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Kotdwar News: हाथियों ने बागवानी को उजाड़ा, चारा पत्ती के पेड़ों को भी पहुंचाया नुकसान
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दुगड्डा। दुगड्डा ब्लॉक के राजस्व ग्राम नाथूपुर में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार रात को एक बार फिर तीन हाथियों के झुंड ने गांव में आम और केले की बागवानी को तहस-नहस कर डाला। साथ ही चारा पत्ती के पेड़ों को भी नुकसान पहुंचाया। हाथियों के घर आंगन में धमकने से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। ग्रामीण रातभर कनस्तर बजाकर हाथियों को घर आंगन से दूर भगाने में जुटे रहे, लेकिन हाथी टस से मस नहीं हुए।
नाथूपुर गांव निवासी जेएस रावत, हिमांशु, प्रीति, चंद्रमोहन सिंह और प्रियांशु आदि ने बताया कि बुधवार को शाम करीब 7:30 बजे बिंलगी और तुसराणी गांव के रास्ते तीन टस्कर हाथी गांव में आ धमके। इस दौरान हाथियों ने काश्तकारों की आम और केले की बागवानी को तहस-नहस कर डाला। साथ ही भीमल, गींठी, रोहणी, बांस आदि पशु चारे के पेड़ों को भी नुकसान पहुंचाया। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों को भगाने के लिए उन्होंने पटाखे जलाकर भगाने का प्रयास किया, लेकिन हाथी टस से मस नहीं हुए। बाद में हाथी ग्रामीणों में आवास के निकट पहुंच गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। दहशत से ग्रामीण रात भर चैन की नींद भी नहीं सो सके। उन्होंने कनस्तर बजाकर किसी तरह हाथियों को आंगन से भगाया। कहा कि सुबह 6:30 बजे हाथियों के जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों का आरोप है कि रेंज कार्यालय में पटाखे तक नहीं हैं, जिससे हाथियों को भगाने के लिए बाजार से पटाखे खरीदने पड़ रहे हैं। ग्रामीण एक माह से हाथियों के उत्पात से परेशान हैं। उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में वनकर्मियों की गश्त बढ़ाने, ग्रामीणों को पटाखे उपलब्ध कराने और हाथियों को आबादी क्षेत्र से दूर जंगल में खदेड़ने की मांग उठाई है।
हाथियों की मूवमेंट पिछले कई दिनों से साझासैंण, नाथूपुर और आसपास के गांवों में बनी हुई है। बुधवार रात को भी वनकर्मियों को मौके पर भेजकर हाथियों को आबादी से दूर खदेड़ा गया था। क्षेत्र में वनकर्मियों की गश्त बढ़ाई जा रही है।
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- प्रमोद डोबरियाल, रेंजर दुगड्डा।
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नाथूपुर गांव निवासी जेएस रावत, हिमांशु, प्रीति, चंद्रमोहन सिंह और प्रियांशु आदि ने बताया कि बुधवार को शाम करीब 7:30 बजे बिंलगी और तुसराणी गांव के रास्ते तीन टस्कर हाथी गांव में आ धमके। इस दौरान हाथियों ने काश्तकारों की आम और केले की बागवानी को तहस-नहस कर डाला। साथ ही भीमल, गींठी, रोहणी, बांस आदि पशु चारे के पेड़ों को भी नुकसान पहुंचाया। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों को भगाने के लिए उन्होंने पटाखे जलाकर भगाने का प्रयास किया, लेकिन हाथी टस से मस नहीं हुए। बाद में हाथी ग्रामीणों में आवास के निकट पहुंच गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। दहशत से ग्रामीण रात भर चैन की नींद भी नहीं सो सके। उन्होंने कनस्तर बजाकर किसी तरह हाथियों को आंगन से भगाया। कहा कि सुबह 6:30 बजे हाथियों के जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों का आरोप है कि रेंज कार्यालय में पटाखे तक नहीं हैं, जिससे हाथियों को भगाने के लिए बाजार से पटाखे खरीदने पड़ रहे हैं। ग्रामीण एक माह से हाथियों के उत्पात से परेशान हैं। उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में वनकर्मियों की गश्त बढ़ाने, ग्रामीणों को पटाखे उपलब्ध कराने और हाथियों को आबादी क्षेत्र से दूर जंगल में खदेड़ने की मांग उठाई है।
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हाथियों की मूवमेंट पिछले कई दिनों से साझासैंण, नाथूपुर और आसपास के गांवों में बनी हुई है। बुधवार रात को भी वनकर्मियों को मौके पर भेजकर हाथियों को आबादी से दूर खदेड़ा गया था। क्षेत्र में वनकर्मियों की गश्त बढ़ाई जा रही है।
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- प्रमोद डोबरियाल, रेंजर दुगड्डा।