वाश्रम-पौखाल-महाबगढ़ ट्रैकिंग रूट को पौड़ी जिला प्रशासन, पर्यटन और सरकार ने भुला दिया है। मुख्यमंत्री की घोषणाओं के बाद भी कण्वाश्रम से सिमलना और पौखाल तक सड़क नहीं बन सकी है। एक जमाने में जिला पंचायत की छह फुटी इस मार्ग पर बद्री-केदार की यात्रा संचालित हुआ करती थी। इस पैदल और अश्व मार्ग को सड़क में तब्दील होना था, लेकिन सड़क तो दूर यह ट्रैकिंग रूट भी नहीं बन सका।
चक्रवर्ती सम्राट भरत की जन्मस्थली और महर्षि कण्व की तपस्थली कण्वाश्रम से महाबगढ़, सिमलना और पौखाल क्षेत्र के लिए वर्ष 1952 में पौड़ी जिला पंचायत ने पैदल और अश्व मार्ग का निर्माण कराया था। इससे पूर्व से इस मार्ग पर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ की पैदल यात्रा होती थी। आज भी इस पैदल मार्ग पर क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग आवाजाही करते हैं, लेकिन आपदा की मार और सरकार की अनदेखी से यह मार्ग धरातल से गायब हो गया है। भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के राज्य कार्यकारिणी सदस्य अमित सजवाण का कहना है कि उत्तराखंड बनने के बाद भी कण्वाश्रम क्षेत्र उपेक्षित होकर रह गया है। जो पैदल और अश्व मार्ग आज सड़क में तब्दील होना चाहिए था, उस पर आज पैदल आवाजाही भी मुश्किल हो गई है।
कलालघाटी निवासी दिनेश गौड़, अशोक गौड़, प्रमोद नैथानी, जगदंबा प्रसाद उनियाल, शिक्षाविद् ज्ञान सिंह नेगी बताते हैं कि एक जमाने में इसी मार्ग से अजमेर पट्टी के पोखरी, सिमलना, मथाणा, ईड़ा, कांडई, बल्ली, चूना महेड़ा समेत पौखाल तक दर्जनों गांवों के लिए आवाजाही होती थी। आज भी इस रूट पर पर्यटक और स्थानीय प्रकृति प्रेमी ट्रैकिंग करते हैं, लेकिन रूट रखरखाव के अभाव में बदहाल हो चुका है। क्षेत्रवासी इसी अश्व मार्ग को मोटर मार्ग में तब्दील करने की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2015 में तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने इस मार्ग के निर्माण की घोषणा भी की, लेकिन मोटर मार्ग तो दूर अब यह पैदल मार्ग भी नहीं बचा है।
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कण्वाश्रम-पौखाल मार्ग पर जिला पंचायत की ओर से सड़क की मरम्मत और मरणखेत में क्षतिग्रस्त पुल को ठीक करने का प्रयास किया गया, लेकिन वन विभाग ने काम नहीं करने दिया। कण्वाश्रम से पौखाल सड़क निर्माण होना चाहिए। ट्रैकिंग रूट के रुप में विकसित होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी।
-भरत सिंह नेगी, सदस्य जिला पंचायत पठूड़ अकरा (दुगड्डा)।
कण्वाश्रम-पौखाल, चरेख और महाबगढ़ के लिए ट्रैकिंग रूट विकसित करने का प्रस्ताव किया जाएगा। इस क्षेत्र में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं।
अतुल भंडारी, जिला पर्यटन अधिकारी पौड़ी।
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चक्रवर्ती सम्राट भरत की जन्मस्थली और महर्षि कण्व की तपस्थली कण्वाश्रम से महाबगढ़, सिमलना और पौखाल क्षेत्र के लिए वर्ष 1952 में पौड़ी जिला पंचायत ने पैदल और अश्व मार्ग का निर्माण कराया था। इससे पूर्व से इस मार्ग पर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ की पैदल यात्रा होती थी। आज भी इस पैदल मार्ग पर क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग आवाजाही करते हैं, लेकिन आपदा की मार और सरकार की अनदेखी से यह मार्ग धरातल से गायब हो गया है। भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के राज्य कार्यकारिणी सदस्य अमित सजवाण का कहना है कि उत्तराखंड बनने के बाद भी कण्वाश्रम क्षेत्र उपेक्षित होकर रह गया है। जो पैदल और अश्व मार्ग आज सड़क में तब्दील होना चाहिए था, उस पर आज पैदल आवाजाही भी मुश्किल हो गई है।
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कलालघाटी निवासी दिनेश गौड़, अशोक गौड़, प्रमोद नैथानी, जगदंबा प्रसाद उनियाल, शिक्षाविद् ज्ञान सिंह नेगी बताते हैं कि एक जमाने में इसी मार्ग से अजमेर पट्टी के पोखरी, सिमलना, मथाणा, ईड़ा, कांडई, बल्ली, चूना महेड़ा समेत पौखाल तक दर्जनों गांवों के लिए आवाजाही होती थी। आज भी इस रूट पर पर्यटक और स्थानीय प्रकृति प्रेमी ट्रैकिंग करते हैं, लेकिन रूट रखरखाव के अभाव में बदहाल हो चुका है। क्षेत्रवासी इसी अश्व मार्ग को मोटर मार्ग में तब्दील करने की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2015 में तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने इस मार्ग के निर्माण की घोषणा भी की, लेकिन मोटर मार्ग तो दूर अब यह पैदल मार्ग भी नहीं बचा है।
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कण्वाश्रम-पौखाल मार्ग पर जिला पंचायत की ओर से सड़क की मरम्मत और मरणखेत में क्षतिग्रस्त पुल को ठीक करने का प्रयास किया गया, लेकिन वन विभाग ने काम नहीं करने दिया। कण्वाश्रम से पौखाल सड़क निर्माण होना चाहिए। ट्रैकिंग रूट के रुप में विकसित होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी।
-भरत सिंह नेगी, सदस्य जिला पंचायत पठूड़ अकरा (दुगड्डा)।
कण्वाश्रम-पौखाल, चरेख और महाबगढ़ के लिए ट्रैकिंग रूट विकसित करने का प्रस्ताव किया जाएगा। इस क्षेत्र में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं।
अतुल भंडारी, जिला पर्यटन अधिकारी पौड़ी।