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तहसील में पानी के ओवरहैड टैंक पर चढ़े अनशनकारी, हड़कंप
Updated Tue, 18 Jul 2017 10:23 PM IST
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कोटद्वार। लालपुल के पास तोड़े गए मंदिर के पुनर्निर्माण और डीएफओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दो दिन से आमरण अनशन पर बैठे दीपक बजरंगी और राजकुमार मंगलवार को तहसील स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए। इससे पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने उन्हें मनाने के काफी प्रयास किए, लेकिन वे नहीं माने। उनके समर्थन में हिंदू संगठनों ने देर शाम कोटद्वार बाजार बंद कराया। क्षेत्रीय विधायक और वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत से फोन पर हुई वार्ता के बाद आंदोलन दो दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है।
मंगलवार को मानव प्रकृति पशु एवं गौ सेवा समिति के अध्यक्ष दीपक बजरंगी और सदस्य राजकुमार गुप्ता का आमरण अनशन कोटद्वार तहसील में दूसरे दिन भी जारी रहा। एसडीएम के निर्देश पर राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के डाक्टरों ने आमरण अनशनकारियों के स्वास्थ्य की जांच की। डाक्टरों की सलाह पर एसडीएम राकेश तिवारी ने अनशनकारियों को शाम पांच बजे तक अनशन समाप्त करने की चेतावनी दे डाली तो अनशनकारी भड़क गए। उन्होंने तहसील के एक कमरे में अपने को बंद कर लिया। एसडीएम को कर्मचारियों ने अनशनकारियों के कमरे में बंद होने की सूचना दी। इस पर तहसील कर्मचारियों ने कमरे में रखे कंप्यूटर पर काम करने के बहाने कमरा खुलवाया और उन्हें कमरे से बाहर कर दिया। कमरे से बाहर निकलते ही अनशनकारी तहसील परिसर में बने पानी के ओवरहेड टैंक में चढ़ गए। देखते ही देखते यह खबर शहर में फैल गई। विश्व हिंदू परिषद और अन्य हिंदू संगठनों के लोग तहसील में एकत्र हो गए। प्रशासन ने अनशनकारियों को समझाने के लिए टंकी में चढ़ने का प्रयास किया, लेकिन अनशनकारियों ने उनके करीब आने पर टंकी से कूदकर आत्महत्या की चेतावनी दे डाली। इससे पुलिस-प्रशासन सहम गया।
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विहिप, बजरंग दल और हिंदू जागरण मंच समेत कई संगठनों के लोगों ने कहा कि प्रशासन को अनशनकारियों को चेतावनी नहीं देनी चाहिए थी। प्रशासन के गलत रवैये पर भी मामला बिगड़ा है। करीब एक पखवाड़े से चल रहे आंदोलन की सही रिपोर्ट भी शासन तक नहीं भेजी जा रही है। उन्होंने एसडीएम का घेराव करते हुए इसे प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली करार दिया। एसडीएम ने बताया कि डाक्टरी जांच में राजू बजरंगी के गुर्दे में इंफेक्शन बताया गया था, जिसे देखते हुए उसे अनशन समाप्त करने को कहा गया था। हंगामा तहसील परिसर से शहर की सड़कों तक पहुंच गया। यहां हिंदू संगठनों ने बाजार बंद करवाया। स्टेशन रोड पर बाजार बंद कराने वालों की दुकानदारों के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई। देर शाम अनशनकारियों की वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत से फोन पर हुई वार्ता के बाद ही वे पानी की टंकी से नीचे उतरे। वन मंत्री ने इस मामले के समाधान के लिए दो दिन का समय मांगा है।
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